गुरुग्राम: बिमला चौधरी गुरुवार को रेवाड़ी में भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) की नगर परिषद उम्मीदवार विनीता पिप्पल के लिए प्रचार करने पहुंची थीं. उनके साथ मंच पर हरियाणा की स्वास्थ्य मंत्री आरती राव भी मौजूद थीं. तभी चौधरी ने माइक संभाला और ऐसा वादा किया, जिसे सुनकर पूरी सभा हंस पड़ी.
उन्होंने कहा, “मेरी माताओं और बहनों. विनीता को जिताने के लिए वोट दीजिए और आज मैं इस मंच से एक और वादा करती हूं—यहां बैठे कुंवारे लड़कों की शादी कराने की जिम्मेदारी भी मेरी है. बस आप हमें आशीर्वाद दीजिए.”
सभा में जोरदार ठहाके गूंज उठे. मंत्री आरती राव ने भी इस मौके को आगे बढ़ाया. उन्होंने कहा कि बिमला चौधरी ने शायद रेवाड़ी में “मैरेज ब्यूरो” खोल लिया है और वह अपना वादा ज़रूर निभाएंगी.
बाद में पत्रकारों से बात करते हुए चौधरी ने बड़े उत्साह के साथ अपनी बात आगे बढ़ाई. उन्होंने कहा, “मैं पलवल की बेटी हूं. मैंने पहले भी रेवाड़ी, रामपुरा और बिजलीघर के कई लड़कों की शादी करवाई है. ज्यादातर की शादी पलवल इलाके में हुई है. अब कोई भी कुंवारा नहीं रहेगा. पहले वोट दीजिए, फिर शादी कराइए.”
लोग हंसे. मंत्री हंसीं. विधायक भी हंसीं.
लेकिन किसी ने वह सीधा सवाल नहीं पूछा—आखिर कोई राज्य उस स्थिति तक कैसे पहुंच जाता है, जहां शादी लायक महिलाओं की लगातार कमी चुनावी मुद्दा बन जाए? ऐसा मुद्दा, जिस पर मंच से प्रचार किया जाए और लोग हंसें भी.
इस मज़ाक का एक इतिहास है.
बिमला चौधरी हरियाणा की पहली बीजेपी नेता नहीं हैं, जिन्होंने चुनावी फायदा लेने के लिए कुंवारे लड़कों की शादी कराने का वादा किया हो.
जुलाई 2014 में, जब पार्टी हरियाणा में अपनी पहली पूर्ण बहुमत सरकार के लिए प्रचार कर रही थी, तब बीजेपी किसान मोर्चा के तत्कालीन राष्ट्रीय अध्यक्ष ओ.पी. धनखड़ ने एक कार्यकर्ता बैठक में कहा था कि बीजेपी सरकार “बिहार से लड़कियां लाएगी”, ताकि हरियाणा के युवकों की शादी हो सके.
अगले ही दिन बिहार विधान सभा की कार्यवाही स्थगित करनी पड़ी. जनता दल (यूनाइटेड) और राष्ट्रीय जनता दल के विधायकों ने विधानसभा गेट पर प्रदर्शन किया, नारे लगाए और धनखड़ की गिरफ्तारी की मांग की. बाद में धनखड़ ने सफाई दी. उन्होंने कहा कि उनका मतलब सम्मानजनक और सुरक्षित शादी से था, लेकिन उनकी बात को गलत समझा गया.
हरियाणा के कुंवारे
2011 की जनगणना में हरियाणा में हर 1,000 पुरुषों पर सिर्फ 879 महिलाएं दर्ज की गई थीं, जो देश के सबसे खराब अनुपातों में से एक था. 0-6 साल के बच्चों का लिंग अनुपात इससे भी ज्यादा खराब था—हर 1,000 लड़कों पर सिर्फ 834 लड़कियां. यह आंकड़ा साफ तौर पर दिखाता है कि राज्य में कई दशकों तक किस स्तर पर लिंग चयन के आधार पर गर्भपात किए गए.
आज हरियाणा में शादी की उम्र में पहुंच चुकी महिलाएं, यानी 20 से 30 साल की उम्र वाली महिलाएं, उसी दौर में पैदा हुई थीं. वही पीढ़ी है, जिसे ये आंकड़े दिखाते हैं.
हरियाणा सरकार 2014 से यह दावा करती रही है कि बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ कार्यक्रम के जरिए जन्म के समय लिंग अनुपात में सुधार हुआ है. इस योजना की शुरुआत प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पानीपत में बड़े कार्यक्रम के साथ की थी.
फ्रांसीसी पत्रकार फिलिप ट्रेटियाक, जो Elle मैगजीन के लिए काम करते थे, 2009 में भारत आए थे ताकि कन्या भ्रूण हत्या पर रिपोर्ट कर सकें. इसके लिए उन्होंने हरियाणा को चुना, जो बाद में बिल्कुल सही चुनाव साबित हुआ. वह राज्य के गांवों में घूमे. उनके साथ थे जी.एल. सिंघल, जिन्होंने गर्भधारण पूर्व और प्रसव पूर्व निदान तकनीक अधिनियम, 1994 (पीसीपीएनडीटी अधिनियम) पर लंबे समय तक काम किया है.
सिंघल ने दिप्रिंट को बताया कि गांव-गांव में ट्रेटियाक को एक जैसी तस्वीर दिखी—25 से 45 साल की उम्र के अविवाहित पुरुषों के समूह, जो ताश खेलते हुए बैठे रहते थे. वे हंसते हुए उनसे पूछते थे: “क्या आप हमारे लिए वियतनाम, रूस या कहीं और से महिलाएं ला सकते हैं?”
ट्रेटियाक की रिपोर्ट, जो Elle के फ्रेंच संस्करण में “Le foeticide des filles en Inde, des femmes en voie de disparition” (भारत में कन्या भ्रूण हत्या: गायब होती महिलाओं की कहानी) शीर्षक से छपी थी, और बाद में मृणालिनी हरचंद्रई ने इसका अंग्रेज़ी अनुवाद “She Didn’t Come Home” नाम से किया, उसमें उस सच्चाई को दिखाया गया जिसे सरकारी आंकड़े सिर्फ इशारा कर सकते थे. यह ऐसी समाज की तस्वीर थी, जिसने एक पूरी पीढ़ी तक अपनी ही महिलाओं को खत्म किया और अब जाकर समझना शुरू किया कि इसका असर पीछे छूट गए पुरुषों पर क्या पड़ा.
कौन हैं बिमला चौधरी
बिमला चौधरी पटौदी विधानसभा सीट से बीजेपी की विधायक हैं. वह पहली बार 2014 में विधायक चुनी गई थीं. 2024 में उन्होंने कांग्रेस की पर्ल चौधरी को हराकर दोबारा जीत हासिल की.
रेवाड़ी नगर परिषद के साथ-साथ पंचकूला, सोनीपत और अंबाला नगर निगमों, और उकलाना, सांपला और धारूहेड़ा नगर समितियों के लिए मतदान 10 मई को होना है. नतीजे 13 मई को घोषित किए जाएंगे.
लेकिन 14 मई को भी हरियाणा के कई कुंवारे दुल्हन का इंतज़ार ही करते रहेंगे.
(इस रिपोर्ट को अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें)