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Tuesday, 2 June, 2026
होमदेशनायब सैनी ने लॉन्च किया हरियाणा AI सैंडबॉक्स, जानिए कैसे बदलेगा सरकारी कामकाज

नायब सैनी ने लॉन्च किया हरियाणा AI सैंडबॉक्स, जानिए कैसे बदलेगा सरकारी कामकाज

उत्तर भारत के इस राज्य ने पांच खास 'यूज केस'—यानी सरकार की वास्तविक और मौजूदा समस्याओं—की पहचान की है, जिनके लिए सैंडबॉक्स के जरिए समाधान तलाशे जाएंगे.

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गुरुग्राम: हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने सोमवार को गुरुग्राम के सेक्टर-51 स्थित ताज होटल में हरियाणा आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) सैंडबॉक्स की शुरुआत की.

यह पहल विश्व बैंक के सहयोग से शुरू की गई है. यह हरियाणा AI डेवलपमेंट प्रोजेक्ट (HAIDP) का हिस्सा है. यह 2025 से 2028 तक चलने वाला तीन साल का प्रोग्राम है, जिस पर कुल 474.39 करोड़ रुपये खर्च होंगे. इसमें 70 फीसदी पैसा विश्व बैंक और बाकी हरियाणा सरकार दे रही है.

आसान भाषा में समझें तो एआई सैंडबॉक्स ऐसी जगह है, जहां सरकार की असली समस्याओं का समाधान खोजने के लिए नए एआई टूल्स को सुरक्षित माहौल में परखा जाएगा.

यहां कुछ उदाहरण दिए गए हैं कि आम लोगों के लिए ये एआई समाधान कैसे काम करेंगे.

मान लीजिए हरियाणा सरकार का जनसंवाद शिकायत पोर्टल. यहां हर महीने हजारों शिकायतें आती हैं—किसी को पेंशन नहीं मिली, किसी का बिजली कनेक्शन अटका हुआ है, कहीं पानी नहीं आ रहा, सड़क टूटी हुई है या पुलिस से जुड़ा मामला लंबित है.

अभी अधिकारियों का काफी समय इन शिकायतों को पढ़ने, अलग-अलग करने और सही विभाग तक पहुंचाने में चला जाता है. कई बार एक ही शिकायत बार-बार दर्ज हो जाती है और कई शिकायतें गलत विभाग में पहुंच जाती हैं.

मान लीजिए हिसार का एक बुजुर्ग लिखता है कि उसे तीन महीने से वृद्धावस्था पेंशन नहीं मिली और वह पहले भी कई बार शिकायत कर चुका है. उस शिकायत को पढ़ना, समझना, उसे जरूरी श्रेणी में रखना, उसी जिले की दूसरी ऐसी शिकायतों से जोड़ना और सही विभाग तक भेजना पड़ता है. जिस एआई टूल का परीक्षण किया जा रहा है, वह यह सारा काम हजारों शिकायतों पर एक साथ अपने आप कर सकता है.

इससे अधिकारी शिकायतें छांटने के बजाय लोगों की समस्याएं हल करने पर ज्यादा ध्यान दे सकेंगे.

एक और उदाहरण देखिए. कोई व्यक्ति गुरुग्राम-सोहना रोड पर बने गड्ढे की फोटो खींचकर मोबाइल ऐप पर अपलोड करता है. एआई उस तस्वीर को देखकर नुकसान का अंदाज़ा लगाता है, जगह की पहचान करता है और यह भी देखता है कि उसी सड़क से उस हफ्ते 50 और शिकायतें तो नहीं आई हैं.

अगर ऐसा है, तो सिस्टम उस सड़क को सबसे पहले मरम्मत की सूची में डाल देगा, ताकि किसी हादसे का इंतज़ार न करना पड़े. अगर एक हफ्ते में किसी एक सड़क से 200 शिकायतें आती हैं, तो इंजीनियरों को तुरंत अलर्ट भेजा जाएगा. मकसद यह है कि सड़क खराब होने के बाद कार्रवाई करने के बजाय पहले ही उसकी मरम्मत की योजना बना ली जाए.

काम का आदेश फिर भी इंजीनियर ही मंजूर करेगा. एआई सिर्फ यह सुनिश्चित करेगा कि सबसे खराब सड़कों की मरम्मत पहले हो.

एआई किसी अधिकारी की जगह नहीं लेता. यह उन चीज़ों को पढ़ता है, जिन्हें पढ़ने का समय अधिकारियों के पास नहीं होता. यह हज़ारों रिकॉर्ड में छिपी ऐसी बातों को पहचान सकता है, जिन्हें इंसान आसानी से नहीं देख पाता. फिर यह सबसे ज़रूरी मामलों को सबसे ऊपर रख देता है.

