हैदराबाद: शनिवार को हैदराबाद के इंदिरा पार्क के धरना चौक पर 300 से ज्यादा लोग इकट्ठा हुए. इनमें कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के स्थानीय सदस्य और करीब 10 सामाजिक दबाव वाले समूह शामिल थे. उन्होंने तीन मुख्य मांगें उठाईं: स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) को वापस लेना और चीफ इलेक्शन कमिश्नर (CEC) ज्ञानेश कुमार का इस्तीफा. यह प्रदर्शन उन वोटरों के समर्थन में किया गया जिनके नाम कथित तौर पर पिछले कुछ महीनों में कुमार की निगरानी में हुई चुनावी सूची में बदलाव की प्रक्रिया के दौरान हटा दिए गए.
खबरों के मुताबिक, 30 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की ड्राफ्ट वोटर लिस्ट से करीब 13 करोड़ वोटरों के नाम हटा दिए गए हैं. पिछले महीने द इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट के बाद विवाद और बढ़ गया. रिपोर्ट में आरोप लगाया गया कि SIR से जुड़े फैसलों को लेकर CEC से चुनाव आयोग (EC) के दो दूसरे सदस्यों ने बार-बार सवाल किए थे. इनमें नए वोटरों को जोड़ने की प्रक्रिया में बदलाव और चुनावी वोटर लिस्ट की सुरक्षा से जुड़े फैसले भी शामिल थे.
इसके बाद EC ने उन वोटरों को जोड़ने के लिए अभियान चलाने का आदेश दिया जिन्हें “छोड़ दिया गया” था. इसके अलावा विवादित प्रक्रिया को बेहतर तरीके से चलाने के लिए और भी कदम उठाए गए. इनमें ECINet की समीक्षा भी शामिल है. ECINet चुनाव आयोग (EC) का केंद्रीकृत पोर्टल है, जिसे इस जनवरी में शुरू किया गया था. अब यह चल रहे विवाद के केंद्र में है, क्योंकि आरोप है कि इसने SIR के दौरान बिना सही तरीके से जांच किए वोटरों के नाम हटाने में मदद की. ऐसा इसलिए हुआ क्योंकि इसने चुनावी रजिस्ट्रेशन अधिकारियों की शक्तियों को सीमित कर दिया, जबकि कानून के मुताबिक इन्हीं अधिकारियों की जिम्मेदारी वोटर लिस्ट को बनाए रखने की है.
भारत के दूसरे शहरों में हुए प्रदर्शनों की तरह ही हैदराबाद में भी लोग झंडे, पोस्टर और बैनर लेकर पहुंचे. इनमें चुनावी वोटर लिस्ट को ठीक करने की प्रक्रिया को ज्यादा पारदर्शी बनाने की मांग की गई थी. यह धरना सुबह 10 बजे शुरू हुआ और शाम 4 बजे तक चला. इसका नेतृत्व तेलंगाना पीपुल्स फ्रंट (TPF) ने किया. यह एक नया बना दबाव समूह है, जिसकी राजनीतिक महत्वाकांक्षाएं हैं. प्रदर्शन में वे वोटर भी शामिल हुए जिनके नाम SIR के दौरान हटा दिए गए थे.
“CEC ज्ञानेश कुमार के साथ काम करने वाले उनके सहयोगियों ने उनके व्यवहार और फैसले लेने के तरीके पर सवाल उठाए हैं. इससे CEC का पद ही सवालों के घेरे में आ गया है. इसलिए यह शांतिपूर्ण प्रदर्शन है और हम नैतिक आधार पर उनसे इस्तीफा देने की मांग कर रहे हैं,” रिटायर्ड IAS अधिकारी और तेलंगाना पीपुल्स फ्रंट के सह-संस्थापक M.V. रेड्डी ने दप्रिंट से कहा.
“बड़ी संख्या में वोटरों के नाम हटाना और छोटी-छोटी गलतियों के लिए नोटिस जारी करना CEC के मनमाने और सख्त रवैये को दिखाता है.”
ऊपर बताई गई मांगों के अलावा, प्रदर्शनकारियों ने CEC एक्ट 2023 को खत्म करने की भी मांग की. उनका आरोप है कि इस कानून से चुनाव की निगरानी करने वाली संस्था में नियुक्तियों पर सरकार का बहुत ज्यादा प्रभाव हो जाता है.
‘सरकार पर दबाव बनाते रहेंगे’
धरने में बोलने वाले लोगों, जिनमें TPF और वोटर्स राइट्स फोरम, तेलंगाना फॉर पीस एंड यूनिटी, ऑल इंडिया पीपल्स मिशन और नेशनल एसोसिएशन ऑफ पीपल्स मूवमेंट्स जैसे दूसरे संगठनों के नेता शामिल थे, ने ECINet को लेकर सवाल उठाए.
उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार द्वारा चलाए और निगरानी किए जाने वाला यह सॉफ्टवेयर चुनावी फॉर्म में ASDD कैटेगरी में आने वाले वोटरों के नामों को बिना सही जांच के पहचानकर हटा देता है. ASDD का मतलब है अनुपस्थित, दूसरी जगह चले गए, मृत और डुप्लीकेट. जब चुनाव अधिकारी SIR करते हैं, तो बूथ लेवल अधिकारी घर-घर जाकर वोटरों की वास्तविक जांच करते हैं और वोटर लिस्ट को अपडेट करते हैं. इस दौरान जिन वोटरों को उनके दर्ज पते पर नहीं पाया जाता या जिनकी एंट्री एक से ज्यादा होती है, उन्हें ASDD कैटेगरी में रखा जाता है.
