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Wednesday, 6 May, 2026
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BJP की बिश्नोई समस्या: भजन लाल पर रेखा शर्मा के बयान से शुरू विवाद थम नहीं रहा

सांसद शर्मा के ‘बदमाशी’ वाले बयान से हरियाणा बीजेपी में जुबानी जंग तेज, बिश्नोई ने मांगी माफी, पार्टी नेतृत्व ने कार्रवाई की चेतावनी दी.

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गुरुग्राम: भारतीय जनता पार्टी की हरियाणा ईकाई के नेता कुलदीप बिश्नोई ने अपनी ही पार्टी को अल्टीमेटम दिया है: राज्यसभा सांसद रेखा शर्मा से माफी दिलाओ, जिन्होंने उनके दिवंगत पिता और पूर्व मुख्यमंत्री भजन लाल के बारे में कहा कि उन्होंने “बदमाशी” से चुनाव जीते, नहीं तो परिणाम भुगतने होंगे.

बिश्नोई ने एक बयान में हरियाणा बीजेपी अध्यक्ष मोहन लाल बडोली पर भी नाराज़गी जताई कि उन्होंने भजन लाल के नाम के आगे “चौधरी” या “जी” जैसे सम्मानजनक शब्द नहीं लगाए. उन्होंने बडोली के इस बयान पर भी आपत्ति जताई कि “ज़रूरी नहीं कि बेटा बाप जैसा हो.”

बीजेपी की तरफ से बिश्नोई को कारण बताओ नोटिस देने की चेतावनी दी गई, लेकिन इससे उनका रुख और सख्त हो गया है.

पिछले महीने के आखिर में रेखा शर्मा के बयान के बाद से दोनों पक्षों में खुलकर बयानबाजी और चेतावनियां जारी हैं. बिश्नोई ने टेक्सास से, जहां वह अपनी पत्नी के साथ अपने छोटे बेटे चैतन्य बिश्नोई के पास हैं, कहा कि “कागज़ी नोटिस से मैं नहीं डरता.”

शर्मा ने पंचकूला में एक चुनावी कार्यक्रम में कहा था कि हरियाणा में कांग्रेस का दौर “बदमाशी” से भरा था और उन्होंने भजन लाल और उनके बड़े बेटे चंद्र मोहन का नाम लिया. कुलदीप बिश्नोई भी 2022 तक कांग्रेस में थे.

चंद्र मोहन ने 1996 के विधानसभा चुनाव में कालका सीट से बीजेपी उम्मीदवार श्याम लाल बंसल को हराया था. उस समय शर्मा बंसल के लिए प्रचार कर रही थीं, जो अब पंचकूला मेयर चुनाव में उनकी पार्टी के उम्मीदवार हैं.

बिश्नोई, जिनकी पूरी राजनीति अपने पिता की विरासत पर टिकी है, ने एक्स पर वीडियो डालकर शर्मा को “नौसिखिया” कहा और कहा कि उन्हें उनकी हैसियत से ज्यादा मिला है, जिसे वे संभाल नहीं पा रही हैं.

पंचकूला से कांग्रेस विधायक चंद्र मोहन ने रेखा शर्मा को कानूनी नोटिस भेजा है. अंबाला से गुरुग्राम, करनाल से नूंह तक 16 जिलों में बिश्नोई समर्थकों ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई है. अप्रैल के आखिर में हिसार के बिश्नोई मंदिर में हुई बैठक में फैसला लिया गया कि अगर कार्रवाई नहीं हुई तो आंदोलन बढ़ाया जाएगा.

सोमवार को चंद्र मोहन ने पंचकूला कोर्ट में रेखा शर्मा के खिलाफ दीवानी और आपराधिक मानहानि का केस दर्ज किया.

बडोली की एंट्री, मामला और बिगड़ा

बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष ने नुकसान कम करने की कोशिश करते हुए कहा कि शर्मा से “शब्दों के चयन में गलती” हुई, लेकिन उनसे माफी मांगने को नहीं कहा. इसके बजाय उन्होंने बिश्नोई को सोशल मीडिया पर मामला बढ़ाने के लिए नोटिस देने की बात कही.

उन्होंने यह भी कहा कि भजन लाल कई सालों तक मुख्यमंत्री रहे और फिर “बाप-बेटे” की तुलना की, जिस पर बिश्नोई ने तुरंत प्रतिक्रिया दी.

बिश्नोई ने तीखा जवाब देते हुए कहा कि उन्होंने ही “हरियाणा में बीजेपी को चलना सिखाया”, तीन में से दो बार सरकार बनाने में मदद की और राजस्थान में हरियाणा से सटे इलाकों की 27 में से 22 सीटें दिलाईं.

उन्होंने कहा, “जिस बेटे को आप चुनौती दे रहे हैं, उसमें आपको आसमान से जमीन पर लाने की ताकत है.”

उन्होंने मांग की कि पहले रेखा शर्मा और फिर बडोली को नोटिस दिया जाए. उन्होंने खुद को “पुराना बब्बर शेर” बताते हुए कहा कि उनसे बात की जा सकती है, लेकिन उन्हें छेड़ा नहीं जा सकता.

सोमवार को दिप्रिंट से बात करते हुए बिश्नोई के एक करीबी ने कहा कि 2022 में कांग्रेस छोड़ने के बाद बीजेपी ने जो वादे किए थे, वे पूरे नहीं किए.

उन्होंने कहा, “पार्टी ने (बिश्नोई के बेटे) भव्या के लिए कैबिनेट पद और कुलदीप बिश्नोई के लिए राज्यसभा सीट का वादा किया था, लेकिन दोनों ही पूरे नहीं हुए. अब पार्टी के नेता चौधरी भजन लाल जी का अपमान कर रहे हैं, जो हरियाणा और राजस्थान में बहुत सम्मानित नेता थे.”

बिश्नोई के विकल्प

राजनीतिक विश्लेषक और अमिटी यूनिवर्सिटी, मोहाली में असिस्टेंट प्रोफेसर ज्योति मिश्रा के अनुसार बीजेपी के बाहर बिश्नोई के पास ज्यादा विकल्प नहीं हैं.

उन्होंने कहा, “कांग्रेस में वापसी का मतलब भूपेंद्र सिंह हुड्डा के नेतृत्व में जाना होगा, जिनकी वजह से 2022 में उदय भान को प्रदेश अध्यक्ष बनाया गया था और इसी कारण बिश्नोई नाराज होकर अलग हुए थे.”

उन्होंने बताया कि आईएनएलडी और जेजेपी फिलहाल कमजोर राजनीतिक ताकतें हैं. बिश्नोई की अपनी पार्टी हरियाणा जनहित कांग्रेस भी 2016 में कांग्रेस में मिल गई थी, इसलिए दोबारा संगठन खड़ा करना आसान नहीं है.

मिश्रा ने कहा कि बिश्नोई अपने समर्थकों को दिखाना चाहते हैं कि पिता के अपमान के बाद वे चुप नहीं हैं. लेकिन चुनाव में अभी चार साल बाकी हैं और कोई मजबूत विकल्प नहीं है, इसलिए बीजेपी भी जानती है कि उनके पास ज्यादा विकल्प नहीं हैं.

उन्होंने यह भी कहा कि कुमारी शैलजा का कांग्रेस गुट एक विकल्प हो सकता है, जहां बिश्नोई परिवार के पुराने संबंध हैं और उनके बड़े भाई चंद्र मोहन पहले से जुड़े हैं, लेकिन यह केवल एक बैकअप योजना हो सकती है.

(इस रिपोर्ट को अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें)


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