नई दिल्ली: अयोध्या के राम मंदिर में चढ़ावे की कथित चोरी के विवाद के बीच अब BJP शासित उत्तराखंड के श्री बद्रीनाथ धाम मंदिर में भी चढ़ावे और दान के कथित गबन के आरोप सामने आए हैं. अगले साल की शुरुआत में होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले यह मामला राज्य में BJP के लिए नई राजनीतिक मुश्किलें खड़ी कर सकता है.
श्री बद्रीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति (BKTC) के अध्यक्ष हेमंत द्विवेदी ने इस मामले की “निष्पक्ष” और “तथ्यों पर आधारित” जांच के लिए एक समिति बनाने की घोषणा की है.
दिप्रिंट से बातचीत में BJP से जुड़े राजनीतिक नियुक्ति वाले पद पर मौजूद द्विवेदी ने कहा कि शुरुआती जांच पहले ही शुरू कर दी गई है और दान की गिनती की प्रक्रिया में शामिल सभी कर्मचारियों को कारण बताओ नोटिस जारी किए गए हैं.
उन्होंने कहा, “असल में बहुत कम लोग जानते हैं कि दान की गिनती के समय पारदर्शिता बनाए रखने के लिए श्रद्धालु भी वहां मौजूद रहते हैं. कई लोग आरोप लगा रहे हैं कि जिस कर्मचारी पर सवाल उठ रहे हैं, वह मेरा निजी सहायक (PA) है, जबकि यह बिल्कुल गलत है. यह मामला संवेदनशील है और राम मंदिर में दान चोरी के आरोप सामने आने के तुरंत बाद यह मामला भी सामने आया. इसलिए हमने इसकी गंभीरता को समझा और फैसला किया कि इसे पूरी सावधानी से संभाला जाना चाहिए. भैरव सेना से शिकायत मिलने के 24 घंटे के भीतर हमने कार्रवाई की.”
द्विवेदी ने कहा कि ऐसा लगता है कि इस मामले को राजनीतिक मुद्दा बनाने की कोशिश की जा रही है. उन्होंने इसे राज्य की पुष्कर धामी सरकार को बदनाम करने की साजिश बताया.
उन्होंने दिप्रिंट से कहा, “चारधाम यात्रा का पहला चरण सफलतापूर्वक पूरा हो चुका है और अब निश्चित तौर पर इसे राजनीतिक विवाद बनाने की कोशिश की जा रही है.”
उन्होंने हिंदी में कहा, “ये धार्मिक आस्था का केंद्र है और सनातन धर्म और देवभूमि के प्रति इसे एक राजनीतिक मुद्दा बनाया जा रहा है.” यानी उनका कहना था कि सनातन धर्म और देवभूमि को निशाना बनाने की कोशिश हो रही है.
उन्होंने आगे कहा कि यह मंदिर करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था और श्रद्धा का केंद्र है. साथ ही ऐसा भी लगता है कि धामी सरकार को निशाना बनाकर उसकी सार्वजनिक छवि को नुकसान पहुंचाने की कोशिश की जा रही है.
उन्होंने कहा, “लगता है कि सनसनी फैलाने और गलत जानकारी फैलाने की कोशिश की गई है. मौजूदा स्थिति में तुरंत जरूरी कदम उठाए गए हैं. ऐसा लगता है कि इस मामले को राजनीतिक रंग देने की साजिश की जा रही है.”
द्विवेदी इससे पहले भी कह चुके हैं कि सोशल मीडिया पर चल रहे आरोपों को श्री बद्रीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति ने बहुत गंभीरता से लिया है और संबंधित लोगों से जवाब मांगा है.
उन्होंने कहा, “जांच पूरी होने के बाद अगर कोई कर्मचारी दोषी पाया जाता है, तो उसके खिलाफ नियमों के मुताबिक सख्त और प्रभावी कार्रवाई की जाएगी.”
यह मामला तब सामने आया जब हिंदू संगठन भैरव सेना ने BKTC के एक कर्मचारी पर मंदिर के दान की रकम चोरी करने का आरोप लगाया.
BJP की चिंता
उत्तराखंड में विधानसभा चुनाव अब कुछ ही महीनों दूर हैं. ऐसे में राज्य BJP इस मामले को लेकर चिंतित है. सूत्रों के मुताबिक, पार्टी नेताओं का कहना है कि राम मंदिर दान चोरी मामले की तरह यहां जांच में देरी नहीं हुई. वहां जांच देर से शुरू हुई थी और मामला बड़ा विवाद बन गया था. जबकि BKTC ने पहले ही जांच के आदेश दे दिए हैं.
BJP के एक वरिष्ठ नेता ने कहा, “ऐसे समय में जब उत्तराखंड में चुनाव तय समय से पहले, यहां तक कि इसी साल भी कराए जाने की चर्चा चल रही है, अयोध्या मामले के बाद ऐसे आरोप सामने आना जनता की राय पर असर डाल सकता है और विपक्ष को सरकार पर हमला करने का मौका दे सकता है. सरकार ने इन आरोपों को गंभीरता से लिया है और तुरंत कार्रवाई की है.”
