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Friday, 8 May, 2026
होमदेशNCRB ने पहली बार जारी किए पशु क्रूरता के आंकड़े, 2024 में 9 हजार से ज्यादा मामले दर्ज

NCRB ने पहली बार जारी किए पशु क्रूरता के आंकड़े, 2024 में 9 हजार से ज्यादा मामले दर्ज

NCRB डेटा के मुताबिक, पशुओं के साथ क्रूरता के मामलों को अब Special and Local Laws की सामान्य कैटेगरी में नहीं रखा गया. 2024 में इससे जुड़े 10 हजार से ज्यादा लोगों की गिरफ्तारी हुई.

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नई दिल्ली: राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (एनसीआरबी) ने पहली बार पशु क्रूरता निवारण अधिनियम, 1960 से जुड़े मामलों का रिकॉर्ड दर्ज किया है. 2024 में इस कानून के तहत 9,039 मामले दर्ज किए गए. बुधवार को गृह मंत्रालय की ओर से जारी एनसीआरबी की रिपोर्ट ‘भारत में अपराध 2024’ में कहा गया है कि इस कानून के तहत सालभर में 10,312 लोगों को गिरफ्तार किया गया.

रिपोर्ट में कहा गया है कि चार्जशीट दाखिल करने की दर 96.7 प्रतिशत रही, जबकि दोषसिद्धि दर 80.5 प्रतिशत रही. डेटा में यह भी दिखाया गया है कि सबूतों की कमी या सुराग न मिलने की वजह से 147 मामले बंद कर दिए गए, जबकि जांच के दौरान दो मामले खत्म हो गए.
कमी का मतलब कानूनी कार्रवाई का खत्म हो जाना होता है, जो आमतौर पर आरोपी की मौत या तकनीकी कारणों की वजह से होता है.

पशुओं के साथ क्रूरता—जैसे उन्हें मारना, जहर देना या घायल करना—पशु क्रूरता निवारण अधिनियम, 1960 और भारतीय न्याय संहिता की धारा 325 के तहत आपराधिक अपराध है. इसमें पांच साल तक की जेल हो सकती है.

एनसीआरबी के आंकड़ों के मुताबिक, पशु क्रूरता के मामलों में 2,215 लोगों को दोषी ठहराया गया है. महानगरों में दोषसिद्धि दर 93.8 प्रतिशत रही. वहीं लंबित मामलों का प्रतिशत, यानी अदालतों में अभी भी चल रहे मामलों की संख्या, 82.2 प्रतिशत है.

डेटा में यह भी बताया गया है कि पशु चोरी के 8,660 मामले दर्ज हुए, जिनकी कुल कीमत 48.8 करोड़ रुपये थी. 44.9 प्रतिशत रिकवरी रेट का मतलब है कि चोरी हुए लगभग आधे पशुओं को ढूंढकर उनके मालिकों को वापस सौंप दिया गया.

औपचारिक पहचान

2024 की एनसीआरबी रिपोर्ट में अब पशु क्रूरता से जुड़े मामलों को सामान्य विशेष और स्थानीय कानून (एसएलएल) कैटेगरी में रखने की पुरानी व्यवस्था खत्म कर दी गई है.

अब यह डेटा पशु क्रूरता के मामलों को पूरी आपराधिक न्याय प्रक्रिया में ट्रैक करता है—एफआईआर दर्ज होने से लेकर जांच, चार्जशीट और अदालत के फैसले तक. पीपल फॉर एनिमल्स की श्रीमोई चक्रवर्ती ने कहा कि इससे “भारत में पहली बार यह राष्ट्रीय स्तर की सांख्यिकीय तस्वीर सामने आई है कि सिस्टम पशु क्रूरता के मामलों को कैसे संभालता है.” लंबे समय से भारत के राष्ट्रीय अपराध डेटा में पशु क्रूरता को औपचारिक पहचान दिलाने के लिए अभियान चला रहीं चक्रवर्ती ने इसे पशु कल्याण और सार्वजनिक सुरक्षा, दोनों के लिए एक बड़ा मोड़ बताया.

चक्रवर्ती ने कहा, “इस डेटा को शामिल किया जाना भारत के आधिकारिक अपराध डेटा ढांचे में पशुओं के खिलाफ अपराधों की औपचारिक पहचान है. इससे राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में कानून के लागू होने की व्यवस्थित निगरानी संभव होगी. साथ ही पहली बार ऐसा डेटा तैयार हुआ है, जिसका दूसरे अपराधों की कैटेगरी के साथ विश्लेषण किया जा सकेगा.”

इसे “ऐतिहासिक कदम” बताते हुए चक्रवर्ती ने कहा कि दुनिया भर में रिसर्च ने “लगातार यह दिखाया है कि पशु क्रूरता और लोगों के खिलाफ हिंसा, घरेलू हिंसा और दूसरे गंभीर अपराधों के बीच संबंध होता है.”

उन्होंने आगे कहा, “राष्ट्रीय स्तर का डेटा उपलब्ध होने से अब भारत में भी ऐसे पैटर्न की जांच की जा सकती है और अपराध रोकने के उपाय मजबूत किए जा सकते हैं.”

पशु अधिकार कार्यकर्ता गौरी मौलेखी ने भी इससे सहमति जताई.

उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर 2024 की एनसीआरबी रिपोर्ट जारी होने को “भारत के लिए ऐतिहासिक पल” बताया.

उन्होंने लिखा, “पहली बार एनसीआरबी ने भारत के राष्ट्रीय अपराध आंकड़ों में पशुओं के खिलाफ अपराधों को आधिकारिक तौर पर दर्ज किया है. अब आखिरकार जानवरों को भी गिना जा रहा है. इस ऐतिहासिक कदम के लिए श्री @AmitShah जी, @HMOIndia और NCRB का धन्यवाद. अब हमें इसे आगे बढ़ाना है.”

(इस रिपोर्ट को अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें)

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