नई दिल्ली: कॉकरोच जनता पार्टी यानी CJP एक स्वतंत्र राजनीतिक दबाव बनाने वाले समूह के तौर पर काम करती रहेगी. हालांकि, आगे चलकर चुनावी राजनीति में आने का रास्ता खुला रखा गया है. CJP के सह-संयोजक आशुतोष रांका ने यह बात कही.
दिप्रिंट को दिए एक इंटरव्यू में रांका ने कहा कि चुनावी व्यवस्था के बाहर रहकर सरकारों पर दबाव बनाने का CJP का मौजूदा तरीका प्रभावी साबित हुआ है.
उन्होंने कहा, “मैं ईमानदारी से बात करना चाहता हूं. मैं यह नहीं कह रहा हूं कि जिंदगी में हम कभी कुछ नहीं करेंगे या जिंदगी में 100 प्रतिशत वही करेंगे. अभी हमने जो पहचान और समझ बनाई है, उससे पता चला है कि हमारा मौजूदा तरीका बहुत प्रभावी है. हम एक स्वतंत्र दबाव बनाने वाले समूह के तौर पर देश में कई चीजें बदलने में सफल रहे हैं. इसलिए अभी हम इसी तरीके से आगे बढ़ना चाहते हैं.”
“लेकिन मुझे नहीं पता कि एक साल बाद या दो साल बाद परिस्थितियां क्या होंगी. इसलिए मैं जनता को ऐसी बात कहकर गुमराह क्यों करूं, जो शायद सच न हो. इसलिए हमारे लिए कभी भी पूरी तरह ‘नहीं’ नहीं है.”
CJP खुद को राजनीतिक दबाव बनाने वाला समूह मानती है
रांका ने CJP को एक “राजनीतिक दबाव बनाने वाला समूह” बताया. उनका कहना था कि शिक्षा, स्वास्थ्य और बुनियादी सुविधाओं जैसे मुद्दों को राजनीति से अलग नहीं किया जा सकता.
उन्होंने कहा, “एक राजनीतिक पार्टी चुनाव लड़ती है. हम चुनाव नहीं लड़ते. आज हम एक राजनीतिक दबाव बनाने वाला समूह हैं. लोकतंत्र सिर्फ चुनावों के बारे में नहीं है. लोकतंत्र लोगों की रोजमर्रा की समस्याओं और संघर्षों के बारे में भी है. यह सत्ता में बैठे लोगों को जवाबदेह बनाने के बारे में भी है.”
उन्होंने आगे कहा, “इस देश में हर चीज राजनीतिक है. हम जिस हवा में सांस लेते हैं, जो पानी पीते हैं, जिन सड़कों पर चलते हैं, जिन अस्पतालों में इलाज कराते हैं, जिन स्कूलों में हमारे बच्चे पढ़ते हैं, यह सब इस देश की राजनीति और सरकार तय करती है.”
स्कूल ठीक करो से लेकर ज्ञानेश कुमार तक
CJP ने जंतर-मंतर पर हुए अपने प्रदर्शन के बाद “स्कूल ठीक करो” अभियान शुरू किया था. इस प्रदर्शन के बाद शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने इस्तीफा दिया था. अब CJP ने अपना ध्यान मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और चुनाव आयोग पर कर दिया है.
CJP ने ज्ञानेश कुमार से इस्तीफा देने की मांग की है. उसने चेतावनी दी है कि अगर वह इस्तीफा नहीं देते हैं, तो 2 अक्टूबर से देशभर में प्रदर्शन किए जाएंगे. CJP ने मतदाता सूची में किए जा रहे स्पेशल इंटेंसिव रिविजन यानी SIR का भी विरोध किया है. उसने उन मतदाताओं के नाम फिर से जोड़ने की मांग की है, जिनके नाम उसके अनुसार गलत तरीके से हटा दिए गए हैं.
रांका ने कहा, “स्कूल ठीक करो, धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा, आज ज्ञानेश कुमार का इस्तीफा और चुनाव आयोग में सुधार. यह सब एक ही चीज के बारे में है, और वह है जवाबदेही.”
“आप जिस काम के लिए जिम्मेदार हैं, उसके लिए आपको जवाबदेह होना चाहिए. अगर कुछ गलत होता है, तो उसका परिणाम भी होना चाहिए.”
