अयोध्या: राम मंदिर में दर्शन करने के बाद मंदिर के बाहर खड़ी छत्तीसगढ़ के रायपुर की लक्ष्मी ठाकुर वहां आने वाले कई श्रद्धालुओं की भावना बयां करती हैं.
वह कहती हैं, “अब चंदा नहीं देंगे. कोई मतलब नहीं डोनेट करने का. इससे अच्छा किसी गरीब को दान दे दें. यहां मंदिर की देखभाल करने वाले ही चंदा चुरा ले जाते हैं.”
लक्ष्मी कहती हैं कि कई सालों तक मंदिर में दान देना उनकी धार्मिक यात्रा का अहम हिस्सा था. लेकिन राम मंदिर में चढ़ावे की कथित चोरी और गड़बड़ी के विवाद ने अब उनकी सोच बदल दी है. 54 साल की लक्ष्मी अपनी बेटी प्रियंका के साथ अयोध्या आई हैं.
उन्होंने दिप्रिंट से कहा, “मैं हमेशा मानती थी कि भगवान को चढ़ाया गया पैसा आखिरकार किसी अच्छे काम में ही लगता है. लेकिन इस घटना ने मेरा भरोसा हिला दिया है. हमें भगवान राम पर आस्था है, लेकिन मंदिर ट्रस्ट पर नहीं. अब दानपेटी में पैसे डालने के बजाय हम किसी गरीब परिवार की मदद करना या किसी की पढ़ाई का खर्च उठाना ज्यादा पसंद करेंगे.”
लक्ष्मी अकेली नहीं हैं. अयोध्या में कई श्रद्धालु अब श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट से जुड़े कथित वित्तीय घोटाले के आरोपों के बाद राम मंदिर में बड़ी रकम या कीमती सामान दान देने से हिचक रहे हैं.

राम मंदिर के बाहर पहले लंबी-लंबी लाइनें आम बात थीं, लेकिन अब वे काफी छोटी हो गई हैं. इससे साफ है कि श्रद्धालुओं की संख्या कम हुई है. स्थानीय लोग और व्यापारी कहते हैं कि कम लोगों के आने से कारोबार पर असर पड़ा है और बिक्री घट गई है. खासकर होटलों का कारोबार सबसे ज्यादा प्रभावित हुआ है.
जून की शुरुआत में चढ़ावे की कथित चोरी के आरोप सामने आने के बाद, श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के अनुरोध पर राज्य सरकार ने मामले की जांच के लिए तीन सदस्यीय विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया था.
SIT ने अभी तक अपनी अंतिम रिपोर्ट नहीं सौंपी है. इस बीच पुलिस ने मंदिर में चढ़ावे की गिनती की प्रक्रिया से जुड़े ट्रस्ट के आठ कर्मचारियों को गिरफ्तार किया है.
श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय और ट्रस्टी अनिल मिश्रा ने इस्तीफा दे दिया है. हालांकि, उनका नाम किसी भी पुलिस FIR में नहीं है. दिप्रिंट से बात करने वाले लोगों का मानना है कि यह बड़े अधिकारियों को बचाने की कोशिश है.
‘दान का पैसा सुरक्षित नहीं है’
राम मंदिर के अंदर कई श्रद्धालुओं ने दिप्रिंट से कहा कि वे मंदिर आना जारी रखेंगे, लेकिन जब तक आरोपों की पूरी जांच नहीं हो जाती, तब तक बड़ी रकम दान नहीं करेंगे.
रायपुर से अपनी मां के साथ आईं 28 साल की प्रियंका ठाकुर कहती हैं कि यह विवाद उत्तर प्रदेश से बाहर भी फैल चुका है.
वह कहती हैं, “छत्तीसगढ़ में भी सोशल मीडिया पर इस पूरे मामले की चर्चा हो रही है. जब लोगों को पता चला कि हम अयोध्या जा रहे हैं, तो कई लोगों ने कहा कि ‘ज्यादा पैसा मत चढ़ाना’.”
उनका मानना है कि अब सीधे जरूरतमंद लोगों की मदद करना ज्यादा सुरक्षित है. “अगर मैं किसी बच्चे की पढ़ाई में मदद करूं या किसी गरीब परिवार की सहायता करूं, तो कम से कम मुझे पता रहेगा कि मेरा पैसा कहां जा रहा है.”
इसी तरह हरियाणा के हिसार से परिवार के साथ आए संदीप सैनी कहते हैं कि भगवान राम पर उनका भरोसा आज भी पूरी तरह कायम है. लेकिन मंदिर प्रशासन पर उनका भरोसा कम हो गया है.
