नई दिल्ली: राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के छात्र संगठन अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) ने बुधवार को कहा कि छात्रों की असली चिंताओं और जायज मांगों का इस्तेमाल “संकीर्ण राजनीतिक हितों, देश विरोधी एजेंडे या देश में अस्थिरता, टकराव और अराजकता का माहौल बनाने” के लिए नहीं किया जाना चाहिए.
यह बयान ऐसे समय में आया है, जब राष्ट्रीय राजधानी में छात्र और युवा लगातार प्रदर्शन कर रहे हैं. इस प्रदर्शन का नेतृत्व कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) कर रही है.
सुरक्षा बलों और “खुद को छात्र बताने वाले कुछ अराजक तत्वों” के बीच हुई हिंसक झड़प पर दुख जताते हुए एबीवीपी ने कहा, “एबीवीपी का मानना है कि कुछ राजनीतिक हितों और समाज विरोधी तत्वों ने छात्रों के जायज आंदोलन की आड़ में अराजकता और हिंसा फैलाने की कोशिश की. एबीवीपी इसकी कड़ी निंदा करती है.”
संगठन ने अपने बयान में आगे कहा कि “छात्रों के असली मुद्दों का समाधान बातचीत, पारदर्शिता और संस्थागत सुधारों के जरिए होना चाहिए.” संगठन ने इस हिंसक टकराव को “दुर्भाग्यपूर्ण” बताया.
एबीवीपी ने मोदी सरकार से प्रतियोगी परीक्षाओं में पारदर्शिता और संस्थागत सुधार सुनिश्चित करने के लिए एक उच्च स्तरीय समिति बनाने की मांग भी की. संगठन ने कहा कि छात्रों को संकीर्ण राजनीतिक हितों या देश विरोधी साजिशों का साधन नहीं बनने दिया जाएगा.
बयान में कहा गया, “एबीवीपी मांग करती है कि भारत सरकार एक उच्च स्तरीय समिति बनाए, जो प्रतियोगी परीक्षाओं की ईमानदारी, पारदर्शिता और ज़रूरी संस्थागत सुधारों की गहराई से समीक्षा करे और तय समय में ठोस सुझाव दे, ताकि परीक्षा प्रणाली ज्यादा भरोसेमंद और जवाबदेह बन सके.”
एबीवीपी का यह बयान ऐसे समय आया है, जब नीट परीक्षा पेपर लीक को लेकर देशभर के छात्रों और अभिभावकों में गुस्सा है और जंतर-मंतर पर प्रदर्शन हो रहे हैं.
संगठन ने कहा, “ऐसी गलत कोशिशें भारत विरोधी ताकतों, यानी तथाकथित ‘डीप स्टेट’ जैसी शक्तियों को मजबूत करती हैं, जो लंबे समय से भारत की आंतरिक स्थिरता, अखंडता, संप्रभुता और एकता को कमजोर करने और समाज में विभाजन पैदा करने का मौका तलाशती रही हैं. भारत का छात्र समाज जागरूक है, देश के प्रति समर्पित है और लोकतांत्रिक मूल्यों में विश्वास रखता है. वह खुद को राजनीतिक खेल, बाहरी प्रभाव या देश विरोधी साजिशों का हिस्सा नहीं बनने देगा.”
एबीवीपी ने छात्रों, युवाओं, अभिभावकों, शिक्षकों, शिक्षा विशेषज्ञों और समाज के सभी लोगों से अपील की कि वे छात्रों के असली मुद्दों के समाधान के लिए शांतिपूर्ण, सकारात्मक और लोकतांत्रिक माहौल बनाए रखें. साथ ही राजनीतिक भड़कावे और देश विरोधी साजिशों से बचें.
संगठन ने प्रदर्शन में घायल हुए छात्रों और सुरक्षा कर्मियों के प्रति भी संवेदना जताई और उम्मीद व्यक्त की कि भविष्य में ऐसी घटनाएं दोबारा नहीं होंगी.
एबीवीपी के राष्ट्रीय महामंत्री वीरेंद्र सिंह सोलंकी ने कहा, “नीट-यूजी समेत कई प्रतियोगी परीक्षाओं में हुई गड़बड़ियों ने देशभर के लाखों छात्रों की चिंता बढ़ा दी है. एबीवीपी शुरुआत से ही इन जायज मुद्दों पर छात्रों के साथ खड़ी रही है. छात्रों की सही मांगों को संकीर्ण राजनीतिक हितों के लिए इस्तेमाल करना, छात्रों के हितों के साथ अन्याय है.”
उन्होंने आगे कहा, “छात्र शक्ति का इस्तेमाल किसी राजनीतिक दल के एजेंडे को आगे बढ़ाने या भारत की एकता, अखंडता और सामाजिक सद्भाव के खिलाफ काम करने वाली ताकतों के हित में नहीं होने दिया जा सकता.”
उन्होंने कहा, “ऐसी भटकाने वाली कोशिशें अप्रत्यक्ष रूप से भारत विरोधी ताकतों, यानी तथाकथित ‘डीप स्टेट’ जैसी शक्तियों को मजबूत करती हैं, जो लंबे समय से भारत की आंतरिक स्थिरता और संप्रभुता को कमजोर करना चाहती हैं. छात्रों की असली चिंताओं का समाधान सिर्फ सार्थक बातचीत, संवेदनशीलता और संस्थागत सुधारों के जरिए ही होना चाहिए.”
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