नई दिल्ली: कांग्रेस नेतृत्व ने अभी तक आधिकारिक तौर पर कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के प्रदर्शन और जलवायु कार्यकर्ता सोनम वांगचुक की अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल का समर्थन नहीं किया है, लेकिन पार्टी के वरिष्ठ नेता और सांसद शशि थरूर ने प्रदर्शन कर रहे छात्रों, सोनम वांगचुक और देश के युवाओं के नाम एक भावुक खुला पत्र लिखकर उनका समर्थन किया है.
बुधवार को एक्स पर पोस्ट किए गए इस पत्र में थरूर ने सोनम वांगचुक से सीधे अपील की कि वे अपनी भूख हड़ताल खत्म कर दें. उन्होंने कहा कि इस अनशन का मकसद पूरा हो चुका है क्योंकि इसने पूरे देश का ध्यान इस मुद्दे की ओर खींच लिया है.
An Open Letter to the Jantar Mantar protestors:
My dear young friends,
I address you today not as a politician or an MP, but as someone deeply troubled by what is happening to your generation of young Indians.
This is personal for me. I was born to a middle-class family: my…
— Shashi Tharoor (@ShashiTharoor) July 15, 2026
सीजेपी केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग कर रही है. सोनम वांगचुक 28 जून से जंतर-मंतर पर अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर बैठे हैं.
थरूर ने लिखा, “सोनम वांगचुक जी से मेरी दिल से अपील है कि कृपया अपना अनशन खत्म करें. आपने देश की अंतरात्मा को जगा दिया है, अनशन का मकसद यही होता है. आने वाले लंबे संघर्ष के लिए देश को आपकी आवाज़ की ज़रूरत है.”
सोमवार से संसद का मानसून सत्र शुरू हो रहा है. थरूर ने कहा कि विपक्ष प्रदर्शन कर रहे छात्रों की चिंताओं को संसद में उठाएगा. उन्होंने कहा कि अब इस मुद्दे का समाधान लोकतांत्रिक संस्थाओं के जरिए होना चाहिए, न कि आमरण अनशन के जरिए.
कांग्रेस सांसद ने केंद्र सरकार से भी प्रदर्शनकारियों के साथ बातचीत करने की अपील की. उन्होंने लिखा, “मैं सम्मान के साथ सरकार से अपील करता हूं कि वह आगे आए और देश के युवाओं से बातचीत करे. लोकतंत्र में युवाओं के साथ संवाद करना सरकार की जिम्मेदारी है. यह कमजोरी नहीं, बल्कि अच्छी नेतृत्व क्षमता की निशानी है.”
थरूर की यह टिप्पणी ऐसे समय आई है, जब सीजेपी ने सोनम वांगचुक की अगुआई में संसद तक शांतिपूर्ण मार्च निकालने का ऐलान किया है. वहीं जंतर-मंतर पर प्रदर्शन भी जारी है.
छात्रों के समर्थन में थरूर ने कहा कि उनका गुस्सा उस पीढ़ी की निराशा दिखाता है, जिसका परीक्षा प्रणाली की निष्पक्षता पर भरोसा टूट गया है.
उन्होंने लिखा, “जंतर-मंतर पर जुटे युवाओं और पूरे देश में शांतिपूर्वक अपनी आवाज़ उठा रहे छात्रों से मैं कहना चाहता हूं कि देश आपकी बात सुन रहा है. आपका गुस्सा अनुशासनहीनता नहीं है, बल्कि उस पीढ़ी का दर्द है जिसने सब कुछ सही किया, फिर भी उसके साथ धोखा हुआ. आप अकेले नहीं हैं.”
अपने मिडिल क्लास परिवार का ज़िक्र करते हुए थरूर ने कहा कि वह समझते हैं कि युवाओं के लिए पारदर्शी और योग्यता आधारित व्यवस्था कितनी जरूरी होती है. उन्होंने लिखा कि उनका जन्म एक मध्यमवर्गीय परिवार में हुआ था. उनके पिता अखबार में नौकरी करते थे और मां गृहिणी थीं. परिवार में तीन बच्चों की पढ़ाई की जिम्मेदारी एक ही कमाई पर थी.
उन्होंने लिखा, “हमारे जैसे परिवार के लिए योग्यता सिर्फ एक नारा नहीं थी. छात्रवृत्ति, निष्पक्ष परीक्षाएं और ईमानदार नतीजे ही वह रास्ता थे, जिनसे एक नौकरी की कमाई तीन बच्चों के सपनों को पूरा कर सकती थी.”
उन्होंने आगे कहा, “मैं जानता हूं कि कम और मिडल इनकम वाले परिवारों के युवाओं के लिए आगे बढ़ने का एकमात्र सहारा निष्पक्ष और योग्यता आधारित व्यवस्था होती है. जब यह व्यवस्था टूट जाती है, पेपर लीक होते हैं, परीक्षाएं रद्द होती हैं और भरोसा खत्म हो जाता है, तब अमीर और ताकतवर लोगों के बच्चों को ज्यादा फर्क नहीं पड़ता. उनके पास आगे बढ़ने के दूसरे रास्ते होते हैं, लेकिन टूटते हैं आपके सपने, आपके परिवार की मेहनत और कई बार तो युवाओं की जान भी चली जाती है.”
अपने पत्र के अंत में थरूर ने युवाओं से उम्मीद बनाए रखने की अपील की. उन्होंने लिखा, “देश के उन लाखों युवाओं से, जो चुपचाप यह सब देख रहे हैं, मैं कहना चाहता हूं कि आपकी पीढ़ी कोई समस्या नहीं है, बल्कि भारत के भविष्य का जवाब है. उम्मीद मत खोइए. यह सीढ़ी फिर से बनेगी—आपके प्रयासों से और उन सभी भारतीयों के साथ मिलकर, जो आपके साथ खड़े हैं.”
(इस रिपोर्ट को अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें)
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