सैनी कहते हैं, “जब मैं 2024 में आया था, तब मैंने 5,100 रुपये दान किए थे. इस बार मैं सिर्फ 51 रुपये चढ़ाऊंगा.”
वह कहते हैं, “हमारी आस्था को ठेस पहुंची है. हमें भगवान राम पर भरोसा है, लेकिन ट्रस्ट के अधिकारियों पर नहीं. जब तक जांच पूरी नहीं हो जाती, हम बड़ा दान नहीं करेंगे. हमारा पैसा सुरक्षित नहीं है.”
हर दिन राम मंदिर परिसर में रखी 40 दानपेटियों से नकदी, सिक्के और अन्य कीमती चढ़ावे इकट्ठा किए जाते हैं. सामान्य दिनों में रोजाना करीब 75 लाख रुपये का चढ़ावा आता है. लेकिन त्योहारों और खास मौकों पर यह रकम दो या तीन गुना तक पहुंच जाती है.
साल 2024-25 में ही ट्रस्ट ने चढ़ावे की कुल कीमत करीब 153 करोड़ रुपये आंकी थी. इसमें फिक्स्ड डिपॉजिट पर मिलने वाला ब्याज शामिल नहीं है.
श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के मुताबिक, ट्रस्ट बनने से लेकर इस साल 31 मार्च तक श्रद्धालुओं ने कुल 582 करोड़ रुपये का चढ़ावा दिया. इसमें से 391 करोड़ रुपये ट्रस्ट के संचालन पर खर्च किए गए.
विवाद शुरू होने के बाद पिछले डेढ़ महीने में मिले चढ़ावे के बारे में ट्रस्ट ने कोई आंकड़ा जारी नहीं किया है.
हालांकि, सभी श्रद्धालुओं की राय नहीं बदली है. गाजियाबाद से आए अमित शर्मा कहते हैं कि उन्हें अपना दान कम करने की कोई वजह नहीं दिखती.
वह कहते हैं, “मैं भगवान से हिसाब नहीं मांगता. जांच चल रही है. अगर किसी ने चोरी की है, तो उसे सजा मिलेगी. लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि श्रद्धालु चढ़ावा देना बंद कर दें. पिछली बार की तरह इस बार भी मैं 1,100 रुपये दान करूंगा.”
कारोबारियों पर भी पड़ा असर
राम मंदिर के आसपास के छोटे व्यापारी और स्थानीय दुकानदारों का कहना है कि उनका कारोबार काफी घट गया है.
राम मंदिर से कुछ ही मीटर दूर हरिश्चंद्र मार्केट के व्यापारियों का कहना है कि विवाद शुरू होने के बाद से दुकानें लगभग खाली रहने लगी हैं.
कई दुकानदारों के मुताबिक, पिछले एक महीने में उनका कारोबार 50 से 70 प्रतिशत तक कम हो गया है.

पूजा सामग्री बेचने वाले बलराम गुप्ता कहते हैं कि उनकी कमाई में काफी गिरावट आई है.
वह कहते हैं, “दान विवाद ने हमें बहुत नुकसान पहुंचाया है. पहले सामान्य दिन में 10,000 से 12,000 रुपये तक की कमाई हो जाती थी. अब 2,000 रुपये की बिक्री भी मुश्किल लगती है.”
उनका मानना है कि कारोबार पर दो चीजों का एक साथ असर पड़ा है. पहली दान विवाद और दूसरी मंदिर जाने वाले पुराने पैदल रास्तों में से एक का बंद होना.
गुप्ता कहते हैं, “यह श्रद्धालुओं के लिए सबसे पुराने रास्तों में से एक था. इसे बंद किए जाने के बाद लोगों की आवाजाही काफी कम हो गई. हमने चंपत राय समेत मंदिर के अधिकारियों के सामने भी अपनी चिंता रखी, लेकिन कुछ नहीं बदला.”
सामने ही पीतल के सामान की दुकान चलाने वाले आशीष कुमार कहते हैं कि बाजार अब पहले के मुकाबले काफी शांत हो गया है.
उन्होंने द प्रिंट से कहा, “स्कूल खुल गए हैं, इसलिए मौसम के हिसाब से मांग कम होना स्वाभाविक है. लेकिन हम यह नहीं कह सकते कि दान विवाद का इसमें कोई असर नहीं है.”

उनके मुताबिक, अब आने वाले लोग अलग तरह के सवाल पूछते हैं.
