चेन्नई: BJP से इस्तीफा देने के कुछ हफ्तों बाद के. अन्नामलाई ने तमिलनाडु में अपना पहला बड़ा कदम उठाया है. उन्होंने राज्य में बढ़ते नशे के इस्तेमाल की समस्या से निपटने के लिए पांच साल का रोडमैप पेश किया है. हाल ही में हुए विधानसभा चुनाव में यह मुद्दा राजनीतिक दलों के प्रमुख चुनावी मुद्दों में से एक था.
तमिलनाडु भाजपा के पूर्व अध्यक्ष अन्नामलाई ने अपनी संस्था वी द लीडर्स (डब्ल्यूटीएल) फाउंडेशन के तहत “ड्रग-फ्री तमिलनाडु” नाम से एक विस्तृत नीति पत्र जारी किया.
अन्नामलाई के डॉक्यूमेंट में उद्धृत अकादमी शोध पत्र “द मिथ ऑफ ए ड्रग-फ्री तमिलनाडु” के अनुसार, 47 लोगों में से 90 प्रतिशत ने कहा कि तमिलनाडु में नशे के इस्तेमाल का स्तर बहुत ज्यादा या काफी ज्यादा है.
रिपोर्ट में तमिलनाडु में शराब की खपत पर भी चिंता जताई गई है. इसमें कहा गया है कि पहले के सर्वे में जहां 14.2 प्रतिशत आबादी शराब पीती थी, वहीं नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे के अनुसार यह बढ़कर 23.7 प्रतिशत हो गई है.
अन्नामलाई ने सोशल मीडिया पर नीति पत्र जारी करते हुए लिखा, “नशीले पदार्थ खतरनाक तरीके से तमिलनाडु में फैल रहे हैं. इससे हमारे युवाओं और हमारे साझा भविष्य पर खतरा मंडरा रहा है. इस संकट से निपटने के लिए WTL (वी द लीडर्स) फाउंडेशन ने ‘ड्रग-फ्री तमिलनाडु’ पर एक नीति पत्र तैयार किया है.”
जून की शुरुआत में BJP छोड़ने के कुछ ही हफ्तों के भीतर यह दस्तावेज जारी करके अन्नामलाई खुद को राष्ट्रीय पार्टी की सीमाओं से बाहर एक ऐसे नेता के रूप में पेश करना चाहते हैं, जो सिर्फ आलोचना नहीं बल्कि समाधान भी देता है. उन्होंने BJP छोड़ते समय राज्य की रणनीति को लेकर नेतृत्व से मतभेद होने की बात कही थी.
2026 के विधानसभा चुनाव में युवाओं के बीच बढ़ते नशे का इस्तेमाल सबसे प्रमुख मुद्दों में से एक था. तमिलगा वेत्री कझगम (TVK) ने चुनाव में नशे पर नियंत्रण को अपने मुख्य चुनावी मुद्दों में शामिल किया था. विजय की अगुवाई वाली पार्टी ने तत्कालीन DMK सरकार पर “ड्रग्स कल्चर” को बढ़ावा देने का आरोप लगाया था. पार्टी का कहना था कि इससे अपराध बढ़ रहे हैं. अपने घोषणापत्र और युवा ब्लूप्रिंट में TVK ने नशामुक्त तमिलनाडु का वादा किया था.
हालांकि चुनाव जीतने के कुछ समय बाद ही इसी मुद्दे पर TVK सरकार घिर गई. सोशल मीडिया पर एक पुराना वीडियो सामने आया, जिसमें मानव संसाधन प्रबंधन मंत्री डी. शरत कुमार कथित तौर पर स्मार्टफोन की स्क्रीन पर ATM या डेबिट कार्ड से सफेद पाउडर जैसी दिखने वाली चीज को फैलाते नजर आए. पास में 500 रुपये का नोट भी रखा दिखाई दे रहा था.
बताया गया कि यह दो साल पुराना वीडियो चेन्नई के एम. ए. चिदंबरम स्टेडियम में IPL मैच के दौरान रिकॉर्ड किया गया था.
BJP और DMK समेत विपक्षी दलों ने इसे कथित तौर पर नशीले पदार्थों के इस्तेमाल से जोड़ते हुए TVK सरकार के “ड्रग-फ्री तमिलनाडु” के वादे पर सवाल उठाए.
अन्नामलाई और BJP ने भी चुनाव प्रचार के दौरान इस मुद्दे को प्रमुखता से उठाया. अन्नामलाई ने DMK पर कानून-व्यवस्था में कथित विफलता का आरोप लगाया था. चुनाव के बाद भी यह मुद्दा बना हुआ है और अब TVK सरकार इस मामले में सवालों के घेरे में है.
