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Saturday, 9 May, 2026
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विजय ने रील्स, सीटियों और फैन एडिट्स को राजनीतिक जीत में बदल दिया

TVK ने रोज़गार, बेहतर शासन और युवा-केंद्रित राजनीति के वादों के साथ युवाओं को अपने साथ जोड़ा; उसने पुरानी सरकारों को 'पुराने ज़माने का' बताया, और साथ ही तमिल गौरव और बंटवारे वाली नीतियों के विरोध की भावना को भी जगाया.

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चेन्नई: विजय ने दशकों तक फिल्मों में भ्रष्ट नेताओं को हराया, गरीबों को बचाया और चरमराई हुई व्यवस्थाओं को खत्म किया. तमिलनाडु में मतगणना के दिन लाखों वोटरों ने उन्हें असल जिंदगी में यह करने का मौका दे दिया.

ऐसे राज्य में जहां “एक्टर-मुख्यमंत्री” मॉडल नया नहीं है, अभिनेता-राजनेता विजय ने वह कर दिखाया जिसे कई लोग असंभव मानते थे. उनकी पार्टी तमिलगा वेत्री कझगम (TVK) ने 2026 तमिलनाडु विधानसभा चुनाव में 108 सीटें जीतकर दशकों से चली आ रही DMK-AIADMK की पकड़ तोड़ दी और राज्य की सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी. शुरुआत में उन्हें “तीसरी ताकत” माना जा रहा था, लेकिन विजय ने वहां सफलता हासिल की जहां कमल हासन जैसे सितारे असफल रहे थे. उन्होंने अपने फैन बेस को बड़े स्तर पर वोटों में बदल दिया.

विजय राजनीति में उस संगठनात्मक ताकत के बिना आए, जो पहले के अभिनेता-राजनेताओं जैसे एमजी रामचंद्रन के पास थी, जिन्होंने AIADMK बनाने से पहले कई साल DMK में बिताए थे. विजय के पास कोई राजनीतिक प्रशिक्षण नहीं था, न कैडर बेस और न ही कोई पारिवारिक राजनीतिक नेटवर्क. फिर भी जबरदस्त फैन फॉलोइंग, सत्ता विरोधी माहौल, युवाओं द्वारा सोशल मीडिया पर चलाया गया अभियान और भ्रष्टाचार व अन्याय से लड़ने वाले मसीहा की उनकी सावधानी से बनाई गई फिल्मी छवि के दम पर उन्होंने अपने पहले ही चुनाव में तमिलनाडु की राजनीति का नक्शा बदल दिया.

तमिलनाडु की जमी हुई द्रविड़ राजनीति की दोध्रुवीय व्यवस्था को तोड़ने, करूर भगदड़ विवाद और निजी विवादों के बावजूद टिके रहने और यह साबित करने के लिए कि सोशल मीडिया के दौर में भी बड़े फिल्मी स्टार को मजबूत चुनावी ताकत में बदला जा सकता है, थलपति विजय और तमिलगा वेत्री कझगम (TVK) इस हफ्ते के ThePrint न्यूज़मेकर बने हैं.

जनता के हीरो

विजय को अपनी रैलियों में भीड़ जुटाने के लिए कभी संघर्ष नहीं करना पड़ा, क्योंकि लोग उनकी स्टार पावर की वजह से खुद ही पहुंच जाते थे. तमिलनाडु में उनकी लोकप्रियता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि TVK उम्मीदवार वीएस बाबू, जिन्होंने पूर्व मुख्यमंत्री एमके स्टालिन को हराया, उन्होंने कोलाथुर सीट पर विजय के हमशक्ल के साथ प्रचार किया.

