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Monday, 19 October, 2026
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न बॉनी एम, न क्वीन—मोदी-शाह की BJP Gen Z के बारे में क्या नहीं समझ पा रही

जब नेता अपने ‘FOMO’ की वजह से ‘clock’ या ‘flex’ करते हैं या ‘OGs’ की बात करते हैं, तो यह ‘delulu’ राजनीति जैसा लगता है—Gen Z इसे अपनी जगह में दखल के तौर पर देख सकती है.

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दो हफ्ते पहले भारतीय जनता पार्टी (बीजेप) के अध्यक्ष नितिन नवीन ने युवाओं तक पहुंच बनाने के तरीकों पर पार्टी के युवा नेताओं के साथ चार घंटे तक चर्चा की. नए नियुक्त भारतीय जनता युवा मोर्चा प्रमुख हेमांग जोशी और उनके तीन पूर्ववर्ती—तेजस्वी सूर्या, पूनम महाजन और अनुराग ठाकुर से लेकर केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया और राजस्थान की उपमुख्यमंत्री दीया कुमारी तक, बैठक में शामिल 44 लोगों में से ज्यादातर ने अपनी राय रखी.

‘Gen Z’ शब्द का इस्तेमाल नहीं किया जाना था. वहां मौजूद लोगों ने इसकी जगह ‘छात्र’ और ‘युवा’ शब्दों का इस्तेमाल किया. किसी ने कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) का ज़िक्र नहीं किया और न ही युवा प्रदर्शनकारियों की आलोचना की. सिर्फ पश्चिम बंगाल BJYM प्रमुख और सांसद सौमित्र खान ने शिकायत की कि मंत्री उनकी “बात नहीं सुनते”. इसके अलावा चर्चा का मुख्य मुद्दा युवाओं से जुड़ना था. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी उनकी राय जानना चाहते थे, यह केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव की मौजूदगी से साफ था, जो लगातार नोट्स ले रहे थे.

यह पता नहीं है कि नवीन ने इस बैठक से क्या समझा. तीन दिन बाद उन्होंने रूसी राजदूत डेनिस अलीपोव के साथ अपनी मुलाकात का एक वीडियो लिंक पोस्ट किया, जिसके बैकग्राउंड में बॉनी एम का ‘Rasputin’ गाना बज रहा था.

नवीन ज़ाहिर तौर पर जेन ज़ी को प्रभावित करने की कोशिश कर रहे थे. उन्हें इस बात की परवाह नहीं थी कि इतिहास की किताबों में सम्राट निकोलस II के दरबार में रासपुतिन की भूमिका के बारे में क्या लिखा है. बीजेपी अध्यक्ष ने गाने के बोलों पर भी ध्यान नहीं दिया, जिसमें रासपुतिन को “रूसी रानी का प्रेमी” और “रूस की सबसे बड़ी लव मशीन” बताया गया है.

कुछ दिनों बाद वडोदरा में एक युवा कार्यक्रम में पीएम मोदी ने शानदार अंदाज़ में एंट्री की और बैकग्राउंड में क्वीन का ‘We Will Rock You’ बज रहा था. जैसा कि कॉलमनिस्ट तवलीन सिंह ने द इंडियन एक्सप्रेस में लिखा, “अच्छी बात है कि सिर्फ धुन बजाई गई. अगर उन्हें बोलों के बारे में पता होता, तो मोदी शायद बेहोश हो जाते.”

गाने के बोल कुछ इस तरह हैं:

“Buddy, you’re an old man, poor man
Pleading with your eyes, gonna make you some peace someday
You got mud on your face, big disgrace
Somebody better put you back into your place.”

(“दोस्त, तुम बूढ़े आदमी हो, गरीब आदमी हो
अपनी आंखों से विनती कर रहे हो, किसी दिन तुम्हें थोड़ी शांति मिलेगी
तुम्हारे चेहरे पर कीचड़ है, बड़ी बेइज्जती है
किसी को बेहतर होगा कि वह तुम्हें वापस तुम्हारी जगह पर रखे.”)

ब्रिटिश रॉक बैंड का 1977 का यह गाना बजाना ज़ाहिर तौर पर पीएम मोदी को ‘कूल’ दिखाने और जेन ज़ी को पसंद आने के लिए किया गया था. 1978 में आया बॉनी एम का गाना भी नवीन के लिए यही काम करने के लिए बजाया गया था.