अन्नामलाई के नीति पत्र में नशे की मौजूदा समस्या का विस्तार से जिक्र किया गया है. साथ ही दुनिया के अलग-अलग देशों में नशे के खिलाफ अपनाई गई बेहतर नीतियों का भी अध्ययन किया गया है.
उन्होंने कहा, “यह नीति पत्र पांच साल का एक स्पष्ट रोडमैप भी पेश करता है. इसमें सख्त कानून लागू करने, रोकथाम, पुनर्वास और समाज में दोबारा शामिल करने जैसे उपायों पर जोर दिया गया है, ताकि हमारे राज्य में नशे की मांग को पूरी तरह खत्म किया जा सके.”
नीति पत्र में कहा गया है कि जो समस्या पहले कुछ इलाकों तक सीमित थी, वह अब स्कूलों, कॉलेजों, कार्यस्थलों और समाज के हर वर्ग तक पहुंच गई है. इससे परिवार टूट रहे हैं, कामकाज पर असर पड़ रहा है, पढ़ाई छूट रही है और अपराध बढ़ रहे हैं.
रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि लोगों ने सरकार द्वारा चलाए जा रहे पुनर्वास और नशा मुक्ति केंद्रों को सिर्फ औसत स्तर का प्रभावी माना. लोगों ने सरकार के इस दावे पर कम भरोसा जताया कि स्थिति नियंत्रण में है. उन्होंने ज्यादा सख्त कार्रवाई, इलाज के बाद बेहतर निगरानी और बेहतर बुनियादी ढांचे की मांग की.
नीति पत्र में दिए गए आंकड़ों के मुताबिक, हाल के वर्षों में गांजा, सिंथेटिक ड्रग्स और कोकीन की बड़ी मात्रा में बरामदगी हुई है.
रिपोर्ट के अनुसार, कई मामलों में तमिलनाडु की हिस्सेदारी पूरे देश में काफी ज्यादा रही. 2021 में पूरे भारत में जब्त की गई 364 किलो कोकीन में से 303 किलो, यानी 83.24 प्रतिशत, तमिलनाडु से बरामद हुई. वहीं 2024 में देशभर में जब्त किए गए सिंथेटिक ड्रग ब्लॉट्स में तमिलनाडु की हिस्सेदारी 43.66 प्रतिशत रही. राज्य में गांजे की बरामदगी भी काफी ज्यादा रही. 2021 में 22,097 किलो और 2025 में (नवंबर तक) 19,968 किलो गांजा जब्त किया गया.
नीति पत्र में NCRB के आंकड़ों का भी जिक्र है. इनके मुताबिक पूरे देश में सिंथेटिक ड्रग्स की बरामदगी 2020 में 2,217 किलो से बढ़कर 2024 में लगभग छह गुना होकर 12,084 किलो हो गई.
अन्नामलाई के नीति पत्र में रणनीतिक बदलावों का सुझाव दिया गया है और 2026 से 2031 तक के लिए सबूतों पर आधारित व्यावहारिक पांच साल की योजना पेश की गई है.
इस योजना में चार प्रमुख उपाय बताए गए हैं. इनमें तकनीक आधारित खुफिया व्यवस्था, AI के जरिए विश्लेषण और संपत्ति जब्त करने जैसी सख्त कार्रवाई शामिल है. इसके अलावा शिक्षा के जरिए रोकथाम, लोगों से सार्वजनिक संकल्प लेने के लिए व्हाइट बैंड मूवमेंट, इंटीग्रेटेड ड्रग रिहैबिलिटेशन सेंटर्स के जरिए पुनर्वास और समुदाय की भागीदारी पर भी जोर दिया गया है.
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि अन्नामलाई इस कदम के जरिए खुद को प्रासंगिक बनाए रखना चाहते हैं. साथ ही वे खुद को नीति पर गंभीर सोच रखने वाले और सरकार विरोधी मजबूत आवाज के रूप में स्थापित करना चाहते हैं. इससे TVK सरकार पर दबाव भी बढ़ सकता है और उनका अपना समर्थन आधार भी मजबूत हो सकता है.
राजनीतिक विश्लेषक सुनील कुमार ने कहा, “BJP छोड़ने के बाद अन्नामलाई मौजूदा मुद्दों को उठाकर राजनीतिक गति हासिल करने और जनता के बीच अपनी मौजूदगी बनाए रखने की कोशिश कर रहे हैं. उनके पास अपनी स्वतंत्र राजनीतिक यात्रा शुरू करने के लिए अभी काफी समय है. यह कहना अभी मुश्किल है कि ऐसे कदमों से उन्हें कितना राजनीतिक फायदा मिलेगा, लेकिन यह सिर्फ शुरुआत है.”
(इस रिपोर्ट को अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें)
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