चुनावी प्रक्रिया पर भरोसा क्यों जरूरी है
CJP के सह-संयोजक के अनुसार, चुनाव से जुड़ा मुद्दा इसलिए खास तौर पर महत्वपूर्ण हो गया है क्योंकि अगर लोगों को चुनावी प्रक्रिया पर भरोसा नहीं होगा, तो वे सरकारों को जवाबदेह नहीं बना पाएंगे.
उन्होंने कहा, “अगर लोग खराब स्कूलों से परेशान हैं, तो वे सरकार बदलना चाहते हैं. इससे फर्क नहीं पड़ता कि BJP है, कांग्रेस है या आम आदमी पार्टी है. अगर लोग सरकार इसलिए बदलना चाहते हैं क्योंकि सरकार स्कूलों को ठीक नहीं कर पाई, लेकिन अगर चुनाव का नतीजा पहले से तय है, तो यह अभियान किस काम का है?”
“अगर ये चीजें राजनीतिक बदलाव नहीं ला सकतीं, अगर लोग सत्ता में बैठे लोगों को वोट देकर हटाना चाहते हैं, अगर लोग सत्ता में बैठे लोगों के खिलाफ अपना विरोध दर्ज कराना चाहते हैं, लेकिन यह सब संभव ही नहीं है, तो आखिर इन सब चीजों का कोई मतलब नहीं रह जाता.”
‘चुनावों में गड़बड़ी होती है’
रांका ने दावा किया कि SIR की प्रक्रिया के कारण देशभर में 13 करोड़ मतदाताओं के नाम हटा दिए गए.
पश्चिम बंगाल में नाम हटाए जाने के बाद अपील की प्रक्रिया का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि हटाए गए लोगों में बड़ी संख्या असली और योग्य मतदाताओं की हो सकती है.
उन्होंने कहा, “अगर मैं इस संख्या को पूरे देश पर लागू करके देखूं, तो इसका मतलब होगा कि 13 करोड़ में से करीब 12 करोड़ लोग वास्तव में इस देश के असली और रजिस्टर्ड नागरिक हैं, जिन्हें वोट देने के अधिकार से वंचित कर दिया गया है.”
उन्होंने यह भी कहा कि अपनी पात्रता साबित करने का बोझ गरीब मतदाताओं पर ज्यादा पड़ता है.
उन्होंने कहा, “राघव चड्ढा जैसे लोगों के घर शायद चुनाव आयोग खुद आ जाए. लेकिन उस गरीब व्यक्ति का क्या, जिसे तीन बार ट्रिब्यूनल जाना पड़ता है? उसे यात्रा करनी पड़ती है, पैसे खर्च करने पड़ते हैं और अपनी रोज की मजदूरी भी गंवानी पड़ती है.”
‘मैं AAP में था. मैंने इसे कब छिपाया?’
CJP की राजनीतिक स्थिति पर सवाल इसलिए भी उठे हैं क्योंकि उसके कई प्रमुख सदस्यों का आम आदमी पार्टी से पहले संबंध रहा है. रांका खुद भी पहले AAP से जुड़े रहे हैं. CJP के संस्थापक अभिजीत दिपके भी पहले AAP से जुड़े रहे हैं.
रांका ने कहा, “मैं राघव चड्ढा नहीं हूं. कौन मेरे पुराने ट्वीट डिलीट करने जाएगा? मैं इस बात को लेकर हमेशा खुला रहा हूं. मैं आम आदमी पार्टी में था. मैंने इसे कब छिपाया?”
उन्होंने कहा, “मैंने दिप्रिंट के लिए लेख लिखे हैं. मैंने द वायर के लिए लेख लिखे हैं. मैं प्रवक्ता था. मैं न्यूज पैनल पर जाता था. 2020 में मैंने व्हाट्सएप संभाला था. मैंने हमेशा कहा है कि मैं आम आदमी पार्टी में था. मैंने इसे कभी नहीं छिपाया.”
रांका ने कहा कि CJP ने जानबूझकर खुद को AAP से अलग रखा है.