जेन ज़ी किस बात को लेकर चिंतित है

यहां एक समस्या है: जेन ज़ी इन गानों से खुद को जोड़ नहीं पाती. ये गाने बहुत पुराने दौर के हैं. मैंने अपने पुराने दोस्त सार्थक को फोन किया, जो Fever 104 FM के फेमस रेडियो जॉकी (RJ) हैं. वह ढाई दशक से ज्यादा समय से रेडियो शो कर रहे हैं और जेन ज़ी की संगीत पसंद के बारे में काफी कुछ जानते हैं.

उन्होंने कहा, “उन्हें पता ही नहीं है कि Freddie Mercury (Queen के मुख्य गायक) कौन हैं. वे ‘We Will Rock You’ का संदर्भ नहीं समझते.”

और क्या उन्हें रॉक पसंद है?

सार्थक ने कहा, “वे नहीं करते. जब उन्होंने ओटीटी पर स्ट्रेंजर थिंग्स देखा तो उन्होंने मेटालिका को फिर से खोजा, लेकिन जब रेसिज़्म और सेक्सिज़्म के पुराने आरोप सामने आए, तो उन्होंने उन्हें कैंसल करना शुरू कर दिया. जेन ज़ी को बहुत सारा हिप हॉप, बहुत सारा पॉप पसंद है. वे लॉन्ग फॉर्म नहीं सुन रहे हैं; उन्हें 30-सेकंड के हुक्स पसंद हैं. यह सोशल मीडिया के साथ हॉर्मोन का मिक्स है.”

उनके मुताबिक, नेताओं को सबसे जरूरी बात यह समझनी चाहिए कि जब बड़े लोग म्यूज़िक या किसी और चीज़ में जेन ज़ी की पसंद की नकल करने की कोशिश करते हैं, तो जेन ज़ी “angsty” हो जाती है. उन्होंने कहा, “उन्हें लगता है कि आप उनकी जगह में दखल दे रहे हैं.”

यह नेताओं के लिए बहुत काम की सलाह है. जब वे ‘FOMO’ की वजह से ‘clock’ या ‘flex’ करते हैं या ‘OGs’ की बात करते हैं, तो यह ‘delulu’ पॉलिटिक्स है, क्योंकि जेन ज़ी इसे अपनी जगह में दखल के तौर पर देख सकती है. दो जेन ज़ी बच्चों के पिता के तौर पर और कभी-कभी उनके दोस्तों की दुनिया की झलक पाने वाले व्यक्ति के रूप में, मैं उन नेताओं के लिए ‘क्या नहीं करना चाहिए’ की लिस्ट में कुछ और बातें जोड़ सकता हूं, जिनकी इस पीढ़ी को लुभाने की बेताब कोशिशें सिर्फ उनकी नासमझी को दिखाती हैं.

सबसे पहले, उन्हें भाषण मत दीजिए और यह सोचकर उन्हें “माफ” मत कीजिए कि वे ‘misguided’ हैं और आप उनसे ज्यादा जानते हैं. उन्हें अपने आसपास हो रही चीज़ों की काफी अच्छी जानकारी है और स्थानीय, राष्ट्रीय या अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर उनकी अपनी मजबूत राय है. इसलिए जब गृह मंत्री अमित शाह कहते हैं कि 2029 तक एनडीए द्वारा शासित सभी 21 राज्यों में यूनिफॉर्म सिविल कोड (यूसीसी) लागू कर दिया जाएगा, तो जेन ज़ी के मन में कई सवाल हैं. हाल ही में एक युवा ने मुझसे पूछा, “उन्हें लिव-इन रिलेशनशिप से क्या दिक्कत है? यह सरकार का काम क्यों है?” मैंने उसे महिलाओं को धोखाधड़ी से बचाने और कानूनी जवाबदेही तय करने को लेकर बीजेपी नेताओं की दलीलें समझाने की कोशिश की, लेकिन वह सहमत नहीं हुआ. इस पीढ़ी के कई लोग वेजिटेरियन और वीगन हो सकते हैं, लेकिन उन्हें यह अच्छा नहीं लगता कि सरकार तय करे कि उन्हें क्या खाना चाहिए और क्या नहीं. आपको लग सकता है कि संस्कृत किसी भी विदेशी भाषा से बेहतर है, लेकिन तीन-भाषा पॉलिसी की आड़ में उनसे उनकी पसंद का अधिकार मत छीनिए.

