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Saturday, 4 July, 2026
होमदेशमसूद अजहर को लिखे खत, उसकी किताबों के गुजराती अनुवाद: 8 JeM 'सदस्यों' से ATS को क्या मिला

मसूद अजहर को लिखे खत, उसकी किताबों के गुजराती अनुवाद: 8 JeM ‘सदस्यों’ से ATS को क्या मिला

ATS ने कहा कि आरोपी JeM प्रमुख मसूद अज़हर से प्रभावित थे और पाकिस्तान में मौजूद हैंडलर्स के संपर्क में थे; उन्हें लॉजिस्टिकल सपोर्ट देने का काम सौंपा गया था.

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नई दिल्ली: गुजरात एंटी टेररिस्ट स्क्वाड (ATS) ने शुक्रवार को कहा कि उसने आठ लोगों को गिरफ्तार किया है. इनमें एक मौलवी, एक मेडिकल स्टोर का कर्मचारी और एक निर्माण मजदूर भी शामिल हैं. इन पर प्रतिबंधित आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद (JeM) की गतिविधियों को बढ़ावा देने का आरोप है. ATS के मुताबिक, आरोपी जैश-ए-मोहम्मद के प्रमुख मसूद अजहर से प्रभावित थे, उनका संपर्क पाकिस्तान में बैठे हैंडलर्स से था और वे जैश-ए-मोहम्मद का साहित्य गुजराती में अनुवाद कर रहे थे, ताकि उसकी विचारधारा का ज्यादा से ज्यादा प्रचार किया जा सके.

ATS ने आगे कहा कि आरोपियों के पास से मसूद अजहर के नाम लिखे गए पत्र मिले हैं, जिनका मकसद जैश-ए-मोहम्मद के प्रति अपनी वफादारी दिखाना था. एजेंसी के मुताबिक, ये लोग अपने इलाकों के अन्य लोगों को “दारुल इस्लाम गुजरात जैश-ए-मोहम्मद (JeM)” नाम के संगठन (तंजीम) में शामिल होने का न्योता भी दे रहे थे.

शुक्रवार को जारी बयान में एजेंसी ने कहा कि ATS के डिप्टी सुपरिंटेंडेंट ऑफ पुलिस हर्ष उपाध्याय को सूचना मिली थी कि कुछ लोग जैश-ए-मोहम्मद की विचारधारा का प्रचार कर रहे हैं.

ATS ने कहा, “जांच में पता चला कि गुजरात में मौजूद ये लोग इस प्रतिबंधित आतंकी संगठन की विचारधारा फैलाने और आतंकी गतिविधियों को अंजाम देने की सक्रिय योजना बना रहे थे. जैश-ए-मोहम्मद (JeM) के नेतृत्व और उसकी साजिश के तहत ये लोग अलग-अलग माध्यमों से भारत के लोगों से संपर्क कर उन्हें कट्टरपंथ की ओर ले जाने, गुजरात में जैश-ए-मोहम्मद का सक्रिय नेटवर्क बनाने और देश विरोधी गतिविधियों व आतंकी साजिशों का प्रचार करने में लगे थे.”

ATS ने बताया कि सूचना मिलने के बाद पांच टीमें बनाई गईं. इसके बाद गुजरात के बनासकांठा, मेहसाणा, नवसारी और पाटन जिलों तथा मध्य प्रदेश के देवास जिले में छापेमारी की गई, ताकि आरोपियों का पता लगाया जा सके.

ATS के मुताबिक शुरुआती जांच में पता चला कि आरोपी दूसरे लोगों को जैश-ए-मोहम्मद में शामिल होने का दावत (न्योता) दे रहे थे. साथ ही वे “जैश-ए-मोहम्मद के साहित्य का गुजराती में अनुवाद कर रहे थे, ताकि उसकी विचारधारा का ज्यादा से ज्यादा प्रचार और प्रसार किया जा सके.”

मसूद अजहर को अपना नेता मानते थे

ATS ने आरोपियों की पहचान अहमद अब्दुल्ला गाजीवाला (19) और इब्राहिम मोहम्मद हुसैन घाघा (30), दोनों निवासी मेहसाणा, मुदस्सिर अब्दुल्ला गाजीवाला (22), निवासी बनासकांठा, जकारिया दुरानी मोहम्मद अम्मार घाघा (21), मोहम्मद अमीन शेरा (21) और मुफ्ती फौजान इस्माइल दाऊवा (40), तीनों निवासी पाटन, मोहम्मद अब्दुल रहमान सावदी (22), निवासी नवसारी और बिलाल दुरानी मोहम्मद अम्मार घाघा (18), निवासी देवास के रूप में की है.

अपना नाम न बताने की शर्त पर ATS के एक अधिकारी ने कहा, “आरोपियों का संपर्क पाकिस्तान में बैठे अब्दुल्ला और मोहम्मद उमर नाम के हैंडलर्स से था.”

