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Saturday, 16 May, 2026
होममत-विमत2024 की खामियां दूर नहीं हुईं, इसलिए फिर लीक हुआ NEET पेपर; NTA अब भी समस्याओं से आंखें मूंद रही है

2024 की खामियां दूर नहीं हुईं, इसलिए फिर लीक हुआ NEET पेपर; NTA अब भी समस्याओं से आंखें मूंद रही है

जिन छात्रों ने लीक पेपर के लिए 5 लाख रुपये दिए और जिन छात्रों ने सही कोचिंग के लिए 5 लाख रुपये खर्च किए, उन्होंने एक जैसी परीक्षा नहीं दी. यही असली घोटाला है.

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जब नीट-यूजी 2024 पूरी तरह बिगड़ गया—67 छात्रों ने टॉप रैंक हासिल की, परीक्षा की सुबह बिहार में पेपर लीक गिरोह का खुलासा हुआ, परीक्षा होने के अगले ही दिन यूजीसी-नेट को रद्द कर दिया गया—तब सरकार ने वही किया जो सरकारें करती हैं. उसने डायरेक्टर जनरल को हटा दिया. एक हाई-लेवल कमेटी बनाई. नया कानून पास किया. वादे किए.

राधाकृष्णन कमेटी ने अपनी रिपोर्ट में एनटीए में ढांचागत सुधार की सिफारिश की. संसद ने पब्लिक एग्जामिनेशन (प्रिवेंशन ऑफ अनफेयर मीन्स) एक्ट पास किया, जिसमें संगठित गड़बड़ी के लिए 10 साल तक की जेल का प्रावधान है. एनटीए को नए सुरक्षा प्रोटोकॉल मिले, प्रश्न पत्र ले जाने के लिए जीपीएस से ट्रैक होने वाले वाहन लगाए गए, एआई बेस्ड सीसीटीवी, परीक्षा केंद्रों पर 5G जैमर और उम्मीदवारों की बायोमेट्रिक जांच शुरू हुई. लेकिन परीक्षा रद्द नहीं हुई.

दो साल बाद, 3 मई को नीट-यूजी 2026 आयोजित हुई. ऊपर बताए गए सभी इंतजाम लागू थे. नौ दिन बाद परीक्षा रद्द कर दी गई.

410 सवालों वाला एक दस्तावेज व्हाट्सऐप पर घूम रहा था—कुछ छात्रों को यह परीक्षा से 42 घंटे पहले मिला, जबकि कुछ के पास यह एक महीने पहले से था. कथित तौर पर करीब 120 सवाल असली केमिस्ट्री और बायोलॉजी पेपर से मेल खाते थे. राजस्थान स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप (SOG) ने देहरादून, सीकर और झुंझुनूं के 13 संदिग्धों से पूछताछ की. कथित तौर पर पेपर की कॉपी 20 हज़ार रुपये से लेकर 5 लाख रुपये तक में बेची जा रही थी.

एनटीए ने मामला सीबीआई को सौंप दिया. एनटीए के डायरेक्टर जनरल, जिन्हें परीक्षा से कुछ दिन पहले ही नियुक्त किया गया था, ने परीक्षा प्रक्रिया की पारदर्शिता और बड़े स्तर की तारीफ वाला अपना लिंक्डइन पोस्ट डिलीट कर दिया.

अब 22 लाख से ज्यादा छात्र नई परीक्षा तारीख घोषित होने का इंतज़ार कर रहे हैं.

इसी वजह से एनटीए इस हफ्ते दिप्रिंट का न्यूज़मेकर है.

नज़रअंदाज़ किया गया पैटर्न

एनटीए को 2017 में इसलिए बनाया गया था क्योंकि भारत की परीक्षा प्रणाली बिखर चुकी थी. राज्य स्तर की प्रवेश परीक्षाएं पेपर लीक और फर्जी उम्मीदवारों का दूसरा नाम बन चुकी थीं. एनटीए का वादा था केंद्रीकरण, पेशेवर व्यवस्था और तकनीक. एक एजेंसी, एक मानक, और शिक्षा मंत्रालय के प्रति जवाबदेही.

लेकिन एनटीए ठेकेदारों का समन्वयक बनकर रह गई. यह प्रश्न पत्र छपाई, भौतिक वितरण, परीक्षा केंद्र प्रबंधन, बायोमेट्रिक जांच और रिजल्ट प्रोसेसिंग जैसे काम बाहरी निजी कंपनियों को सौंपती है. हर काम अलग निजी वेंडर करता है, और किसी एक संस्था की पूरी जवाबदेही नहीं होती. जब कुछ गलत होता है और बार-बार गलत हुआ है, तो जिम्मेदारी ठेकेदारी की इस लंबी कड़ी में खत्म हो जाती है, सुधार होने से पहले ही.