लेकिन जब उनकी राजनीतिक रैलियां तमाशे जैसी बनने लगीं, तब 27 सितंबर 2025 को करूर भगदड़ ने TVK के सामने मुश्किल खड़ी कर दी, जिसमें 41 लोगों की मौत हो गई. विजय कई घंटों तक नजर नहीं आए और बाद में X पर बयान जारी किया. फिर 30 सितंबर को उन्होंने पीड़ित परिवारों के लिए वीडियो संदेश पोस्ट किया. इस घटना को संभालने में लापरवाही, रैली में देरी और संगठनात्मक कमजोरी को लेकर TVK पर आरोप लगे, लेकिन कुछ ही महीनों में पार्टी की सभाओं ने फिर गति पकड़ ली.

फिर फरवरी 2026 में विजय की पत्नी संगीता सोर्नालिंगम ने 27 साल की शादी के बाद तलाक की अर्जी दाखिल की. उन्होंने विजय पर एक महिला अभिनेत्री के साथ संबंध, मानसिक प्रताड़ना, उपेक्षा और 2021 से अलग रहने का आरोप लगाया. विजय ने इसे नजरअंदाज किया और मार्च की शुरुआत में त्रिशा के साथ एक शादी में नजर आए.

भारत जैसे बेहद पारंपरिक समाज में, जहां विवाहेतर संबंधों को स्वीकार नहीं किया जाता, वहां भी फिल्म स्टार विजय को लोगों ने काफी हद तक माफ कर दिया और उनके फैंस ने उनका बचाव किया.

उनकी आखिरी फिल्म ‘जना नायकन’ की रिलीज में देरी, सेंसर बोर्ड में राजनीतिक रूप से संवेदनशील कंटेंट को लेकर महीनों तक अटकना और बाद में मद्रास हाई कोर्ट में मामला पहुंचना भी उनके फैंस की सहानुभूति जुटाने में काम आया.

विजय के सामने जो भी मुश्किल आई, उन्होंने उसका सामना अपने खास अंदाज में किया.

और इस स्टार पावर के पीछे, जहां सब कुछ माफ और भुला दिया जाता है, विजय का वह राजनीतिक प्रचार था जो उन्होंने 15 साल पहले अपनी फिल्मों के जरिए शुरू किया था. ‘मर्सल’ (2017), ‘सरकार’ (2018), ‘बिगिल’ (2019) और ‘काठी’ (2014) जैसी फिल्मों में उन्हें हमेशा अन्याय, भ्रष्टाचार और टूटी हुई व्यवस्था से लड़ने वाले जनता के हीरो के रूप में दिखाया गया. यह संदेश मनोरंजन के साथ राजनीतिक शिक्षा भी दे रहा था.

इन फिल्मों ने हर उम्र के लोगों को भावनात्मक रूप से जोड़ा और उन्हें घर-घर का लड़का बना दिया. इसी ने TVK के लिए जरूरी सांस्कृतिक, भावनात्मक और जनाधार तैयार किया, जिसे उन्होंने 2024 में बनाया.

विक्रवांडी में अपने पहले राज्य सम्मेलन में विजय ने सिनेमा को राजनीतिक जागरूकता का माध्यम बताते हुए उसका जोरदार बचाव किया, जब आलोचकों ने उन्हें “कूथाडी” यानी लापरवाह अभिनेता कहा.

उन्होंने कहा, “मुझे ही अकेले ‘कूथाडी’ नहीं कहा गया. MGR और NTR को भी ऐसा कहा गया था. फिल्में सिर्फ गाने और डांस नहीं होतीं. यह सामाजिक बदलाव का माध्यम हैं. क्या DMK भी इसी तरह नहीं बढ़ी थी? ‘कूथाडी’ कोई गाली या अपमान नहीं है. ‘कूथू’ मूल्यों, राजनीति और सच की बात करेगा.”

तमिलनाडु में “बदलाव” की जरूरत और TVK का संदेश

विजय का BJP और DMK के खिलाफ रुख साफ था. उन्होंने TVK को हिंदुत्व की राजनीति और परिवारवाद के खिलाफ खड़ी पार्टी के रूप में पेश किया.

द्रविड़ राजनीति की पुरानी व्यवस्था को लेकर लोगों में गहरी थकान थी और युवा वोटर पुरानी विचारधाराओं से लगातार दूर होते जा रहे थे.

