नई दिल्ली: पश्चिमी हिमालय में गंभीर रूप से संकटग्रस्त देहरादून स्ट्रीम फ्रॉग (अमोलोप्स चक्रताएन्सिस) को चार दशकों से अधिक समय बाद फिर खोजा गया है. यह प्रजाति भारत के दुर्लभतम और सबसे कम ज्ञात उभयचरों में शामिल है. वैज्ञानिकों ने इसे उत्तरकाशी जिले के मनेरी क्षेत्र में खोजा, जो इसके मूल स्थान चकराता से करीब 65 किलोमीटर पूर्व में है.
इस प्रजाति का पहला ज्ञात नमूना 1985 में चकराता के पास मिला था और 1992 में इसे वैज्ञानिक रूप से वर्णित किया गया था. इसके बाद कई सर्वे के बावजूद इसके दोबारा नहीं मिलने से इसके अस्तित्व पर चिंता बढ़ गई थी.
2023 से 2026 के बीच भारतीय वन्यजीव संस्थान, भारतीय प्राणी सर्वेक्षण,लैबोरेटरी ऑफ़ एनिमल बिहेवियर एंड कंज़र्वेशन और IUCN SSC एम्फ़िबियन स्पेशलिस्ट ग्रुप से जुड़े रिसर्चर्स ने उत्तराखंड की विभिन्न हिमालयी जलधाराओं में व्यापक सर्वेक्षण किए. इस दौरान प्रजाति के केवल दो मेंढक देखे गए.
शोध दल का नेतृत्व जीवविज्ञानी विशाल कुमार प्रसाद ने किया. प्रजाति की अत्यधिक दुर्लभता को देखते हुए वैज्ञानिकों ने मेंढक को संग्रहालय के नमूने के रूप में एकत्र नहीं किया. टीम ने बक्कल स्वैब के जरिए गैर-आक्रामक DNA सैंपल लिया और तस्वीरों तथा शारीरिक माप के जरिए इसका दस्तावेजीकरण किया. इसके बाद मेंढक को उसी स्थान पर सुरक्षित वापस छोड़ दिया गया.
देहरादून स्थित भारतीय प्राणी सर्वेक्षण में संरक्षित होलोटाइप से आकारिकीय तुलना और आनुवंशिक विश्लेषण ने इसकी पहचान की पुष्टि की. स्टडी एनिमल्स मैगज़ीन में “रीडिस्कवरी ऑफ़ द लॉस्ट एंड क्रिटिकली एन्डेंजर्ड देहरादून स्ट्रीम फ्रॉग, एमोलोप्स चकराटेन्सिस” शीर्षक से प्रकाशित हुई है.
वैज्ञानिकों ने चेताया है कि पुनः खोज के बावजूद प्रजाति सुरक्षित नहीं हुई है. सीमित आबादी, आवास परिवर्तन, प्रदूषण और जलवायु परिवर्तन इसके लिए खतरा हैं. शोधकर्ताओं ने निरंतर सर्वेक्षण, eDNA आधारित खोज, गैर-आक्रामक सैंपलिंग, माइक्रो-रिजर्व और OECMs के साथ संरक्षण कार्ययोजना की सिफारिश की है.
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