बेंगलुरु: यूट्यूबर ध्रुव राठी ने गुरुवार को बेंगलुरु में अपने पहले विरोध प्रदर्शन में हिस्सा लेकर खूब चर्चा बटोरी. उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार से चल रहे स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) के दौरान वोटर लिस्ट से बड़ी संख्या में नाम हटाए जाने के आरोपों पर जवाब मांगा. साथ ही, मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को पद से हटाने की मांग की.
राठी ने साफ किया कि जैसा आरोप लगाया जा रहा है, वह सरकार बदलने की मांग नहीं कर रहे हैं, बल्कि SIR को लेकर सरकार से सिर्फ जवाब चाहते हैं. उन्होंने बेंगलुरु के फ्रीडम पार्क में SIR के खिलाफ हुए विरोध प्रदर्शन में हिस्सा लिया. उनके साथ अभिनेता और सामाजिक कार्यकर्ता प्रकाश राज, रिटायर्ड जस्टिस गोपाल गौड़ा, कॉकरोच जनता पार्टी के संस्थापक अभिजीत दीपके, विचारक देवनूर महादेव और कई अन्य लोग मौजूद थे. इनमें कांग्रेस के दो विधायक नसीर अहमद और बी.आर. पाटिल भी शामिल थे.
राठी ने कहा, “मेरे सिर्फ तीन सवाल हैं.” उनकी इस बात पर प्रदर्शनकारियों ने जोरदार तालियां बजाईं. उन्होंने दावा किया कि पश्चिम बंगाल में चुनाव से पहले 70,000 वोटरों के नाम हटा दिए गए थे और बाद में उन्हें फिर से जोड़ दिया गया. उन्होंने दावा किया कि बिहार में 65 लाख वोटरों के नाम हटा दिए गए, जबकि चुनाव वाले उत्तर प्रदेश में 14 लाख नए वोटरों के नाम जोड़े गए.
उन्होंने कहा कि लाखों भारतीय वोटरों को उनके मतदान के अधिकार से वंचित किए जाने का असर समाज के हर वर्ग पर पड़ता है, चाहे उनकी राजनीतिक सोच कुछ भी हो.
राठी ने कहा, “यहां जो लोग आए हैं, उनसे बड़ा देशभक्त कोई नहीं है. और जो गद्दार ज्ञानेश कुमार का समर्थन कर रहे हैं, उनसे बड़ा गद्दार कोई नहीं है.”
प्रदर्शन से राठी की X पर की गई पोस्ट, जिसका कैप्शन था ‘नमस्कार नरेंद्र मोदी, भारत के पास आपके लिए एक संदेश है’ और ‘वोट चोर, गद्दी चोर’ के नारे लगाते हुए एक वीडियो भी था, को 48 लाख से ज्यादा बार देखा जा चुका है.
Hello @narendramodi
India has a message for you. pic.twitter.com/wqIGNlkWsh
— Dhruv Rathee (@dhruv_rathee) October 8, 2026
प्रदर्शन में वक्ताओं ने बारी-बारी से केंद्र सरकार की आलोचना की. उन्होंने बार-बार मोदी सरकार को याद दिलाया कि ये विरोध प्रदर्शन “सिर्फ शुरुआत हैं”. उन्होंने यह भी चेतावनी दी कि अगर उनकी मांगें नहीं मानी गईं, तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा. दीपके ने कहा, “पहला विकेट धर्मेंद्र प्रधान का था. दूसरा ज्ञानेश कुमार का होगा.”
कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) ने 10 अक्टूबर को दिल्ली के जंतर-मंतर पर इसी तरह के विरोध प्रदर्शन का आह्वान किया है. यह प्रदर्शन NEET के खिलाफ हुए विरोध प्रदर्शनों की तर्ज पर होगा, जिनके बाद तत्कालीन केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को इस्तीफा देना पड़ा था.