वह कहते हैं, “पहले पर्यटक मंदिर के समय या आसपास घूमने की जगहों के बारे में पूछते थे. अब कई लोग ‘दान चोरी’ के बारे में पूछते हैं. कुछ तो यह भी पूछते हैं कि आरोपी कौन हैं. हमारे पास कोई जवाब नहीं होता.”
उनका कहना है कि इस विवाद ने अयोध्या की बनाई गई छवि को नुकसान पहुंचाया है.
वह कहते हैं, “अब लोग खासकर गहने या महंगी चीजें चढ़ाने से बच रहे हैं.”
इसी तरह रिकाबगंज मार्केट में कपड़े के व्यापारी राजेश कुमार कहते हैं कि पहले बाहर से आने वाले लोग उनके ग्राहकों का बड़ा हिस्सा थे.
वह कहते हैं, “पिछले साल जुलाई में बारिश के कारण भीड़ कम थी, लेकिन तब भी कोई न कोई ग्राहक दुकान पर आ ही जाता था. अब कभी-कभी दो-दो घंटे तक एक भी ग्राहक नहीं आता.”
उनके मुताबिक, दूसरे राज्यों से आने वाले श्रद्धालु घर लौटने से पहले कपड़े और घरेलू सामान बड़ी मात्रा में खरीदते थे.

होटल और गेस्ट हाउस भी प्रभावित
शायद सबसे ज्यादा असर मंदिर के पास के छोटे होटल और गेस्ट हाउस मालिकों पर पड़ा है.
मंदिर परिसर के प्रवेश द्वार से करीब 300 मीटर दूर 20 कमरों वाले गेस्ट हाउस के मालिक हरिओम वर्मा कहते हैं कि अब कमरे लगभग खाली पड़े हैं.
वह कहते हैं, “पिछले एक महीने में मेरा कारोबार करीब 80 प्रतिशत गिर गया है.”
वर्मा ने 2019 में राम जन्मभूमि विवाद पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद यह गेस्ट हाउस बनाया था. उन्हें उम्मीद थी कि अयोध्या में पर्यटन तेजी से बढ़ेगा.
वह कहते हैं, “शुरुआती कुछ सालों तक लगभग हर दिन सभी कमरे भरे रहते थे.”
उन्होंने आगे कहा, “अब कई दिनों तक सिर्फ एक या दो कमरे ही भरते हैं. जुलाई और अगस्त में मौसम की वजह से वैसे भी श्रद्धालु कम आते हैं. लेकिन पिछले साल मानसून में भी इतनी गिरावट नहीं आई थी. दान विवाद ने पहले से कमजोर इस सीजन को और ज्यादा प्रभावित कर दिया है.”
इसका सबसे ज्यादा असर अयोध्या के दो और तीन सितारा होटलों पर दिख रहा है, जो मुख्य रूप से देश के श्रद्धालुओं पर निर्भर हैं.
मंदिर से करीब दो किलोमीटर दूर ओम रेजिडेंसी के मालिक दीपक सोनी का कहना है कि उनका कारोबार 70 प्रतिशत से ज्यादा गिर गया है.
वह कहते हैं, “पहले हमें ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों तरह की बुकिंग मिलती थी. होटल में करीब 90 प्रतिशत कमरे भरे रहते थे. अब आधे कमरे भरना भी मुश्किल हो गया है.”
सोनी कारोबार में गिरावट का पूरा कारण दान विवाद को नहीं मानते. लेकिन वह कहते हैं कि मेहमानों की बातचीत जरूर बदल गई है.
वह कहते हैं, “पहले लोग पूछते थे कि अयोध्या में बीजेपी सीटें क्यों हार गई. अब लोग दान चोरी के बारे में पूछते हैं. हमारे पास इसका कोई जवाब नहीं है. हम राजनीति में नहीं पड़ना चाहते. हम सिर्फ अपना कारोबार करना चाहते हैं.”
मंदिर से करीब छह किलोमीटर दूर लक्ष्मी भवन होटल के मालिक सूर्य प्रकाश वर्मा कहते हैं कि पिछले एक महीने में उनकी बुकिंग करीब 80 प्रतिशत कम हो गई है.
उनका मानना है कि इसके पीछे कई वजहें हैं.
वह कहते हैं, “आज से दो साल पहले के मुकाबले अब होटल बहुत ज्यादा हो गए हैं. बाजार में प्रतिस्पर्धा बढ़ गई है. लोगों के पास ठहरने के कई विकल्प हैं. लेकिन हालिया विवाद ने हालात और खराब जरूर कर दिए हैं.”
