इंफाल: कांग्रेस के इनर मणिपुर से सांसद बिमोल अकोइजम को यौन उत्पीड़न के आरोपों में शुक्रवार को जवाहरलाल नेहरू यूनिवर्सिटी (JNU) से निकाल दिया गया. उन्होंने दिप्रिंट से कहा कि अगर उत्तर प्रदेश और बिहार के ताकतवर नेता इस मामले में शामिल होते, तो अधिकारी इतनी खुलकर यौन उत्पीड़न से जुड़े कानून, यानी कार्यस्थल पर महिलाओं का यौन उत्पीड़न (रोकथाम, निषेध और निवारण) अधिनियम, 2013 का गलत इस्तेमाल नहीं करते और न ही POSH कानून लागू करते.
उन्होंने कहा, “…एक तरीका यह भी है, जिससे वे सोचते हैं कि वे मुझे परेशान कर सकते हैं, क्योंकि मैं नॉर्थ-ईस्ट से हूं. अगर मैं बिहार या यूपी से सांसद होता, तो मेरे खिलाफ ऐसे आरोप गढ़ने से पहले वे हजार बार सोचते. क्या आपको लगता है कि अगर इसमें ताकतवर नेता शामिल होते, तो BJP इतनी आसानी से कानून तोड़ देती? मैं नस्ल के आधार पर भेदभाव की बात करके सहानुभूति नहीं मांग रहा हूं, लेकिन यह नस्लभेदी रवैया है. जब आप किसी को अपने से कमतर समझते हैं, तो उसके साथ अलग व्यवहार करते हैं.” अकोइजम ने दिप्रिंट को दिए एक खास इंटरव्यू में यह बात कही.
पहली बार सांसद बने अकोइजम JNU के स्कूल ऑफ सोशल साइंसेज में पढ़ाते थे. उन्होंने कहा कि जब उन्हें मीडिया से अपने निष्कासन के बारे में पता चला, तो उन्हें हैरानी नहीं हुई, क्योंकि पिछले कुछ महीनों से उन्हें निशाना बनाया जा रहा था. उन्होंने कहा, “मुझे इसके बारे में पता है, लेकिन मैं कानून का पालन करने वाला नागरिक हूं. इसलिए मैं POSH कानून के मुताबिक चल रहा था और गोपनीयता बनाए रखने के नियम पर भरोसा कर रहा था.”
लेकिन अकोइजम ने कहा कि वह इस बात से हैरान रह गए कि इंटरनल कमेटी (IC) की रिपोर्ट के नतीजे, जिन्हें POSH कानून के तहत गोपनीय रखा जाना चाहिए, उन्हें बताने से पहले ही मीडिया में लीक कर दिए गए.
उन्होंने कहा, “शुक्रवार रात 11.35 बजे मुझे एक ईमेल मिला. इससे पहले मैं मीडिया को बयान दे चुका था कि अधिकारियों ने मुझे रिपोर्ट के नतीजे बताने तक की शिष्टता नहीं दिखाई. उन्होंने जल्दबाजी में प्रतिक्रिया देते हुए देर रात ईमेल भेजा.”
POSH कानून के तहत कार्यस्थलों पर यौन उत्पीड़न की शिकायतों की जांच करने के लिए इंटरनल कमेटी (IC) बनाई जाती है.
उन्होंने कहा, “POSH कानून के मुताबिक, IC की रिपोर्ट गोपनीय होती है. इस कानून की धारा 16 गोपनीयता के बारे में बात करती है. इसमें कहा गया है कि किसी भी तरीके से शिकायत करने वाले या जिसके खिलाफ शिकायत की गई है, उसकी पहचान उजागर नहीं की जा सकती.”
उन्होंने कहा कि JNU की वाइस चांसलर (VC) ने खुद उनका नाम उजागर किया. उन्होंने कहा कि हां, मणिपुर से कांग्रेस सांसद के खिलाफ मामला है.
अकोइजम ने कहा कि वाइस चांसलर को ज्यादा सावधानी और जिम्मेदारी से काम लेना चाहिए था. उन्हें सिर्फ इतना कहना चाहिए था कि IC के पास कुछ मामले हैं, लेकिन कानून से बंधे होने के कारण वह इस पर कोई टिप्पणी नहीं कर सकतीं.
उन्होंने कहा, “लेकिन उन्होंने ऐसा नहीं किया और मेरा नाम बता दिया. तब मुझे समझ आया कि कुछ गड़बड़ है. मुझे निशाना बनाने के लिए हर तरह के हथकंडे अपनाए जा रहे हैं.”
उन्होंने कहा कि असल में IC ने ही उन्हें बताया था कि गोपनीयता के नियमों का उल्लंघन हुआ है और कमेटी इसकी जांच करेगी.
इनर मणिपुर के सांसद ने कहा, “मीडिया में इस तरह किसी का ट्रायल करना बंद होना चाहिए. मीडिया में जिन आरोपों की बात की जा रही है, वे IC की रिपोर्ट में भी नहीं हैं.”
उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि नंबरों के बदले सेक्स की मांग करने के आरोप तो शिकायत में भी नहीं हैं.
उन्होंने कहा, “उन्हें ये बातें कहां से मिलीं? उन्होंने बस एक कहानी गढ़ दी.”