सिर्फ तेलंगाना में ही SIR अभियान के तहत 73 लाख से ज्यादा वोटरों को अलग-अलग कारणों से नोटिस दिए गए हैं. इनमें नाम की स्पेलिंग में अंतर भी शामिल है.
TPF ने कहा है कि वह “केंद्र सरकार पर तब तक दबाव बनाता रहेगा, जब तक CEC इस्तीफा नहीं दे देते. इसके लिए वह अपने जैसे विचार रखने वाले अलग-अलग कार्यकर्ताओं और नागरिक समाज संगठनों के साथ मिलकर काम करेगा.”
एमवी रेड्डी ने कहा, “जब हमने इस प्रदर्शन की योजना बनाई और अपनी बात से सहमत अलग-अलग संगठनों से संपर्क किया, तो हमने CJP से भी संपर्क किया.”
तेलंगाना में सामाजिक दबाव वाले समूहों की भूमिका के बारे में सामाजिक कार्यकर्ता सैयद मजीद ने कहा कि नागरिक समाज संगठन (CSOs), पर्यावरण समूह और नागरिक समूहों का केवल बाहर से दबाव बनाने वाले संगठनों से सक्रिय क्षेत्रीय राजनीतिक ताकतों में बदलना राष्ट्रीय राजनीतिक पार्टियों के अंदर बढ़ते मतभेदों की वजह से हो रहा है.
उन्होंने कहा, “क्षेत्रीय ‘संगठनों’ का बनना राज्य स्तर पर टूटने वाले गुटों, अलग होने वाले समूहों या स्थानीय बड़े आंदोलनों का नतीजा है. ऐसा तब होता है जब नेताओं के राष्ट्रीय नेतृत्व के साथ मतभेद हो जाते हैं.”
उन्होंने आगे कहा, “हम अर्थव्यवस्था और राजनीति दोनों पर मजबूत तरीके से असर डालना चाहते हैं. क्योंकि NGO, प्रोफेशनल संगठन, हित समूह, युवा और सामुदायिक समूह और सामाजिक आंदोलन मिलकर एक-दूसरे से जुड़े हुए पूरे सिस्टम का हिस्सा बनते हैं.”
तेलंगाना पीपुल्स फ्रंट
TPF ने दो महीने पहले एक सामाजिक दबाव वाले समूह के रूप में काम शुरू किया. इसमें रिटायर्ड सरकारी अधिकारी, शहरी नीति विशेषज्ञ, सामाजिक कार्यकर्ता, प्रोफेशनल और समाज के लिए काम करने वाले नागरिक शामिल हैं. इसके कुछ संस्थापक सदस्यों ने दप्रिंट को बताया कि वे 2028 में होने वाले तेलंगाना विधानसभा चुनावों के करीब एक पूरी राजनीतिक पार्टी बनाने का इरादा रखते हैं.
इस संगठन के बताए गए लक्ष्य हैं कि सभी लोगों को अच्छी और आसानी से मिलने वाली शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाएं मिलें. इसके अलावा लोगों को सम्मानजनक नौकरियां और अपना कारोबार शुरू करने के मौके मिलें. यह टिकाऊ खेती को समर्थन देना, ऐसा आर्थिक विकास मॉडल बढ़ावा देना जो आम लोगों के हितों की रक्षा करे, और साफ-सुथरी, भ्रष्टाचार से मुक्त सरकार बनाना चाहता है.
इसके संस्थापक सदस्यों में प्रोफेसर पद्मजा शॉ, रिटायर्ड सरकारी अधिकारी मुरली अकुनुरी और M.V. रेड्डी, शहरी नीति विशेषज्ञ सृजना यादव, वकील मुप्पुरी कुमार, सामाजिक कार्यकर्ता एन रुबीना और IT प्रोफेशनल और उद्यमी निखिल विजय कृष्ण शामिल हैं.
यादव ने कहा, “हम दक्षिणपंथ के खिलाफ और फासीवाद के खिलाफ खड़ा एक सामाजिक-आर्थिक न्याय का मंच हैं. हमारे लिए भारतीय संविधान हमेशा मार्गदर्शन देने वाला आधार रहेगा. हमारे हर सदस्य के पास कम से कम मास्टर डिग्री है. हम ऐसा मंच और ऐसी पार्टी बनने जा रहे हैं जो सिर्फ सवाल उठाकर चली नहीं जाएगी, बल्कि आज समाज के सामने मौजूद अलग-अलग समस्याओं के भरोसेमंद समाधान भी देगी.”
TPF तेलंगाना पर आधारित संगठन होगा. इसके सदस्य अभी जिलों के प्रभारी तय करने और संगठन के ढांचे को बढ़ाने की योजना बना रहे हैं.
CJP और TPF में फर्क बताते हुए, CJP शिक्षा और नौकरियों से जुड़ी चिंताओं को लेकर युवाओं की नाराजगी से बना है, सृजना ने कहा, “हम पूरे राज्य का दौरा करने और लोगों की चिंताओं को समझने के लिए बस यात्रा निकालने की योजना बना रहे हैं. हम CJP के साहस और उत्साह दिखाने की भूमिका की सराहना करते हैं, लेकिन TPF सिर्फ एक सामाजिक आंदोलन से ज्यादा है. हम किसी विचारधारा की शाखा नहीं हैं और हमारा मानना है कि ऐसी समस्याओं के संस्थागत समाधान दिए जाने चाहिए जिन्हें संस्थाओं के जरिए हल किया जा सकता है.”
(इस रिपोर्ट को अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें)
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