विजय की खुद के दम पर आगे बढ़ने वाली छवि का राज्य में बड़ा प्रतीकात्मक असर पड़ा, जहां लंबे समय से परिवार आधारित राजनीति हावी रही है. लोगों ने उन्हें ऐसे व्यक्ति के रूप में देखा जिसने जनता की सेवा के लिए अपना सफल फिल्मी करियर छोड़ दिया.

विक्रवांडी सम्मेलन में विजय ने कहा, “मैंने आपके लिए अपना करियर छोड़ दिया है और कई संघर्षों को पार करके यहां आया हूं. मैं आपके भरोसे के साथ आपके विजय के रूप में यहां खड़ा हूं.”

विजय के लिए लोगों का प्यार काफी गहरा है. समर्थक उन्हें साफ छवि वाला, परिवारवादी राजनीति से दूर और सच में जनता के लिए समर्पित मानते हैं.

TVK की एक रैली के दौरान इरोड की रहने वाली सरोजा ने कहा, “वह मेरे बेटे जैसे हैं. वह करोड़ों कमाते हैं, लेकिन अगर उन्होंने यह सब हमारे लिए और जनता की सेवा के लिए छोड़ दिया है, तो हमारा नैतिक कर्तव्य है कि हम उनका समर्थन करें.”

युवा, फैन कल्चर और सोशल मीडिया मशीन

DMK और AIADMK दोनों ने विजय को बहुत हल्के में लिया. उन्होंने TVK को कुछ समय का सेलिब्रिटी क्रेज बताकर खारिज किया और समर्थकों को “थरकुरी” यानी अनपढ़ तक कहा. उन्होंने सवाल उठाया कि क्या फैंस वोटर बन सकते हैं और विजय की सीमित जमीनी मौजूदगी को मुद्दा बनाया. यही उनकी सबसे बड़ी गलती साबित हुई. TVK ने उत्तर और पश्चिम तमिलनाडु के पारंपरिक गढ़ों में सेंध लगा दी, जहां लोगों ने स्थानीय उम्मीदवारों को ठीक से जाने बिना भी विजय के नाम पर वोट दिया.

अगर द्रविड़ राजनीति पारंपरिक पार्टी कैडर पर टिकी थी, तो TVK सोशल मीडिया के जरिए बढ़ी, जो बाद में जमीन पर समर्थन में बदल गई. इंटरनेट दौर के युवाओं (18 से 35 साल) ने चुनाव के आखिरी चरण में “विजय बनाम व्यवस्था” वाले नैरेटिव को मीम्स, रील्स और इन्फ्लुएंसर पोस्ट के जरिए तेजी से फैलाया. यह सहज, लोगों से जुड़ा और तेजी से शेयर होने वाला अंदाज नई राजनीतिक संस्कृति की पहचान बन गया.

TVK ने रोजगार, बेहतर शासन और युवाओं पर केंद्रित राजनीति के वादों के जरिए युवाओं को जोड़ा. पार्टी ने पुरानी सरकारों को पुराने दौर की राजनीति बताया और तमिल गौरव व विभाजनकारी राजनीति के खिलाफ खड़े होने की बात की.

मतगणना के दिन जीत के बाद विजय ने कहा, “हमने कहा था कि यह चुनाव भारतीय राजनीति को हिला देने वाला होगा और कई मायनों में यह सच साबित हुआ है. कई कारणों में से एक बड़ा कारण वे बच्चे रहे जिन्होंने अपने विश्वास के दम पर अपने परिवारों को रास्ता दिखाया.”

अब विजय के सामने अगली चुनौती 234 सदस्यीय विधानसभा में बहुमत हासिल करने की है. वह दो सीटों से पीछे हैं. तमिलनाडु के राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ आर्लेकर ने अभी तक उन्हें सरकार बनाने का न्योता नहीं दिया है.

विचार निजी हैं.

(इस लेख को अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें)


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