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Saturday, 9 May, 2026
होमदेशहिमाचल की छठी क्लास की किताब में ट्रांसलेशन की गलती, किन्नौर बना ‘ट्रांसजेंडर’, मंडी बना ‘मार्केट’

हिमाचल की छठी क्लास की किताब में ट्रांसलेशन की गलती, किन्नौर बना ‘ट्रांसजेंडर’, मंडी बना ‘मार्केट’

विवाद इस सत्र में शुरू की गई किताब के अंग्रेज़ी एडिशन को लेकर है. यह मामला ऐसे समय में सामने आया है, जब AI और मशीन से किए गए अनुवाद के खतरे और सीमाओं पर चर्चा बढ़ रही है.

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शिमला: हिमाचल प्रदेश सरकार की छठी क्लास की किताबों में किन्नौर को ‘ट्रांसजेंडर’ और मंडी को ‘मार्केट’ लिख दिया गया. जिलों के नाम को सही रूप में रखने के बजाय उनका गलत अनुवाद कर दिया गया, जिसके बाद हज़ारों किताबें वापस मंगाई गई हैं.

यह मामला ऐसे समय में सामने आया है, जब हिमाचल प्रदेश सरकार शिक्षा के बेहतर स्तर का दावा कर रही है और सरकारी स्कूलों में अंग्रेज़ी मीडियम की पढ़ाई को बड़े सुधार के रूप में पेश कर रही है.

विवाद हिमाचल प्रदेश स्कूल शिक्षा बोर्ड (HPBOSE) की अंग्रेजी माध्यम की किताब “Himachal ki Lok Sanskriti aur Yog” को लेकर है, जिसे इस शैक्षणिक सत्र में स्कूलों में शुरू किया गया था.

हिमाचल प्रदेश स्कूल शिक्षा बोर्ड (HPBOSE) ने मामले में रिपोर्ट मांगी है. बोर्ड के सचिव विशाल शर्मा ने बयान में कहा कि जो किताबें बांटी जा चुकी थीं, उन्हें वापस ले लिया गया है और अब किताबों को दोबारा छापने का फैसला किया गया है.

बोर्ड के रिकॉर्ड के मुताबिक, कक्षा 6 के लिए 65,000 किताबें छापी गई थीं.

अधिकारियों के अनुसार, यह किताब कई साल पहले हिंदी में तैयार की गई थी. बाद में राज्य सरकार ने सरकारी स्कूलों में चरणबद्ध तरीके से अंग्रेज़ी मीडियम शुरू किया, जिसके बाद इसका अंग्रेज़ी ट्रांसलेशन कराया गया.

किताब का अनुवाद ऐसा लगता है जैसे हिंदी से सीधे मशीन के जरिए अंग्रेज़ी में किया गया हो, जिसकी वजह से कई शर्मनाक और संदर्भ से बाहर गलतियां हो गईं.

सबसे बड़ी गलती में, किताब के पेज 16 और 37 पर किन्नौर जिले का अनुवाद “ट्रांसजेंडर” कर दिया गया.

यह गलती शायद “किन्नर” शब्द की वजह से हुई, जो एक दूसरे संदर्भ में ट्रांसजेंडर समुदाय के लिए इस्तेमाल होता है, लेकिन किताब में इसका मतलब साफ तौर पर हिमाचल प्रदेश के जनजातीय जिले किन्नौर से था.

इसी तरह मंडी जिले का अनुवाद सीधे “मार्केट” कर दिया गया.

हिमाचल प्रदेश में जिलों के गठन या विलय से जुड़े एक बहुविकल्पीय सवाल में अंग्रेज़ी एडिशन में बिलासपुर, कांगड़ा, कुल्लू, डलहौजी और “ट्रांसजेंडर” लिखा गया, जबकि वहां किन्नौर होना चाहिए था.

हिंदी मीडियम की किताब में सही तरीके से किन्नौर लिखा गया है, जिससे साफ है कि गलती ट्रांसलेशन के दौरान हुई.

AI ट्रांसलेशन को लेकर बढ़ी चिंता

यह विवाद ऐसे समय में सामने आया है, जब दुनिया भर में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और मशीन पर जरूरत से ज्यादा निर्भरता के खतरे और सीमाओं पर चर्चा बढ़ रही है.

कक्षा 6 के छात्रों के लिए बनाई गई किताबों में मशीन बेस्ड ट्रांसलेशन जैसी गलती सामने आने के बाद हिमाचल प्रदेश में टीचर्स, पैरेंट्स और एक्सपर्ट्स चिंता जता रहे हैं.

इस विवाद ने शिक्षा व्यवस्था में क्वालिटी चैक, एडिटिंग और जवाबदेही को लेकर भी बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं.

सामाजिक कार्यकर्ता राजेश शर्मा ने कहा कि इस मामले को सिर्फ छोटी गलती कहकर नज़रअंदाज़ नहीं किया जा सकता.

उन्होंने कहा, “टाइपिंग की गलतियां फिर भी मानी जा सकती हैं, लेकिन यह गलती नहीं है. यह गंभीर लापरवाही है. जिन लोगों को पढ़ाई का कंटेंट तैयार करना था, उन्होंने अपना काम ठीक से नहीं किया.”

उन्होंने आगे कहा कि सरकार को अपनी शैक्षणिक समीक्षा और प्रकाशन व्यवस्था में बदलाव करना चाहिए, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाएं दोबारा न हों.

उन्होंने कहा, “सरकार को व्यवस्था बदलनी चाहिए, ताकि आगे ऐसी चीज़ें न हों. स्कूल की किताबें सामान्य दस्तावेज नहीं होतीं. बच्चे उन्हें सही ज्ञान का स्रोत मानते हैं.”

किताब में हुई गलतियां सोशल मीडिया और शैक्षणिक हलकों में तेज़ी से फैल गईं, जिसके बाद लोगों ने इसकी आलोचना भी की और मज़ाक भी उड़ाया.

शिक्षाविदों ने चेतावनी दी कि इस मामले को सिर्फ मज़ाक तक सीमित नहीं रखना चाहिए.

शिमला के एक स्कूल प्रिंसिपल ने कहा, “यह एक गंभीर संस्थागत विफलता को दिखाता है. जिलों के नाम का ट्रांसलेशन होना ही नहीं चाहिए था. अगर इतनी बुनियादी गलतियां प्रूफरीडिंग, एडिटिंग और मंजूरी के बाद भी रह गईं, तो बाकी कंटेंट पर भी सवाल उठना लाज़मी है.”

कई शिक्षकों ने निजी तौर पर यह चिंता भी जताई कि पर्याप्त शैक्षणिक तैयारी, प्रशिक्षित अनुवादक और भाषा विशेषज्ञों के बिना अंग्रेज़ी मीडियम को तेज़ी से लागू करने के बड़े असर हो सकते हैं.

अब इस विवाद के बाद यह जांच तेज हो गई है कि ट्रांसलेशन का काम बाहर की एजेंसी को दिया गया था या बिना सही मानवीय जांच के पूरा कर लिया गया.

रिटायर्ड स्कूल प्रिंसिपल डॉ. अशोक ठाकुर ने दिप्रिंट से कहा, “सरकार अब गलत किताबों को बदल सकती है, लेकिन यह सवाल पीछे छोड़ गई है कि अगर जिलों के नाम जैसी बुनियादी गलतियां सिस्टम से बच गईं, तो छात्रों को दी जा रही बाकी पढ़ाई की सामग्री कितनी भरोसेमंद है?”

(इस रिपोर्ट को अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें)

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