Monday, 27 June, 2022
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‘कब मिलेंगे समान अधिकार’: पद्मश्री वीरेंद्र सिंह ने फिर की पैरा-एथलीट्स के दर्जे की मांग, सरकार ने ये कहा

हरियाणा स्पोर्ट्स एंड यूथ अफैयर्स के निदेशक पंकज नैन ने कहा कि वीरेंद्र सिंह राज्य के खेल विभाग में पहले से ही काम कर रहे हैं और उन्हें ग्रुप बी की पोस्ट ऑफर की गई थी जिसे लेने से उन्होंने मना कर दिया था.

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नई दिल्ली: पद्मश्री से सम्मानित और बधिर ओलंपिक खेलों में भारत के लिए कई गोल्ड मेडल लाने वाले हरियाणा के वीरेंद्र सिंह ने एक बार फिर से पैरा खिलाड़ियों का दर्जा देने की मांग उठाई है.

दिप्रिंट से अपने हालिया ट्वीट को वीरेंद्र सिंह ने साझा किया जिसमें उन्होंने सरकार से समान अधिकार मांगा है. उनकी मांग है कि उनके जैसे राज्य के मूक-बधिर खिलाड़ियों को पैरा-एथलीट्स का दर्ज दिया जाए.

उन्होंने कहा, ‘माननीय मुख्यमंत्री श्री मनोहर लाल खट्टर जी क्या मैं पाकिस्तान से हूं. कब बनेगी कमेटी, कब मिलेंगे समान अधिकार. माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी, जब मैं आपसे मिला, आपने की कहा था हम आपके साथ अन्याय नहीं होने देंगे, अब आप ही देख लो.’

दिप्रिंट ने ट्विटर पर मैसेज के जरिए गूंगा पहलवान के नाम से मशहूर वीरेंद्र सिंह से पूछा कि आपकी सरकार से और क्या मांगे हैं, आप क्या बदलाव चाहते हैं और सरकार ने आपसे क्या कहा है, लेकिन इस पर उन्होंने कुछ नहीं बताया.

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हालांकि हरियाणा के स्पोर्ट्स एंड यूथ अफैयर्स के निदेशक आईपीएस अधिकारी पंकज नैन ने ट्वीट कर कहा कि वीरेंद्र सिंह राज्य के खेल विभाग में पहले से ही काम कर रहे हैं और उन्हें ग्रुप बी की पोस्ट ऑफर की गई थी जिसे लेने से उन्होंने मना कर दिया था.

पंकज नैन ने अपने ट्वीट में कहा, ‘वीरेंद्र सिंह को हरियाणा सरकार की तरफ से 1.2 करोड़ रुपए कैश दिया गया है, जो कि देश में सबसे ज्यादा है.’

उन्होंने कहा, ‘इस मामले को देखने के लिए कमेटी पहले से ही बन चुकी है जिसमें पूर्व ओलंपिक खिलाड़ी और पैरालंपिक मैडेलिस्ट हैं, जो जल्द ही अपनी रिपोर्ट देगी.’

नैन ने कहा कि बाकी सभी ओलंपिक और पैरालंपिक खिलाड़ियों की तरह वीरेंद्र हमारे स्टार खिलाड़ी हैं. उन्होंने कहा, ‘हमें उनपर गर्व है.’

उन्होंने कहा कि देश में सबसे अच्छी खेल नीति हरियाणा की है और अगर किसी बदलाव की जरूरत होगी तो सभी स्टेकहोल्डर्स के साथ मिलकर ऐसा किया जाएगा.

पंकज नैन के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए वीरेंद्र सिंह ने कहा, ‘माननीय पंकज नैन जी, वर्ष 2016, 2017 में गोल्ड मेडल जीतने पर हरियाणा सरकार ने 8 करोड़ की घोषणा की थीं, और A ग्रेड की नौकरी, मिला क्या जो आपने लिखा… वर्ष 2015 में जूनियर कोच लगाया था, और आज भी जूनियर कोच हूं, शायद इसलिए मैं सुन-बोल नहीं सकता.?’

वीरेंद्र सिंह की मांग का पैरा-बैडमिंटन खिलाड़ी मानसी जोशी ने समर्थन किया. उन्होंने कहा, ‘सभी एथलीट्स के साथ समानता हो.’

 

बता दें कि विंटर पैरालंपिक्स 4 मार्च 2022 से लेकर 13 मार्च 2022 तक चीन में होने वाले हैं.


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पहले भी कर चुके हैं मांग

पिछले साल नवंबर में भी वीरेंद्र सिंह ने दिल्ली स्थित हरियाणा भवन के बाहर प्रदर्शन किया था और मूक-बधिर खिलाड़ियों को पैरा-एथलीट्स के दर्जे की मांग की थी. जिसके बाद हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर ने उन्हें न्याय का आश्वासन दिया था.

वीरेंद्र सिंह ने भारत के लिए कई मेडल जीते हैं. 35 वर्षीय सिंह ने 2005, 2013, 2017 के बधिर ओलंपिक खेलों में गोल्ड मेडल जीता और 2009 में ब्रॉन्ज मेडल जीता था.

2015 में उन्हें खेल के लिए मिलने वाला प्रतिष्ठित सम्मान अर्जुन अवार्ड से सम्मानित किया गया था वहीं उन्हें राजीव गांधी खेल पुरस्कार भी मिल चुका है.

पिछले साल राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने उन्हें पद्मश्री से सम्मानित किया था.

वीरेंद्र सिंह के जीवन पर गूंगा पहलवान नाम से 2014 में एक डॉक्यूमेंट्री भी बनी है जिसमें उनके संघर्ष को दिखाया गया है. इस डॉक्यूमेंट्री को राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार भी मिला है.


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