दिसंबर 2025 की संसदीय स्थायी समिति की रिपोर्ट में पाया गया कि 2024 में एनटीए द्वारा आयोजित 14 बड़ी परीक्षाओं में से कम-से-कम पांच में गंभीर समस्याएं थीं—पेपर लीक, सवालों में गलतियां, रिजल्ट में देरी. यह किसी एजेंसी का खराब साल नहीं है. यह ऐसी एजेंसी है जिसकी बुनियादी समस्या का सही समाधान कभी नहीं किया गया.

राधाकृष्णन कमेटी ने इसे साफ देखा और कहा भी. खुद की क्षमता विकसित करो. वेंडरों पर निर्भरता कम करो. राज्य स्तर पर समन्वय ढांचा बनाओ. परीक्षा केंद्रों को मतदान केंद्रों की तरह संभालो. बहुत साधारण सिफारिशें. लेकिन ज्यादातर लागू नहीं हुईं.

एनटीए में दो साल से कम समय में तीन अलग-अलग डायरेक्टर रहे हैं. ऐसी स्थिति में संस्थाएं सुरक्षा संस्कृति या संस्थागत याददाश्त नहीं बना पातीं. जिस डायरेक्टर ने 12 मई को अपना लिंक्डइन पोस्ट हटाया, उसे एक टूटी हुई व्यवस्था मिली थी, जिसे समझने का उसके पास समय ही नहीं था.

5 लाख रुपये में क्या मिलता है

नकल के इस पूरे नेटवर्क की अर्थव्यवस्था को समझना ज़रूरी है. यही बताता है कि 10 साल की जेल वाला कानून भी क्यों काम नहीं कर पाया. 5 लाख रुपये में बिकने वाला गेस पेपर, उससे कम कीमत पर भी, इतना पैसा पैदा कर देता है कि कानूनी जोखिम को झेला जा सके—खासतौर पर तब, जब नए कानून के तहत सजा की दर सिर्फ 5 से 10 प्रतिशत मानी जा रही हो.

जांच एजेंसियां जिसे अब नियमित रूप से “एग्जाम माफिया” कहती हैं, वह कुछ मौकापरस्त लोगों का समूह नहीं है. यह एक संगठित नेटवर्क है, जिसके संबंध कोचिंग सेंटरों, पेपर बनाने वालों और कई राज्यों में फैले वितरण नेटवर्क से हैं. राजस्थान, झारखंड, बिहार, गुजरात—हर एनटीए घोटाले की भौगोलिक तस्वीर एक जैसी है क्योंकि हर जगह वही नेटवर्क काम करते हैं.

2026 का पेपर लीक अचानक नहीं हुआ. यह उसी सिस्टम से निकला, जिसने 2024 जैसी स्थिति पैदा करने वाली वजहों को खत्म ही नहीं किया.

संस्थागत विफलता और ढांचागत सुधार की हर चर्चा के पीछे एक 17 साल का छात्र है, जिसने परीक्षा हॉल में तीन घंटे बैठने के लिए अपनी जिंदगी के दो साल लगाए.

नीट भारत के हर मेडिकल कॉलेज में दाखिले का एकमात्र रास्ता है. छात्रों के पास दूसरा विकल्प या बैकअप मौका नहीं होता. परिवार कर्ज लेते हैं. बच्चे 15 साल की उम्र में घर छोड़कर कोटा के हॉस्टलों में रहने चले जाते हैं. जब परीक्षा देने के बाद उसे रद्द कर दिया जाता है, तो यह राज्य और युवाओं के बीच सबसे बुनियादी भरोसे का टूटना है.

जिन छात्रों ने लीक पेपर के लिए 5 लाख रुपये दिए और जिन छात्रों ने सही कोचिंग के लिए 5 लाख रुपये खर्च किए, उन्होंने एक जैसी परीक्षा नहीं दी. यही असली घोटाला है.

सीबीआई जांच करेगी. गिरफ्तारियां होंगी. शायद एक और कमेटी बनाई जाएगी. एनटीए अपनी ईमानदारी और पारदर्शिता को लेकर बयान जारी करेगी और 22 लाख छात्र इंतजार करेंगे—नई तारीख का, नई परीक्षा का, और ऐसे सिस्टम का जो आखिरकार वही करे जो वह कहता है.

व्यक्त किए गए विचार निजी हैं.

(न्यूज़मेकर को अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें)


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