‘औकात’
2025 में राहुल गांधी ने बेंगलुरु के महादेवपुरा विधानसभा क्षेत्र में वोटर लिस्ट में गड़बड़ी का आरोप लगाया था. इसके बाद कर्नाटक कांग्रेस के ‘वोट चोरी’ अभियान का केंद्र बन गया.
बाद में डी.के. शिवकुमार के नेतृत्व वाली कर्नाटक सरकार ने बीजेपी पर आरोप लगाया कि उसने फॉर्म 7 की लाखों अर्जियां जमा की थीं, जिनके जरिए उन वोटरों के नाम हटाने की कोशिश की गई जो बीजेपी के समर्थक नहीं थे. बीजेपी राज्य में मुख्य विपक्षी पार्टी है.
कर्नाटक में SIR शुरू होने के बाद से पूरे राज्य में एक करोड़ से ज्यादा वोटरों के नाम हटाए जा चुके हैं.
कांग्रेस पार्टी और कर्नाटक में उसकी सरकार ने प्रधानमंत्री मोदी और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर आरोप लगाया है कि उन्होंने वंचित समुदायों और अल्पसंख्यकों से जुड़े उन वोटरों के नाम बड़े पैमाने पर हटाने का आदेश दिया, जो बीजेपी के समर्थक नहीं हैं.
SIR के खिलाफ प्रदर्शन में CJP के नेताओं और दूसरे वक्ताओं ने कहा कि वे किसी राजनीतिक पार्टी के साथ मिलकर नहीं, बल्कि नागरिकों के तौर पर विरोध कर रहे हैं.
प्रदर्शन के मंच के दो स्तर थे. वरिष्ठ कन्नड़ अभिनेता मुख्यमंत्री चंद्रू समेत कई कार्यकर्ता नीचे वाले हिस्से में बैठे थे, जबकि दीपके, राज, राठी और अन्य लोग उनके ठीक बगल में ऊंचे मंच पर बैठे थे.
भीड़ में ज्यादातर युवा थे. वे मंच और दर्शकों के बीच करीब 30 फीट की दूरी पर लगाए गए बैरिकेड्स की ओर आगे बढ़ रहे थे. जब भी राठी, दीपके या सौरव दास भीड़ की तरफ हाथ हिलाते या उनकी तरफ देखते, तो लोग जोर-जोर से तालियां बजाते और उत्साह दिखाते थे.
हालांकि, कांग्रेस शासित कर्नाटक में किसी भी अप्रिय घटना को रोकने के लिए पुलिस की भारी तैनाती की गई थी. पुलिस भीड़ और मंच के बीच खड़ी थी.
दीपके ने कहा कि मोदी वोट हटाकर प्रधानमंत्री बने थे.
दीपके ने कहा, “मोदी लोकतंत्र के हत्यारे हैं. वे बस आप पर अपना कब्जा चाहते हैं, यही RSS की सोच है.”
इसके बाद उन्होंने कहा कि महात्मा गांधी भारत की आत्मा थे, डॉ. बी.आर. आंबेडकर देश की रीढ़ थे और जवाहरलाल नेहरू देश का दिमाग थे.
दीपके ने कहा, “मोदी नेहरू से बड़ा बनना चाहते हैं, लेकिन उनकी वह औकात नहीं है.” उन्होंने इस बात को कहने के लिए हिंदी के शब्द “औकात” का इस्तेमाल किया.
दीपके ने कहा कि ‘एक देश, एक चुनाव’ सिर्फ एक नारा है. उन्होंने दावा किया कि असली इरादा ‘एक देश, एक पार्टी’ का है. उन्होंने कहा कि एडोल्फ हिटलर की भी यही सोच थी.
दीपके ने कहा, “इसलिए मैं नरेंद्र मोदी से कहना चाहता हूं कि जाकर पूछें कि एडोल्फ हिटलर का क्या हुआ था. उसे खुद को गोली मारनी पड़ी थी. इसलिए आप भारत को कभी तानाशाही में नहीं बदल पाएंगे.”
(इस रिपोर्ट को अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें)
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