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Sunday, 4 October, 2026
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CEC ज्ञानेश कुमार का PWD कार्यकाल फिर जांच के घेरे में: केरल सरकार ने क्यों दिया यह आदेश?

चेन्निथला ने इस सुझाव को खारिज कर दिया कि यह कार्रवाई CEC ज्ञानेश कुमार के खिलाफ विपक्ष के चल रहे अभियान से जुड़ी थी, जिनकी देखरेख में SIR के दौरान वोटर लिस्ट से 13 करोड़ से ज़्यादा वोटरों के नाम हटाए गए थे.

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नई दिल्ली: केरल के गृह मंत्री रमेश चेन्निथला ने रविवार को मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के खिलाफ विजिलेंस जांच का आदेश दिया. यह आरोप उनके केरल लोक निर्माण विभाग (PWD) के सचिव रहने के समय से जुड़े हैं.

इन आरोपों का संबंध मलेशियाई इंजीनियर ली सी बीन की मौत से है. उनकी कथित सुसाइड नोट में कथित तौर पर कुमार का नाम लिखा था.

चेन्निथला ने यह निर्देश कांग्रेस कार्यकर्ता मलयिनकीझु वेणुगोपाल की ओर से शिकायत दिए जाने के एक दिन बाद दिया. शिकायत में उन्होंने जांच की मांग की और आरोप लगाया कि पहले की जांच को रोक दिया गया था.

चेन्निथला ने X पर एक पोस्ट में कहा, “मैंने इस शिकायत को विस्तार से जांचने और कानून के अनुसार आगे की कार्रवाई के लिए विजिलेंस डायरेक्टर को भेज दिया है.”

उन्होंने आगे कहा, “यह आरोप गंभीर है कि बाहरी दबाव की वजह से पहले की शुरुआती जांच को रोक दिया गया था. इसकी जांच की जाएगी. जांच सबूतों के आधार पर होगी. किसी को पहले से दोषी नहीं माना जाएगा. सही प्रक्रिया के जरिए न्याय होना चाहिए. जनता के प्रति जवाबदेही समय बीतने के साथ खत्म नहीं होती.”

ये आरोप केरल स्टेट ट्रांसपोर्ट प्रोजेक्ट (KSTP) से जुड़े हैं. इसके तहत विश्व बैंक की मदद से अंगमाली और तिरुवनंतपुरम के बीच मेन सेंट्रल रोड को बेहतर बनाने का काम किया गया था. इस प्रोजेक्ट को लागू करने वाले PATI-BEL कंसोर्टियम के चीफ प्रोजेक्ट मैनेजर ली ने मलेशिया लौटने के बाद 2006 में आत्महत्या कर ली थी.

चेन्निथला ने रविवार को मीडिया से कहा कि कांग्रेस कार्यकर्ता वेणुगोपाल उनके पास कुमार के PWD सचिव रहने के दौरान “भ्रष्ट गतिविधियों” के आरोप लेकर आए थे.

कांग्रेस नेता ने कहा, “कल मलयिनकीझु वेणुगोपाल, जो कांग्रेस कार्यकर्ता हैं, उन्होंने मुझे 2006 में ज्ञानेश कुमार के PWD सचिव रहने के दौरान हुई भ्रष्ट गतिविधियों के बारे में एक शिकायत दी. उस शिकायत में कुछ गंभीर मुद्दों का जिक्र है. इसी बीच मलेशियाई प्रोजेक्ट इंजीनियर ली ने आत्महत्या कर ली थी. सुसाइड नोट में PWD सचिव ज्ञानेश कुमार का नाम बहुत साफ तौर पर लिखा गया था.”

उन्होंने आगे कहा, “सरकार चुप बैठकर नहीं रह सकती. मैं मूक दर्शक नहीं बन सकता. मैंने शिकायत की पूरी जानकारी देखने और न्याय दिलाने के लिए कानूनी कार्रवाई करने के लिए इसे विजिलेंस डायरेक्टर को भेज दिया है.”

चेन्निथला ने साफ किया कि उन्होंने खुद कथित सुसाइड नोट नहीं देखा है. उन्होंने यह भी कहा कि इस मामले की पहले विजिलेंस विभाग ने जांच की थी, लेकिन जांच आगे नहीं बढ़ी. उन्होंने आरोप लगाया, “यह ऐसा मामला है जिसे दबा दिया गया था. उस समय अच्युतानंदन सरकार के सत्ता में आने के बाद यह मामला आगे नहीं बढ़ा.”

नई शिकायत में आरोप लगाया गया है कि बाहरी दबाव की वजह से पहले की जांच प्रभावित हुई थी.

चेन्निथला ने केरल में विजिलेंस एंड एंटी-करप्शन ब्यूरो (VACB) के डायरेक्टर IPS अधिकारी मनोज अब्राहम को दिए अपने निर्देश का हवाला देते हुए कहा, “शिकायतकर्ता का आरोप है कि गंभीर भ्रष्टाचार की जांच बाहरी दबाव की वजह से प्रभावित हुई है. यह गंभीर मामला है. पूरी तरह से जांच करें और न्याय के हित में कानून के अनुसार तुरंत कार्रवाई शुरू करें.”

चेन्निथला ने इस बात से भी इनकार किया कि यह कार्रवाई ज्ञानेश कुमार के खिलाफ विपक्ष के चल रहे अभियान से जुड़ी है. ज्ञानेश कुमार ने स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) अभियान के दौरान मतदाता सूची से 13 करोड़ से ज्यादा मतदाताओं के नाम हटाने की निगरानी की थी.

चेन्निथला ने कहा, “यह राजनीतिक बदला नहीं है. बेशक, हम सभी हड़ताल पर हैं. हमारे नेता राहुल गांधी BJP के कुशासन के खिलाफ लड़ रहे हैं. ज्ञानेश कुमार सिर्फ PM मोदी और अमित शाह का एक साधन हैं. उनके आदेश के मुताबिक वह काम कर रहे हैं. SIR और दूसरे मुद्दे भी हैं. हम उनके खिलाफ लड़ रहे हैं. लेकिन यह मामला अलग है.”

उन्होंने आगे कहा, “एक मंत्री के तौर पर यह मेरी जिम्मेदारी है कि मैं मामले की पूरी जानकारी देखूं. अगर कोई ऐसा अपराध है जिसमें कानूनी कार्रवाई की जा सकती है, तो उसे आगे की जांच के लिए विजिलेंस डायरेक्टर को भेजना मेरी जिम्मेदारी है. मैंने वही किया है. विजिलेंस को पूरे मामले की जांच करने दीजिए…”

(इस रिपोर्ट को अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें)


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