उन्होंने कहा, “CJP शुरू होने के बाद हमने बहुत साफ तौर पर यह अंतर रखा कि हम किस चीज के लिए खड़े हैं और दूसरी राजनीतिक पार्टियां, जिनमें आम आदमी पार्टी भी शामिल है, किस चीज के लिए खड़ी हैं. हमने बिल्कुल साफ कर दिया कि आज हम एक स्वतंत्र और निष्पक्ष राजनीतिक ताकत हैं.”
उन्होंने इस तर्क को भी खारिज किया कि किसी व्यक्ति का पहले किसी राजनीतिक पार्टी से जुड़ा होना उसे CJP के अभियानों में शामिल होने से रोकना चाहिए.
उन्होंने कहा, “जो लोग शिक्षा के लिए काम करना चाहते हैं, उन्हें इसमें शामिल होने से कौन रोक रहा है? कौन रोक रहा है? अगर किसी व्यक्ति ने AAP में काम किया है और आज वह शिक्षा के लिए काम करना चाहता है, तो उसे ऐसा करने की अनुमति क्यों नहीं होनी चाहिए?”
पंजाब में नरम रवैया?
AAP से जुड़े होने के कारण CJP के पंजाब अभियान पर भी सवाल उठे हैं. पंजाब में CJP की टीम ने सरकारी स्कूलों का दौरा किया था, जिनमें एक स्कूल ऑफ़ एमिनेंस भी शामिल था.
कांग्रेस नेता सचिन पायलट ने सवाल उठाया है कि क्या CJP पंजाब में वही जांच और सख्ती दिखा रही है, जो उसने दूसरी जगहों पर दिखाई है. AAP की सरकार वाले पंजाब में 2027 की शुरुआत में विधानसभा चुनाव होने हैं.
लेकिन रांका ने इस बात से इनकार किया कि CJP ने AAP की सरकार वाले पंजाब के प्रति नरम रवैया अपनाया है.
उन्होंने कहा, “सौरव ने खराब स्कूल भी दिखाए हैं. सौरव ने उन स्कूलों को भी दिखाया है. लेकिन वह वीडियो क्यों नहीं चलाया जाएगा? फिर से पूरा वीडियो देखिए. स्कूल ऑफ़ एमिनेंस दिखाया गया था. उसके बाद सौरव ने ग्रामीण इलाकों के चार स्कूल दिखाए, जहां हालत खराब है.”
उन्होंने कहा, “अगर आप कह रहे हैं कि हमने सिर्फ स्कूल ऑफ़ एमिनेंस दिखाया, तो पहली बात यह है कि देश में कहीं भी अच्छे स्कूल हैं, तो उन्हें दिखाया जाना चाहिए. हम उन्हें जरूर दिखाएंगे. हमने खुले तौर पर सभी को कहा है कि हमें बताइए. आप भी हमें बताइए.”
रांका ने कहा कि कर्नाटक और महाराष्ट्र में भी इसी तरह का तरीका अपनाया गया था.
उन्होंने कहा, “कर्नाटक के शिक्षा मंत्री ने हमसे संपर्क किया. हम उनसे मिलने गए. उन्होंने हमें कर्नाटक पब्लिक स्कूल यानी KPS मॉडल का प्रेजेंटेशन दिखाया. KPS योजना पर विस्तार से चर्चा हुई.”
“हम महाराष्ट्र के शिक्षा मंत्री से भी मिले. लेकिन फिर पूरी चर्चा सिर्फ इस बात तक क्यों सीमित है कि पंजाब के शिक्षा मंत्री के साथ हमारी बैठक कैसी थी?”
रांका ने कहा कि CJP BJP की सरकार वाले राज्यों के सरकारी स्कूलों का भी दौरा करेगी.
उन्होंने कहा, “(उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री) योगी जी को भी हमें बताना चाहिए कि उन्होंने कम से कम 10 अच्छे स्कूल जरूर बनाए होंगे. हमें दिखाइए. उन्हें कौन रोक रहा है? कर्नाटक के शिक्षा मंत्री KPS स्कूलों के बारे में बात करेंगे, तो हम निश्चित रूप से उनके बारे में बात करेंगे. पंजाब के मंत्री बात करेंगे, तो हम निश्चित रूप से उनके बारे में बात करेंगे. हम क्यों नहीं करेंगे?”
