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Sunday, 4 October, 2026
होमविदेश‘हसीना का भारत आना अप्रत्याशित था, भारतीय सेना की कोई भूमिका नहीं’: ढाका में भारतीय हाई कमिश्नर

‘हसीना का भारत आना अप्रत्याशित था, भारतीय सेना की कोई भूमिका नहीं’: ढाका में भारतीय हाई कमिश्नर

बांग्लादेश में भारत के हाई कमिश्नर ने इस बात पर ज़ोर दिया कि एक 'अच्छे पड़ोसी' के तौर पर, अगस्त 2024 में सत्ता से हटाए जाने के बाद शेख हसीना के दिल्ली में उतरने के अनुरोध को स्वीकार करने के अलावा भारत के पास कोई और विकल्प नहीं था.

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ढाका: भारतीय हाई कमिश्नर दिनेश त्रिवेदी ने शनिवार को कहा कि शेख हसीना का भारत जाना अचानक हुआ था, इसे भारतीय सेना ने नहीं करवाया था, और वह बांग्लादेश की प्रधानमंत्री के रूप में भारत पहुंची थीं. वह बांग्लादेश में आयोजित बे ऑफ बंगाल कन्वर्सेशन में बोल रहे थे. यह कार्यक्रम ढाका में स्थानीय थिंक टैंक सेंटर फॉर गवर्नेंस स्टडीज ने आयोजित किया था.

भारत, त्रिवेदी ने कहा, हसीना के अचानक पहुंचने के लिए “तैयार नहीं था”, और उसके पास बहुत कम विकल्प थे.

एक सवाल के जवाब में कि हसीना को बांग्लादेश वापस क्यों नहीं भेजा जा रहा है, उन्होंने कहा, “हसीनाजी को भारतीय वायु सेना या भारतीय सेना भारत नहीं लाई थी. उस समय बांग्लादेश में जो दुखद हालात थे, उनकी वजह से ऐसा हुआ. हम उम्मीद और प्रार्थना करते हैं कि दुनिया के किसी भी हिस्से में फिर कभी ऐसी स्थिति न आए, जहां बेगुनाह लोग मारे जाएं.”

उन्होंने आगे कहा, “सैन्य विमान भारत आया… भारत तैयार नहीं था. मैं टीवी देख रहा था और स्क्रीन पर खबर चल रही थी कि वह किसी दूसरे देश जा रही हैं. उस समय हसीनाजी अभी भी बांग्लादेश की प्रधानमंत्री थीं. हमारे पास बहुत कम विकल्प थे. पड़ोसी होने के नाते हमारा कर्तव्य था कि हम उस समय की हकीकत को स्वीकार करें. क्योंकि कभी-कभी हालात ऐसे होते हैं कि आप किसी चीज के लिए तैयार नहीं होते.”

इसके बाद भारतीय हाई कमिश्नर ने पूछा, “हमारे पास क्या विकल्प था?” उन्होंने कहा कि अगर भारत हसीना को “उतरने की अनुमति” नहीं देता, तो स्थिति बहुत अलग हो सकती थी. भारतीय हाई कमिश्नर ने कहा कि भारत और बांग्लादेश मजबूत लोकतांत्रिक देश हैं और हसीना को वापस भेजने के मामले को “कानूनी व्यवस्था” देख रही है.

हसीना का भारत में लगातार रहना दोनों देशों के रिश्तों में तनाव की एक बड़ी वजह बना हुआ है. पूर्व प्रधानमंत्री 5 अगस्त 2024 को बड़े पैमाने पर हुए प्रदर्शनों के बाद ढाका से नई दिल्ली चली गई थीं. इन प्रदर्शनों का नेतृत्व छात्रों ने किया था. प्रदर्शनकारियों के खिलाफ उनकी सरकार की कार्रवाई और हिंसा की वजह से सैकड़ों लोग मारे गए और बहुत से लोग घायल हुए.