मैं जो कहना चाहता हूं वह यह है कि सिर्फ नीट पेपर लीक, हमारा एजुकेशन सिस्टम या रोज़गार के मौकों की कमी ही जेन ज़ी को angsty नहीं बना रही है. ये मुद्दे उनके लिए महत्वपूर्ण हैं, लेकिन उनकी चिंताएं इससे कहीं बड़ी हैं. वे भी आपकी और मेरी तरह आज़ादी, ह्यूमन राइट्स, ग्रामीण और शहरी इंफ्रास्ट्रक्चर, अस्पतालों में आग लगने से नवजात बच्चों की मौत और पानी के दूषित होने से होने वाली मौतों को लेकर चिंतित हैं. सिर्फ उनकी भाषा बोलना काफी नहीं है. युवाओं को लुभाने के लिए Boney M या Queen के गाने बजाना दिखाता है कि हमारे नेता जेन ज़ी की दुनिया से कितने दूर हैं.

सत्ताधारी पार्टी असली मुद्दा नहीं समझ रही

शायद सत्ताधारी पार्टी इस दूरी को समझ रही है. अगर ऐसा नहीं होता, तो वह वडोदरा में राहुल गांधी के ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम की नकल करने की कोशिश नहीं करती. राहुल गांधी वही विपक्षी नेता हैं, जिनका बीजेपी हमेशा मज़ाक उड़ाती रही है. यह बात उस तरीके से भी साफ है, जिस तरह राज्यों में बीजेपी की सरकारें सीजेपी के ‘School Theek Karo’ अभियान पर प्रतिक्रिया दे रही हैं.

राजस्थान सरकार ने माना है कि 611 स्कूलों की अपनी कोई इमारत नहीं है. सरकार ने स्कूलों के बुनियादी ढांचे को फिर से बनाने के लिए 12,500 करोड़ रुपये का रोडमैप भी घोषित किया है. महाराष्ट्र सरकार ने शिक्षा विभाग के अधिकारियों को “mission mode” में काम करने का निर्देश दिया है, ताकि स्कूलों को गोद लेने में विधायक और एमपी की भागीदारी सुनिश्चित हो, कैंपस को आधुनिक बनाने में कॉरपोरेट की भागीदारी हो और छात्रों के पोषण और स्वास्थ्य पर ज्यादा ध्यान दिया जाए.

उत्तर प्रदेश सरकार ने करीब 40,000 प्राथमिक और माध्यमिक स्कूलों के लिए 14 बिंदुओं की एक चेकलिस्ट जारी की है. इसमें बुनियादी ढांचे और साफ-सफाई से जुड़े मानक शामिल हैं. हरियाणा सरकार ने स्कूलों में मौजूद 2,814 असुरक्षित ढांचों को गिराने का आदेश दिया है. यह अच्छी बात है कि सरकारें इन मुद्दों को लेकर जाग गई हैं. लेकिन आखिरी बार हमने बीजेपी को विपक्ष के अभियानों पर इतनी तेज़ी से प्रतिक्रिया देते हुए कब देखा था?

यह अच्छी बात है कि छात्रों और युवाओं को अपने साथ जोड़ने के लिए बीजेपी जिस तरह प्रतिक्रिया दे रही है, वह देखने को मिल रहा है. सत्ताधारी पार्टी की यही सबसे अच्छी बात है. वह किसी भी चीज को संयोग पर नहीं छोड़ती. आज जेन ज़ी पर उसका पूरा ध्यान होना अपने आप में गलत नहीं है, लेकिन वह असली मुद्दे को नहीं समझ रही है. जेन ज़ी की नाराज़गी सरकार के कामकाज में बड़ी कमियों का नतीजा है. मोदी सरकार को अपने 13वें साल में शासन व्यवस्था को पूरी तरह नए सिरे से बदलने की जरूरत है.

डीके सिंह दिप्रिंट में पॉलिटिकल एडिटर हैं. उनका एक्स हैंडल @dksingh73 है. यह लेख उनके निजी विचार हैं.

(इस लेख को अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें)


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