“शिक्षा की 80 प्रतिशत समस्याएं हल हो सकती हैं”
रांका के अनुसार, CJP ने पिछले दो दशकों में 200 से ज्यादा पेपर लीक के मामलों का रिकॉर्ड तैयार किया है.
उन्होंने सवाल उठाया कि परीक्षा व्यवस्था संयुक्त प्रवेश परीक्षा यानी JEE जैसी परीक्षाएं सफलतापूर्वक कर सकती है, लेकिन बार-बार दूसरी परीक्षाओं में समस्याएं क्यों आती हैं.
उन्होंने कहा, “यही व्यवस्था IIT-JEE की परीक्षा काफी अच्छी तरह करा लेती है. यही व्यवस्था CAT यानी कॉमन एडमिशन टेस्ट भी काफी अच्छी तरह कराती है. यही व्यवस्था इतने सालों से UPSC की परीक्षाएं भी बिना बड़ी समस्या के कराती आ रही है. लेकिन फिर लगभग हर दूसरी परीक्षा में यही व्यवस्था क्यों फेल हो रही है?”
उन्होंने कहा कि समस्या सरकारी स्कूलों की पूरी व्यवस्था में दिखाई देती है. अधिकारियों को पता होता है कि कहां शिक्षकों की कमी है और कहां बुनियादी सुविधाओं की कमी है.
उन्होंने कहा, “हर किसी को पता है कि बुनियादी ढांचे की हालत खराब है. हर किसी को पता है कि किस स्कूल में कितने शिक्षक हैं. हर किसी को पता है कि किताबें समय पर पहुंची हैं या नहीं. हर किसी को पता है कि कौन-सी इमारतें खराब हालत में हैं और कौन-से शौचालय काम नहीं कर रहे हैं. बस उन्हें कभी यह डर नहीं रहा कि इसके लिए उन्हें जवाबदेह ठहराया जाएगा.”
उन्होंने कहा, “अगर जवाबदेही तय कर दी जाए, तो शिक्षा व्यवस्था की 80 प्रतिशत समस्याएं हल हो सकती हैं.”
रांका ने शिक्षा पर सरकार के खर्च को राजनीतिक प्राथमिकता का एक संकेत बताया. उन्होंने कहा कि शिक्षा पर खर्च GDP का करीब 2.1 प्रतिशत है, जबकि नीति आयोग की रिपोर्टों में इससे ज्यादा खर्च करने की सिफारिश की गई है.
विपक्षी नेताओं से संपर्क
रांका ने बताया कि CJP कई विपक्षी नेताओं के संपर्क में रही है. इनमें राहुल गांधी, अरविंद केजरीवाल, ममता बनर्जी, अखिलेश यादव और पिनराई विजयन शामिल हैं.
उन्होंने कहा, “राहुल गांधी के साथ भी हमारा यही संपर्क रहा है. सभी विपक्षी नेताओं के साथ हमारा इसी तरह संपर्क रहा है. राहुल गांधी, अरविंद केजरीवाल, ममता बनर्जी, अखिलेश यादव और पिनराई विजयन.”
जब उनसे पूछा गया कि राहुल गांधी CJP के जंतर मंतर प्रदर्शन में पहले आने वाले थे, लेकिन क्यों नहीं आए, तो रांका ने कहा, “यह सवाल हमें राहुल गांधी से पूछना चाहिए. मैं इसका जवाब कैसे दे सकता हूं?”
उन्होंने कहा कि CJP और विपक्षी पार्टियों के बीच सहयोग का मतलब यह जरूरी नहीं है कि सभी लोग एक ही मंच पर आएं.
उन्होंने कहा, “एक साथ काम करने का मतलब यह नहीं है कि सभी को एक ही मंच पर होना जरूरी है. अगर मैं गलत नहीं हूं, तो आज अलग-अलग लेफ्ट पार्टियों का एक प्रदर्शन था. उसमें दूसरी राजनीतिक पार्टियों के लोग भी थे.भारतीय युवा कांग्रेस ने भी प्रदर्शन किया. आज कांग्रेस ने भी प्रदर्शन किया.”
“हर कोई एक ही दिशा में काम कर रहा है. हर किसी का तरीका अलग हो सकता है. बल्कि एक मजबूत लोकतंत्र में 10 अलग-अलग तरीके होने चाहिए.”
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