‘इस कार्रवाई के पीछे राजनीति दिखती है’
अकोइजम ने कहा कि उनके खिलाफ कार्रवाई का समय और IC की रिपोर्ट के नतीजों को चुनिंदा तरीके से लीक करना, दोनों ही राजनीतिक लगते हैं. खासकर इसलिए, क्योंकि अगले साल की शुरुआत में विधानसभा चुनाव होने वाले हैं.
अकोइजम ने कहा, “17वीं लोकसभा में BJP ने मणिपुर की आवाज को पूरी तरह दबा दिया था. 18वीं लोकसभा में जब मैं और मेरे साथी अल्फ्रेड आर्थर, जो आउटर मणिपुर से कांग्रेस सांसद हैं, चुनाव जीतकर आए, तो हमने बोलना शुरू किया. मणिपुर की आवाज सुनाई देने लगी. इससे उन्हें (BJP को) परेशानी हुई.”
उन्होंने आगे कहा, “उन्होंने सोचा होगा कि इनकी आवाज कैसे बंद की जाए. इसके सबसे अच्छे तरीकों में से एक है किसी की छवि खराब करना. उन्हें पता है कि ये आरोप टिकने वाले नहीं हैं. लेकिन कम से कम फरवरी तक इस मामले को खींचो, जब चुनाव होने हैं. क्योंकि बिमोल ऐसा व्यक्ति है, जो मणिपुर में चुनाव प्रचार कर सकता है. पहले उसके चरित्र पर सवाल उठाकर उसे खत्म कर दो.”
इनर मणिपुर के सांसद ने कहा कि 2024 के लोकसभा चुनाव के दौरान भी BJP ने दावा किया था कि उनकी तीन पत्नियां हैं.
उन्होंने कहा, “मेरी अपनी पत्नी के अलावा उन्होंने कहा कि मेरी दो और पत्नियां हैं. एक पंजाबी और एक कुकी. यह बात आग की तरह फैल गई थी और अब दूसरी बार ऐसा हो रहा है. इसलिए मुझे पता था कि राजनीति में आने के बाद आपको ऐसी चीजों का सामना करना पड़ेगा. आपको लोगों के सामने अपनी बात रखनी होगी और इन आरोपों का सामना करने की हिम्मत रखनी होगी. मैं आपको बता रहा हूं, उन्हें लगता है कि वे इस तरह मुझे डरा सकते हैं.”

‘JNU की VC ने POSH कानून तोड़ा है’
फिलहाल इंफाल में मौजूद अकोइजम ने कहा कि JNU की वाइस चांसलर ने POSH कानून की कई धाराओं का उल्लंघन किया है.
उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि POSH कानून की धारा 8 के मुताबिक, IC की रिपोर्ट जमा होने के बाद 30 दिन का समय मिलता है. इस दौरान दोनों पक्ष कमेटी की सिफारिशों या नतीजों से असहमत होने पर अपील कर सकते हैं. उन्हें अपील करने का अधिकार है. 30 दिन पूरे होने के बाद वाइस चांसलर को कारण बताओ नोटिस भेजना होता है, जिसका जवाब संबंधित व्यक्ति को 10 दिनों के अंदर देना होता है.
उन्होंने कहा, “मुझे यह जानकर हैरानी हुई कि इनमें से कुछ भी नहीं हुआ. मीडिया से मुझे पता चला कि ये कथित नतीजे 9 अक्टूबर को जमा किए गए और मुझे नौकरी से निकालने की कार्रवाई भी उसी दिन कर दी गई. मुझे ईमेल भी उसी दिन रात 11.35 बजे भेजा गया.”
अकोइजम ने कहा कि JNU की वाइस चांसलर से पूछा जाना चाहिए कि क्या उन्हें पता था कि उन्होंने POSH कानून तोड़ा है.
उन्होंने कहा, “आपको VC से पूछना चाहिए कि मैडम, क्या आपने नियम संख्या 16 तोड़ा? क्या आपने नियम संख्या 8 तोड़ा? उनसे पूछिए कि प्राकृतिक न्याय का क्या मतलब होता है. और इसके बजाय वे मुझे ही दोषी ठहरा रहे हैं. मैंने 16 जुलाई को IC के सामने अपना बयान दिया था. इतने लंबे समय तक वे क्या कर रहे थे? मैं कानून का पालन करने वाला नागरिक हूं. इसलिए मैं देश के कानून का पालन करूंगा और यह सुनिश्चित करूंगा कि न्याय मिले.”
‘BJP ने हर संस्था को बर्बाद कर दिया है’
अकोइजम ने कहा कि BJP ने अब सावधानी बरतना पूरी तरह छोड़ दिया है.
उन्होंने कहा, “उन्होंने हर संस्था को बर्बाद कर दिया है और यह उसका एक और उदाहरण है. संविधान से लेकर चुनाव आयोग, JNU और POSH कानून तक, उन्होंने सब कुछ बर्बाद कर दिया है.”
अकोइजम ने कहा कि उन्होंने IC से कहा था कि उन्हें अपनी चिंता नहीं है.
उन्होंने कहा, “मैंने उनसे कहा कि मैं अपना बचाव कर सकता हूं, लेकिन मुझे इस संस्था की चिंता है. मुझे कानून और संस्थाओं की चिंता है. जब आप इनका जितना ज्यादा गलत इस्तेमाल करेंगे, लोगों का ऐसे तरीकों से भरोसा उतना ही कम होता जाएगा. ये संस्थाएं एक खास मकसद के लिए बनाई गई हैं.”
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