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Sunday, 4 October, 2026
होमदेशपहले ड्रग्स केस में बरी होने से तुर्किये निर्वासन तक: नवप्रीत सिंह कैसे बना 'ड्रग किंगपिन'

पहले ड्रग्स केस में बरी होने से तुर्किये निर्वासन तक: नवप्रीत सिंह कैसे बना ‘ड्रग किंगपिन’

नवप्रीत सिंह 2019 के मध्य में भारत से भाग गया था और पुलिस के अनुसार, विदेश में रहते हुए भी भारत में अवैध ड्रग्स का कारोबार चलाता रहा.

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नई दिल्ली: ड्रग तस्करी के संदिग्ध सरगना नवप्रीत सिंह उर्फ नव भुल्लर ने 2019 के बीच में अदालतों को चकमा दे दिया था, जब वह ड्रग बरामदगी के एक मामले में मुकदमे का सामना करते हुए भारत से भाग गया था. सात साल बाद, शनिवार को तुर्किये से निर्वासित किए जाने के बाद वह भारत वापस आ गया. तुर्किये में वह नकली पहचान के साथ रह रहा था.

सिंह को मई 2016 में इस मामले में गिरफ्तार किया गया था और उसी साल नवंबर में जमानत दे दी गई थी, क्योंकि पंजाब पुलिस उसकी गिरफ्तारी के 180 दिनों के अंदर अपनी जांच पूरी करके चार्जशीट दाखिल नहीं कर पाई थी. रिहा होने के बाद उसने 50,000 रुपये का जमानती बॉन्ड और एक जमानतदार दिया था.

उसके खिलाफ मुकदमा होशियारपुर की एक अदालत में चल रहा था. वहां वह भारत से भागने से पहले के कुछ महीनों में अदालत में पेश होने से बचने की कोशिश करता रहा. वह अदालत में पेश होने से छूट पाने के लिए एक के बाद एक मेडिकल सर्टिफिकेट पेश करता रहा. लेकिन 2018 में अदालत ने इन सर्टिफिकेट की सच्चाई जांचने के लिए रिकॉर्ड मंगवा लिए. अक्टूबर 2018 के एक आदेश में जज ने कहा, “हर बार जब ऐसा सर्टिफिकेट दिया जा रहा है, तो तरन तारन के डॉक्टर को रिकॉर्ड के साथ बुलाया जाए, ताकि सर्टिफिकेट की सच्चाई देखी जा सके.”

2019 के बीच तक सिंह देश छोड़ चुका था. जब अदालत ने उसके जमानतदार से उसकी मौजूदगी सुनिश्चित करने को कहा, तो पता चला कि उस व्यक्ति की उसी साल जनवरी में मौत हो चुकी थी.

यह आखिरी मामला था जिसमें सिंह को किसी भारतीय कानून लागू करने वाली एजेंसी ने गिरफ्तार किया था. उसके देश से भाग जाने के बाद यह मुकदमा लगभग रुक गया. हालांकि, पंजाब में पुलिस की जांच में उसका नाम सामने आता रहा, जबकि वह भारतीय एजेंसियों की पहुंच से बाहर था.

पहला मामला

तुर्किये से सिंह का निर्वासन दिल्ली पुलिस की उस जांच से जुड़ा था, जिसमें 2021 में राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में कई जगहों से 330 किलोग्राम से ज्यादा हेरोइन बरामद की गई थी. लेकिन अब अधिकारियों द्वारा बड़े ड्रग तस्करी सरगना के रूप में पहचाना जाने वाला यह व्यक्ति पहली बार 2013 में पुलिस रिकॉर्ड में आया था, जब उसकी उम्र 22 साल थी.

उस समय जालंधर पुलिस ने पुराने आपराधिक रिकॉर्ड वाले सुरजीत लाल उर्फ सोढ़ी को ड्रग तस्करी के एक मामले में गिरफ्तार किया था. पुलिस को जानकारी मिली थी कि उसने हाल ही में अमृतसर से हेरोइन खरीदी थी. चार्जशीट के मुताबिक, सोढ़ी ने जांचकर्ताओं को बताया कि उसने यह खेप सिंह से खरीदी थी. सिंह अमृतसर के वजीर भुल्ला गांव का रहने वाला है. सोढ़ी ने इसके लिए 700 रुपये प्रति ग्राम दिए थे.

सोढ़ी के बयान और दोनों के बीच हुई फोन कॉल के रिकॉर्ड के आधार पर जालंधर पुलिस ने जून 2013 में सिंह को गिरफ्तार किया. पुलिस ने कहा कि सिंह ने जांचकर्ताओं को बताया था कि उसने सोढ़ी को करीब 2.5 किलोग्राम हेरोइन 17.5 लाख रुपये में बेची थी. पुलिस ने यह भी कहा कि सिंह ने दिल्ली और गुरुग्राम समेत कई जगहों पर हेरोइन सप्लाई करने की बात मानी थी और उसे प्रति किलोग्राम 20,000 रुपये मिलते थे.