पुलिस के मुताबिक सभी आरोपी निम्न मध्यम आय वर्ग के परिवारों से आते हैं और सभी ने गांव स्तर के मदरसों में पढ़ाई की है. दाऊवा खुद एक मौलवी है. ये सभी एक-दूसरे को अपने गांवों और परिचितों के जरिए जानते थे.

गुजरात ATS के DIG सुनील जोशी ने दिप्रिंट से कहा कि आरोपियों के मोबाइल फोन की जांच में जैश-ए-मोहम्मद से उनके संबंधों के सबूत मिले हैं. उन्होंने कहा, “इन लोगों ने मसूद अजहर के नाम पत्र भी लिखे थे, ताकि संगठन के प्रति अपनी वफादारी दिखा सकें.”

जोशी ने आगे कहा कि आरोपियों ने मसूद अजहर की लिखी किताबों समेत कट्टरपंथी सामग्री का गुजराती में अनुवाद किया, ताकि उसे पूरे गुजरात में बड़े स्तर पर फैलाया जा सके.

ATS के मुताबिक इस कथित साजिश को अंजाम देने के लिए आरोपियों को करीब 3 लाख रुपये की फंडिंग मिली थी. इस पैसे से उन्होंने एक पुरानी कार खरीदी, जो अब तक किसी भी आरोपी के नाम पर ट्रांसफर नहीं हुई है. ATS का कहना है कि इस कार का इस्तेमाल उस समय किया जाना था, जब जैश-ए-मोहम्मद का कोई दूसरा सदस्य गांव आता.

जांच अधिकारियों के मुताबिक आरोपियों को एक सुरक्षित ठिकाना तैयार करने का भी निर्देश दिया गया था. इसके लिए उन्हें एक छोटा मकान किराये पर लेना था, जहां जैश-ए-मोहम्मद के दूसरे सदस्य ठहर सकें और अपनी लोकेशन सुरक्षित रख सकें. ATS के अनुसार, उनका काम लॉजिस्टिक सहायता देना था.

ATS के एक दूसरे अधिकारी ने कहा, “उन्हें कहा गया था कि समूह छोटा रखा जाए और उसमें सिर्फ भरोसेमंद लोगों को ही शामिल किया जाए.”

छापेमारी में प्रतिबंधित सामग्री बरामद

अधिकारी ने कहा, “इब्राहिम मोहम्मद हुसैन घाघा के मोबाइल फोन में Nord Locker नाम का एक ऑनलाइन एप्लिकेशन मिला. इसमें कुल 254 तरह की सामग्री थी, जिनमें जिहादी किताबें, भाषण (बयान), ऑडियो, वीडियो, तस्वीरें और जैश-ए-मोहम्मद (JeM) का झंडा शामिल था.”

ATS ने यह भी बताया कि छापेमारी के दौरान पाकिस्तान में छपी मसूद अजहर की लिखी किताबें, ‘जिहाद’ से जुड़ी दूसरी किताबें और उर्दू में टाइप किए गए आठ पत्र बरामद हुए, जो मसूद अजहर के नाम लिखे गए थे.

एजेंसी ने कहा कि मसूद अजहर की लिखी किताब दर्स-ए-जिहाद का उर्दू से गुजराती में अनुवाद किया हुआ साहित्य भी बरामद हुआ. इसका अनुवाद इब्राहिम मोहम्मद हुसैन घाघा और जकारिया ने किया था.

एजेंसी ने कहा कि आरोपी यूट्यूब जैसे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर मौजूद सामग्री देखते थे. वे ऐसे Telegram ग्रुप्स का हिस्सा भी थे, जहां कट्टरपंथी सामग्री उपलब्ध थी. वे इस सामग्री को दूसरे लोगों के साथ भी साझा करते थे.

ATS ने साफ किया कि आरोपियों के पास से कोई हथियार बरामद नहीं हुआ.

ATS की ओर से पेश किए गए सबूतों के आधार पर सभी आठ आरोपियों के खिलाफ गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (UAPA), 1967 और भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 61 और 148 के तहत मामला दर्ज किया गया है. आगे की कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी गई है.

ATS ने कहा, “हमने पाकिस्तान में मौजूद अब्दुल्ला नाम के व्यक्ति के टेली-आइडेंटिफायर हासिल कर लिए हैं, जो आरोपियों के संपर्क में था. इनके पास से कोई हथियार बरामद नहीं हुआ.”

ATS ने आंकड़े साझा करते हुए बताया कि पिछले साढ़े तीन साल में उसने ऐसे 10 मामले दर्ज किए हैं और 30 लोगों को गिरफ्तार किया है. ताजा मामला 11वां है. इसके साथ ही ऐसे मामलों में गिरफ्तार लोगों की कुल संख्या बढ़कर 38 हो गई है.

(इस रिपोर्ट को अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें)


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