AI सैंडबॉक्स को आगे बढ़ाने वाले अधिकारी

इस परियोजना को आगे बढ़ाने में अहम भूमिका जे. गणेशन की है. वह हरियाणा कैडर के 2006 बैच के आईएएस अधिकारी हैं. वह हरियाणा स्टेट इलेक्ट्रॉनिक डेवलपमेंट कॉरपोरेशन लिमिटेड (HARTRON) के प्रबंध निदेशक हैं, जो इस परियोजना की मुख्य एजेंसी है. इसके अलावा भी वह कई अहम जिम्मेदारियां संभाल रहे हैं.

सोमवार को दिप्रिंट से बातचीत में गणेशन ने बताया कि पिछले साल हरियाणा सरकार ने ARJUN (AI for Resilient Jobs, Urban Air Quality and Next-Gen Skills) शुरू किया था. यह एक स्पेशल पर्पज व्हीकल (SPV) है, जिसे विश्व बैंक की मदद से चलने वाली परियोजनाओं को लागू करने के लिए बनाया गया है.

गणेशन ने कहा, “हरियाणा के मुख्यमंत्री इस SPV के अध्यक्ष हैं और मैं इसका मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) हूं. यह SPV पहले से हरियाणा क्लीन एयर प्रोग्राम फॉर सस्टेनेबल डेवलपमेंट पर काम कर रहा है. यह 3,500 करोड़ रुपये की परियोजना है, जिसे विश्व बैंक के सहयोग से शुरू किया गया है. इसका मकसद फैक्ट्रियों से होने वाले प्रदूषण को कम करना, इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा देना और खेती से जुड़े ऐसे कदम उठाना है, जिनसे पर्यावरण बेहतर हो.”

उन्होंने कहा कि हरियाणा एआई का इस्तेमाल सिर्फ आर्थिक विकास के लिए नहीं, बल्कि बेहतर पर्यावरण, साफ हवा और जलवायु से जुड़ी चुनौतियों से निपटने के लिए भी कर रहा है.

गणेशन ने बताया कि दूसरी बड़ी परियोजना हरियाणा एआई डेवलपमेंट प्रोजेक्ट है. यह 474 करोड़ रुपये की योजना है, जिसमें विश्व बैंक और हरियाणा सरकार 70:30 के अनुपात में पैसा लगा रहे हैं. इसका मकसद हरियाणा को एआई के क्षेत्र में देश का प्रमुख केंद्र बनाना है. इसमें शिक्षा, स्टार्टअप और सरकारी कामकाज को बेहतर बनाने पर खास ध्यान दिया जाएगा.

उन्होंने कहा, “इन्हीं परियोजनाओं पर काम करते समय विश्व बैंक ने हमें हरियाणा एआई सैंडबॉक्स का प्रस्ताव दिया था.”

उन्होंने बताया कि सैंडबॉक्स को विकसित करने और लागू करने के लिए विश्व बैंक की टीम लगातार हरियाणा सरकार के अधिकारियों के साथ काम कर रही है.

सस्ती नाकामी, तेज सीख

तकनीक की दुनिया में ‘सैंडबॉक्स’ का एक खास मतलब होता है. यह ऐसा सुरक्षित और अलग माहौल होता है, जहां नए सॉफ्टवेयर या सिस्टम को परखा जा सकता है, बिना किसी असली व्यवस्था को प्रभावित किए.

इसे ऐसे समझिए जैसे किसी नाटक की रिहर्सल. रिहर्सल में गलती होने पर असली शो खराब नहीं होता. एआई सैंडबॉक्स भी इसी सोच पर काम करता है.

सरकार के पास फसल उत्पादन, अस्पतालों में भर्ती मरीजों, छात्रों के प्रदर्शन, हवा की गुणवत्ता और पानी के स्तर से जुड़ा बहुत सारा डेटा होता है. लेकिन इस डेटा का सुरक्षित इस्तेमाल करके नए समाधान तैयार करने की व्यवस्था अक्सर नहीं होती.

सरकारी सेवाओं में गलती की गुंजाइश बहुत कम होती है. किसान, मरीज और स्कूली बच्चे किसी प्रयोग का हिस्सा नहीं बन सकते.

एआई सैंडबॉक्स ऐसा सुरक्षित माहौल देता है, जहां सरकार और नए आइडिया पर काम करने वाले लोग मिलकर समाधान तैयार कर सकते हैं. इसमें सुरक्षित डेटा शेयरिंग, जरूरी नियम और तकनीकी सहायता उपलब्ध होती है. इससे किसी समाधान को बड़े स्तर पर लागू करने से पहले परखा जा सकता है.

कोई स्टार्टअप या रिसर्च टीम एआई आधारित टूल लेकर आती है और सरकार की तरफ से दिए गए डेटा और कंप्यूटिंग सुविधाओं का इस्तेमाल करके उसका परीक्षण करती है.

अगर समाधान सफल रहता है, तो उसे बड़े स्तर पर लागू किया जाता है. अगर वह काम नहीं करता, तो उसकी नाकामी उसी सीमित दायरे में रह जाती है और आम लोगों तक सेवाएं पहुंचाने पर उसका कोई असर नहीं पड़ता.