हालांकि, पुलिस हिरासत के दौरान दिए गए बयान अदालत में सबूत के तौर पर स्वीकार नहीं किए जा सकते और आरोप अदालत की जांच में टिक नहीं पाए. जनवरी 2017 में जालंधर की एक अदालत ने सिंह को बरी कर दिया, जबकि मुख्य आरोपी सोढ़ी को दोषी ठहराकर 15 साल की जेल की सजा दी गई.

पंजाब पुलिस के सूत्रों ने कहा कि इस बरी होने से सिंह का “हौसला बढ़ गया”. इसके बाद उसने अपना काम और बढ़ाया और कुख्यात ड्रग तस्कर हरप्रीत सिंह उर्फ चिंटू के सिंडिकेट में शामिल हो गया.

चिंटू की अक्टूबर 2019 में गोली मारकर हत्या कर दी गई थी. तब तक सिंह भूटान के रास्ते दुबई भाग चुका था और बाद में उसने अपना ठिकाना तुर्किये बना लिया. पुलिस सूत्रों का कहना है कि सिंह ने तुर्किये में कम से कम तीन साल जेल में बिताए, हालांकि यह जानकारी नहीं है कि उसे कब और किस वजह से जेल भेजा गया था.

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने सिंह को भारत वापस भेजे जाने की जानकारी देते हुए कहा कि उसने नवाब विर्क की नकली पहचान का इस्तेमाल करके तुर्की की नागरिकता हासिल की थी और अफगानिस्तान से भारत में हेरोइन और मेथामफेटामाइन की तस्करी करता था.

ड्रग्स से हथियारों तक

देश से भागने के बाद भी जालंधर और कपूरथला में ड्रग बरामदगी के मामलों में सिंह का नाम सामने आता रहा. 2020 में उसका नाम ड्रग्स और गैरकानूनी हथियारों से जुड़े एक मामले में भी सामने आया.

राज्य की काउंटर-इंटेलिजेंस विंग की मोहाली यूनिट ने जिरकपुर में राजिंदर सिंह उर्फ गंजा की गतिविधियों की जानकारी मिलने के बाद उसे गिरफ्तार किया. पुलिस ने मोहाली स्थित उसके फ्लैट से .32 बोर की पिस्तौल, चार जिंदा कारतूस, 530 ग्राम हेरोइन और ड्रग्स से हुई कमाई की संदिग्ध 5.2 लाख रुपये की रकम बरामद की.

पूछताछ के दौरान राजिंदर ने कथित तौर पर पुलिस को बताया कि जिस ड्रग कारोबार में वह शामिल था, उसे सिंह विदेश से चला रहा था. इसके बाद सिंह को भी इस मामले में आरोपी बनाया गया.

अक्टूबर 2024 में सिंह की बदनामी और बढ़ गई, जब पंजाब पुलिस ने 105 किलोग्राम हेरोइन बरामद की. इसे राज्य में हुई “सबसे बड़ी” ऐसी बरामदगी बताया गया. तीन आरोपियों, नवजोत सिंह, भूपिंदर सिंह और लवप्रीत कुमार को शुरुआत में 7 किलोग्राम हेरोइन के साथ गिरफ्तार किया गया था. उनके बयानों के आधार पर पुलिस ने 98 किलोग्राम और हेरोइन, दूसरी नशीली चीजें, मैगजीन के साथ 9 एमएम की चार पिस्तौलें, बिना मैगजीन की एक और 9 एमएम पिस्तौल और .315 बोर की देसी पिस्तौल बरामद की. ये सामान बाबा बकाला में उनके किराए के ठिकाने से मिला.

उस समय पंजाब के पुलिस महानिदेशक (DGP) गौरव यादव ने कहा था कि ड्रग्स को पाकिस्तान से पानी के रास्ते लाया गया था. उन्होंने कहा, “टायरों की बड़ी रबर ट्यूब बरामद हुई हैं, जिससे पता चलता है कि नशीले पदार्थों की तस्करी पानी के रास्ते की गई है.” DGP ने कहा कि तुर्किये में रहने वाला सिंह इस सिंडिकेट का सरगना था और उसी के निर्देश पर पाकिस्तान से ड्रग्स भारत लाई गई थीं.

पंजाब में सिंह के खिलाफ कम से कम सात मामले दर्ज हैं. इनमें ड्रग तस्करी और कुछ मामलों में आर्म्स एक्ट के तहत गैरकानूनी हथियारों से जुड़े मामले शामिल हैं. ऐसे ही एक मामले में जब वह जांच या मुकदमे के लिए पेश नहीं हुआ, तो जुलाई 2025 में अमृतसर की एक अदालत ने उसे घोषित अपराधी घोषित कर दिया.