वहीं, अयोध्या-लखनऊ हाईवे पर स्थित चार सितारा पंचशील होटल के मैनेजर नीरज तिवारी अब भी आशावादी हैं.
उनका कहना है कि जुलाई भले ही धीमा रहा हो, लेकिन अगस्त के आखिर, सितंबर और अक्टूबर के लिए बुकिंग शुरू हो चुकी है.
वह कहते हैं, “मैं इसे सामान्य कारोबारी चक्र का हिस्सा मानता हूं. जहां तक दान विवाद का सवाल है, जांच चल रही है. जांच पूरी होने से पहले कोई टिप्पणी करना ठीक नहीं होगा.”
आंकड़े अब भी साफ नहीं
श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने अब तक यह नहीं बताया है कि दान में कोई कमी आई है या नहीं. श्रद्धालुओं की संख्या के आधिकारिक आंकड़े भी जारी नहीं किए जा रहे हैं.
अयोध्या पुलिस कंट्रोल रूम के आंकड़ों के मुताबिक, 3 जुलाई को 87,652 श्रद्धालुओं ने मंदिर में दर्शन किए. जबकि 21 जून को यह संख्या 94,419 थी. अधिकारियों ने पिछले साल के आंकड़े नहीं दिए.
हालांकि, ट्रस्ट के एक पदाधिकारी ने नाम न बताने की शर्त पर, क्योंकि उन्हें सार्वजनिक रूप से बोलने की अनुमति नहीं थी, माना कि श्रद्धालुओं की संख्या से ज्यादा बदलाव दान देने के तरीके में आया है.
उन्होंने कहा, “आमतौर पर हर दिन 90 हजार से 1.25 लाख श्रद्धालु आते हैं. लोगों की संख्या में कुछ कमी आई है.”
उन्होंने आगे कहा, “लेकिन सबसे बड़ा बदलाव यह है कि लोग अब महंगा दान देने से बच रहे हैं. अब शायद ही कोई गहने या कीमती सामान दान करना चाहता है. सप्ताहांत में भीड़ अब भी अच्छी रहती है, लेकिन सप्ताह के बाकी दिन काफी शांत हो गए हैं.”
स्थानीय अर्थव्यवस्था पर असर
लखनऊ के अर्थशास्त्री और अयोध्या में जन्मे डॉ. ए.पी. तिवारी का मानना है कि कारोबार में गिरावट का असर पूरे शहर की अर्थव्यवस्था पर पड़ता है.
उन्होंने द प्रिंट से कहा, “हर क्षेत्र एक-दूसरे से जुड़ा हुआ है. 2019 के बाद से हम लगातार सुनते रहे हैं कि राम मंदिर और बढ़ते पर्यटन की वजह से अयोध्या की अर्थव्यवस्था तेजी से बढ़ रही है. शायद पहली बार हम इतनी बड़ी संख्या में कारोबारियों के नुकसान की बातें सुन रहे हैं.”
तिवारी ने उम्मीद जताई कि सरकार समय रहते लोगों का भरोसा दोबारा बनाएगी, ज्यादा श्रद्धालुओं और पर्यटकों को आकर्षित करेगी और अयोध्या में कारोबार फिर से पटरी पर आएगा.
उन्होंने कहा, “शहर की अर्थव्यवस्था धार्मिक पर्यटन पर काफी निर्भर है. जैसे ही लोगों का भरोसा लौटेगा, स्थानीय अर्थव्यवस्था भी संभल जाएगी.”
‘मौसमी मंदी है, दान विवाद से कोई संबंध नहीं’
लेकिन चंपत राय के करीबी सहयोगी और विश्व हिंदू परिषद (VHP) से जुड़े प्रकाश शर्मा ने इस दावे को खारिज कर दिया कि दान विवाद की वजह से अयोध्या की अर्थव्यवस्था प्रभावित हुई है. उन्होंने इसे विपक्षी दलों का फैलाया हुआ झूठा नैरेटिव बताया.
उन्होंने कहा कि आरोपों की जांच अभी चल रही है और जल्दबाजी में कोई निष्कर्ष नहीं निकालना चाहिए.
शर्मा ने दिप्रिंट से कहा, “यह बिल्कुल गलत है कि विवाद की वजह से कारोबार घटा है. अभी मानसून का मौसम है. इस दौरान लोग स्वाभाविक रूप से यात्रा कम करते हैं और श्रद्धालुओं की संख्या घट जाती है.”
उन्होंने कहा, “कारोबार में यह गिरावट मौसम की वजह से है. इसका राम मंदिर दान विवाद से कोई संबंध नहीं है.”
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