कांग्रेस ने BKTC की ओर से कराई जा रही जांच पर भी सवाल उठाने शुरू कर दिए हैं. पार्टी की वरिष्ठ नेता रागिनी नायक ने पूछा कि जिन लोगों पर आरोप लगे हैं, अगर वही लोग जांच करेंगे तो न्याय कैसे मिलेगा.
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और सांसद जयराम रमेश ने कहा, “राम मंदिर के नाम पर वोट लिए गए, लेकिन अब राम का नाम बदनाम किया जा रहा है. हाल ही में केदारनाथ और बद्रीनाथ से भी खुलासे सामने आए हैं, जहां दान की चोरी हुई. BJP शासित राज्यों में ही यह चोरी क्यों हो रही है? क्योंकि इन ट्रस्टों में BJP और RSS के लोग हैं. क्या प्रधानमंत्री और गृह मंत्री को इन लोगों के बारे में जानकारी नहीं थी?”
यह मामला BJP के लिए इसलिए भी अहम है क्योंकि बद्रीनाथ धाम हिंदुओं की सबसे महत्वपूर्ण तीर्थ यात्राओं में से एक है. उत्तराखंड के केदारनाथ, यमुनोत्री और गंगोत्री के साथ बद्रीनाथ चारधाम यात्रा का प्रमुख हिस्सा है, जो हिंदुओं की सबसे महत्वपूर्ण धार्मिक यात्राओं में गिनी जाती है.
हर साल उत्तराखंड में हजारों हिंदू श्रद्धालु और बड़ी संख्या में पर्यटक आते हैं. BJP की ओर से राजनीतिक नियुक्ति पाने वाले हेमंत द्विवेदी ने सोशल मीडिया पर चल रहे उन आरोपों को भी खारिज किया, जिनमें संदिग्ध कर्मचारी को उनका “निजी सचिव” बताया जा रहा था.
उन्होंने कहा, “जिस कर्मचारी पर सवाल उठाए जा रहे हैं, वह श्री बद्रीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति का नियमित सरकारी कर्मचारी है. वह पहले समिति के तीन पूर्व अध्यक्षों के निजी सहायक (PA) के तौर पर भी काम कर चुका है. इसलिए अगर सोशल मीडिया पर उसके बारे में लगाए गए आरोप सही पाए जाते हैं, तो दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी.”
उधर BKTC के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) सोहन सिंह रांगड़, जो राज्य सेवा के अधिकारी हैं, ने एक बयान में कहा कि 2 जुलाई से मंदिर से जुड़ी एक सोशल मीडिया पोस्ट तेजी से वायरल हो रही है.
उन्होंने कहा, “मिली शिकायत के आधार पर आज मंदिर परिसर के CCTV फुटेज की जांच की गई. हालांकि उपलब्ध फुटेज पर्याप्त साफ नहीं है. मामले की गंभीरता और संवेदनशीलता को देखते हुए BKTC अध्यक्ष को पूरी जानकारी दे दी गई है. अध्यक्ष के निर्देश पर संबंधित कर्मचारियों से जवाब मांगा जा रहा है.”
उन्होंने आगे कहा, “इसके अलावा इस मामले की निष्पक्ष और विस्तृत जांच के लिए एक आंतरिक जांच समिति बनाने का प्रस्ताव अध्यक्ष को भेजा जा रहा है. समिति बनने के बाद वह सभी तथ्यों, उपलब्ध सबूतों और संबंधित पक्षों के बयान के आधार पर विस्तृत जांच करेगी और अपनी रिपोर्ट सौंपेगी.”
रांगड़ ने आगे कहा कि यह मामला उत्तराखंड के विश्व प्रसिद्ध तीर्थ स्थल से जुड़ा है, जो लाखों श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र है.
उन्होंने कहा, “इसलिए जब तक किसी औपचारिक जांच में कोई आरोप साबित नहीं हो जाता, तब तक बिना पुष्टि वाले या भ्रामक आरोप और जवाबी आरोप लगाने से बचना चाहिए. सभी से उम्मीद है कि वे संयम रखें और धार्मिक भावनाओं का सम्मान करें, ताकि इस पवित्र धाम की गरिमा और छवि पर कोई आंच न आए.”
बद्रीनाथ मंदिर में लगे ये आरोप ऐसे समय सामने आए हैं, जब BJP शासित उत्तर प्रदेश के अयोध्या स्थित राम मंदिर में भी इसी तरह के आरोपों की जांच चल रही है. उस मामले में अब तक आठ लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है और मंदिर प्रबंधन समिति के कई वरिष्ठ सदस्यों ने अपने पद छोड़ दिए हैं.
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