मशीन में फंसा इंसान

जब सैनी दोपहर में लॉन्च कार्यक्रम के लिए ताज होटल पहुंचे, तो गणेशन से डेमो देने को कहा गया. उन्होंने शुरुआत किसी तकनीकी प्रस्तुति से नहीं की. उन्होंने एक नाम लिया—जय भगवान. रोहतक के बोहर गांव के रहने वाले.

गणेशन ने बताया, “जब जय भगवान वृद्धावस्था पेंशन पाने की उम्र में पहुंचे, तो उन्होंने आवेदन किया. यह उनके जीवन का ऐसा समय था, जब उन्हें सरकार की सबसे ज्यादा मदद की जरूरत थी. आमदनी बंद हो चुकी थी, शरीर कमजोर हो रहा था और इंतज़ार की गुंजाइश बहुत कम थी.

लेकिन उनकी फाइल एक दफ्तर से दूसरे दफ्तर घूमती रही. ऊपर से नीचे और नीचे से ऊपर. कोई फैसला हो पाता, उससे पहले ही जय भगवान की मौत हो गई.”

गणेशन ने कहा कि यह सिर्फ एक प्रक्रिया की विफलता नहीं थी. यह उन सभी लोगों की अंतरात्मा को झकझोर देने वाली घटना थी, जो इस प्रक्रिया का हिस्सा थे. क्योंकि हर फाइल के पीछे सिर्फ कागज नहीं होते, बल्कि एक इंसान, उसका परिवार और उसकी जिंदगी होती है.

इस कहानी को और अहम बनाने वाली बात यह है कि यह किसी ऑडिट में सामने नहीं आई. यह सीएम विंडो की समीक्षा के दौरान सामने आई, जो राज्य का डिजिटल शिकायत मंच है.

गणेशन ने कहा, “आज एआई सैंडबॉक्स की शुरुआत का मकसद यह सुनिश्चित करना है कि भविष्य में कोई और जय भगवान इस व्यवस्था में खो न जाए.”

सरकार में एआई के इस्तेमाल की जरूरत को समझाने के लिए शायद इससे बेहतर उदाहरण कोई नहीं हो सकता था.

पांच समस्याएं, पांच समाधान

गणेशन ने बताया कि हरियाणा सरकार ने पांच ऐसी समस्याएं चुनी हैं, जिनके समाधान एआई सैंडबॉक्स के जरिए खोजे जाएंगे.

ये हैं—जनसंवाद की शिकायतों को छांटना और सही विभाग तक पहुंचाना, म्हारी सड़क योजना के तहत खराब सड़कों की पहचान करना, शिक्षकों की तैनाती की बेहतर योजना बनाना, रेडियोलॉजी जांचों में जरूरी मामलों को पहले पहचानना और पानी से जुड़ी शिकायतों को एक साथ जोड़कर उनकी जड़ तक पहुंचना.

ये कोई काल्पनिक एआई प्रयोग नहीं हैं. ये सभी हरियाणा की पुरानी प्रशासनिक समस्याओं से जुड़े हुए हैं.

जनसंवाद पोर्टल पर हजारों शिकायतें आती हैं. चुनौती यह है कि हर शिकायत जल्दी और सही विभाग तक पहुंचे. फिलहाल यह काम लोगों के जरिए होता है और इसमें देरी होना आम बात है.

म्हारी सड़क योजना के तहत पूरे राज्य की सड़कों की देखरेख की जाती है. एआई कैमरा फुटेज या सैटेलाइट तस्वीरों की मदद से गड्ढों और सड़क की खराबी को पहले ही पहचान सकता है.

हरियाणा में शिक्षकों की तैनाती भी एक बड़ी समस्या है. कुछ स्कूलों में जरूरत से ज्यादा शिक्षक हैं, जबकि कुछ स्कूल सिर्फ एक शिक्षक के भरोसे चल रहे हैं. एआई छात्रों की संख्या, स्कूल छोड़ने की दर और इलाके की जरूरतों का विश्लेषण करके शिक्षकों को सही जगह तैनात करने में मदद कर सकता है.

जिला अस्पतालों में रेडियोलॉजिस्ट कम हैं और मरीज ज्यादा. एआई ऐसे मामलों को पहले पहचान सकता है, जिन्हें तुरंत जांच की जरूरत है.

पानी से जुड़ी शिकायतें भी अक्सर एक ही इलाके से बार-बार आती हैं. एआई इन्हें जोड़कर यह पता लगा सकता है कि कहीं पानी की व्यवस्था में कोई बड़ी खराबी तो नहीं है.

गणेशन ने कहा, “आज गुरुग्राम में हम यही कर रहे हैं. हमने ये पांच समस्याएं स्टार्टअप्स को दी हैं. सरकार उन्हें डेटा, कंप्यूटिंग सुविधा और दूसरी डिजिटल मदद देगी. इसके बाद हम उनसे इन समस्याओं के समाधान तैयार करने को कहेंगे. जो समाधान सबसे अच्छे साबित होंगे, उन्हें सरकार लागू करेगी.”

(इस रिपोर्ट को अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें)

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