दिल्ली के मामलों ने वापसी का रास्ता बनाया

सिंह को दिल्ली के इंदिरा गांधी इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर गिरफ्तार किए जाने के कुछ घंटे बाद, दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने 10 दिन की हिरासत मांगी. पुलिस उसे पंजाब और मध्य प्रदेश ले जाकर उन घरों और गोदामों की पहचान करवाना चाहती थी, जिन्हें उसके ड्रग नेटवर्क के सदस्यों ने कथित तौर पर किराए पर लिया था.

सिंह के सिंडिकेट के खिलाफ कार्रवाई, जो आखिरकार उसे तुर्किये से भारत वापस भेजे जाने तक पहुंची, जुलाई 2021 में शुरू हुई थी. उस समय स्पेशल सेल ने दक्षिण दिल्ली के घिटोरनी से रिजवान अहमद को गिरफ्तार किया था और उसकी गाड़ी से 1.17 किलोग्राम हेरोइन बरामद की थी.

जांच आगे बढ़ने पर करीब 358 किलोग्राम हेरोइन बरामद हुई. 2022 में पुलिस ने इस सिंडिकेट से जुड़ा एक और मामला दर्ज किया, जिसमें गैरकानूनी गतिविधियां रोकथाम अधिनियम भी लगाया गया.

रिजवान से पूछताछ के आधार पर पुलिस ने फरीदाबाद में गुरप्रीत और गुरजोत नाम के दो लोगों को गिरफ्तार किया. इसके बाद पुलिस ने गुरप्रीत की गाड़ी से 168.5 किलोग्राम हेरोइन और उनके फ्लैट से 116 किलोग्राम और हेरोइन बरामद की. गुरुग्राम से 2 किलोग्राम और हेरोइन बरामद की गई.

पुलिस ने अगस्त 2021 में अमृतसर से रामदीप को भी गिरफ्तार किया. उसके घर की तलाशी में कथित तौर पर नवप्रीत के दस्तावेज और पंजाब के राजपुरा और मध्य प्रदेश के शिवपुरी में मौजूद फैक्ट्रियों से जुड़े रिकॉर्ड मिले.

शनिवार को सिंह की रिमांड मांगते समय स्पेशल सेल ने अदालत को बताया कि अमृतसर में रामदीप के घर की तलाशी के दौरान उसके नाम की एक चेकबुक भी बरामद हुई थी. एजेंसी ने अपनी चार्जशीट में यह भी आरोप लगाया कि रामदीप की सह-आरोपियों से, जिनमें सिंह भी शामिल था, बातचीत होती थी. सिंह “aceoffspades” नाम से iCloud अकाउंट चलाता था.

स्पेशल पब्लिक प्रॉसिक्यूटर अखंड प्रताप सिंह ने अदालत को बताया कि सिंह ने “अपने हाथ और पेट पर खुद चोटें पहुंचाई थीं” और उसे अदालत में पेश करने से पहले अस्पताल में भर्ती कराया गया था.

अभियोजन पक्ष ने सिंह के कथित बयान पर भी भरोसा किया. इसमें उसने जांचकर्ताओं को बताया था कि वह “डेड ड्रॉप्स” के जरिए ड्रग्स पहुंचाता था और पंजाब में कई जगहों पर ड्रग्स जमीन में छिपाकर रखे गए थे. वह उन जगहों की पहचान करके वहां से ड्रग्स बरामद करवा सकता था. डेड ड्रॉप एक गुप्त तरीका है, जिसमें तस्कर गैरकानूनी सामान को पहले से तय किसी सार्वजनिक या गुप्त जगह पर छिपा देता है.

स्पेशल जज अनुराधा शुक्ला ने आदेश में दर्ज किया, “आरोपी का बयान रिकॉर्ड पर है, जिसमें उसने कहा है कि वह डेड ड्रॉप के जरिए ड्रग्स पहुंचाता था. उसने कहा है कि उसने कई जगहों पर ड्रग्स डेड ड्रॉप के जरिए रखे हैं, जिन्हें पंजाब में जमीन में दबाकर रखा गया है और वह उन जगहों की पहचान करवा सकता है और ड्रग्स बरामद करवा सकता है.”

नवप्रीत के वकील असगर खान ने रिमांड की मांग का विरोध किया. उन्होंने कहा कि पुलिस के पास उनके मुवक्किल से बरामद करने के लिए अब कुछ भी बाकी नहीं है और अदालत में पहले ही सप्लीमेंट्री चार्जशीट दाखिल की जा चुकी है.

जज ने पुलिस को 10 दिन की हिरासत दे दी. साथ ही खान की यह मांग भी मान ली कि उनके एक सहयोगी को दूर से पूछताछ देखने की अनुमति दी जाए.

(इस रिपोर्ट को अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें)


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