हसीना को हटाए जाने के बाद भारत और बांग्लादेश के रिश्ते बहुत खराब हो गए. दिसंबर 2024 में उस समय की अंतरिम सरकार ने हसीना को बांग्लादेश वापस भेजने की मांग की थी. भारत लगातार कहता रहा है कि उसे यह मांग मिल चुकी है और दोनों देशों के बीच हुई प्रत्यर्पण संधि में बताए गए नियमों के अनुसार इस मामले पर प्रक्रिया चल रही है.

रिश्तों का फीका पड़ना 

फरवरी 2026 के आम चुनाव के बाद सत्ता में आई तारिक रहमान सरकार ने भी हसीना को वापस भेजने की मांग दोहराई. बांग्लादेश के विदेश मंत्री खलीलुर रहमान ने इस साल की शुरुआत में विदेश मंत्री एस. जयशंकर से मुलाकात के दौरान भी यह मांग दोहराई. वहीं, प्रधानमंत्री रहमान ने अगस्त में उनसे मिलने आए त्रिवेदी के सामने भी हसीना को वापस भेजने की जरूरत पर जोर दिया.

5 अगस्त 2026 को नई दिल्ली में हसीना की प्रेस कॉन्फ्रेंस सहित उनकी बार-बार होने वाली मीडिया में मौजूदगी ने दोनों देशों के रिश्तों को और खराब कर दिया. रहमान के सत्ता में आने के बाद दोनों देशों ने रिश्तों को स्थिर करने की प्रक्रिया शुरू की थी.

भारत ने रहमान को भारत आने के लिए दो बार निमंत्रण दिया था. एक निमंत्रण द्विपक्षीय राजकीय यात्रा के लिए था और दूसरा पिछले महीने नई दिल्ली में हुए BRICS नेताओं के शिखर सम्मेलन में शामिल होने के लिए था. यह निमंत्रण बांग्लादेश की BIMSTEC की अध्यक्षता की वजह से दिया गया था. BIMSTEC का मतलब बे ऑफ बंगाल इनिशिएटिव फॉर मल्टीसेक्टोरल टेक्निकल एंड इकोनॉमिक कोऑपरेशन है.

लेकिन हसीना की प्रेस कॉन्फ्रेंस के बाद ढाका ने कड़ी प्रतिक्रिया दी. बांग्लादेश ने कहा कि जब तक हसीना को वापस नहीं भेजा जाता और “अनुकूल माहौल” नहीं बनाया जाता, तब तक रहमान का नई दिल्ली आना संभव नहीं है.

दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय यात्रा को लेकर बातचीत आगे नहीं बढ़ सकी. रहमान ने BRICS शिखर सम्मेलन में भी हिस्सा नहीं लिया और बांग्लादेश ने वहां कोई प्रतिनिधिमंडल भी नहीं भेजा.

इसके बावजूद दोनों देशों ने अलग-अलग स्तर पर बातचीत और संपर्क के कई तरीकों को फिर से शुरू करने की कोशिश की है और इसमें कुछ सफलता भी मिली है. व्यापार को लेकर एक संयुक्त कार्य समूह की जल्द बैठक होने की उम्मीद है, जबकि संयुक्त नदी आयोग की तकनीकी बातचीत जारी है. नई दिल्ली और ढाका के बीच अभी तक कांसुलर बातचीत नहीं हुई है. यह बातचीत प्रवासन के मुद्दे पर चर्चा के लिए एक महत्वपूर्ण माध्यम है, और यह भारत के लिए चिंता का एक बड़ा विषय बना हुआ है.

हाल के हफ्तों में हसीना ने साफ कर दिया है कि वह दिसंबर के किसी समय बांग्लादेश वापस जाने की योजना बना रही हैं और रहमान के नेतृत्व वाली बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी यानी BNP की सरकार के खिलाफ अपनी लड़ाई जारी रखेंगी.

हालांकि, नवंबर 2025 में बांग्लादेश के इंटरनेशनल क्राइम्स ट्रिब्यूनल यानी ICT-B ने 2024 के छात्र प्रदर्शनों को हिंसक तरीके से दबाने की उनकी सरकार की कार्रवाई के लिए हसीना को मौत की सजा सुनाई थी. हसीना ने इस सजा को खारिज कर दिया है.

(इस रिपोर्ट को अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें)


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