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Tuesday, 22 September, 2026
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काशी विश्वनाथ, सोमनाथ मंदिर ने तिरुमला के मैनेजमेंट मॉडल को अपनाने की तैयारी शुरू की

दोनों मंदिरों के प्रतिनिधिमंडलों ने श्रद्धालुओं के अनुभव को बेहतर बनाने के लिए TTD की भीड़ संभालने की व्यवस्था, बड़े किचन और चढ़ावे के मैनेजमेंट का अध्ययन किया है.

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हैदराबाद: काशी विश्वनाथ मंदिर और गुजरात का सोमनाथ मंदिर तिरुमला तिरुपति देवस्थानम (TTD) के मंदिर प्रशासन के एक साथ काम करने वाले मॉडल को अपनाना चाहते हैं. मंदिर प्रशासन के सूत्रों ने दिप्रिंट को बताया कि वे भीड़ और दूसरी व्यवस्थाओं को बेहतर बनाने के लिए ऐसा करना चाहते हैं.

दोनों मंदिरों के वरिष्ठ प्रतिनिधिमंडल आंध्र प्रदेश के तिरुपति जिले में स्थित मंदिर गए हैं. वहां उन्होंने तिरुमला में AI की मदद से भीड़ संभालने की व्यवस्था, हर दिन लाखों श्रद्धालुओं को खाना खिलाने वाली बड़ी रसोई की तकनीक और गिनती कक्ष में पैसों के मैनेजमेंट के बारे में जानकारी ली.

TTD बोर्ड के सदस्य भानु प्रकाश रेड्डी ने दिप्रिंट को बताया, नया काशी विश्वनाथ धाम प्रधानमंत्री के संसदीय क्षेत्र में होने के कारण बहुत महत्वपूर्ण है. इसी वजह से उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 7 सितंबर को खुद एक विस्तृत प्रस्तुति में हिस्सा लिया था.

रेड्डी ने कहा, “हमारे मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू ने खुद यूपी के मुख्यमंत्री को बताया कि TTD के डिजिटल सिस्टम की तरह काम करने वाले इंटीग्रेटेड कमांड एंड कंट्रोल सेंटर (ICCC) की क्या भूमिका है. योगी जी को दिखाया गया कि कैसे एक साथ जुड़े डैशबोर्ड और व्यवस्थित प्रशासनिक मॉडल ने प्रसादम के मामले के बाद मंदिर के मैनेजमेंट में बड़ा बदलाव लाने में मदद की.”

रेड्डी ने बताया कि दोनों मंदिरों की शुरुआती यात्राएं पहले ही पूरी हो चुकी हैं. अब टीमों से कहा गया है कि वे सालाना ब्रह्मोत्सवम (मंदिर के सालाना उत्सव) और नवरात्रि के बाद तिरुमला जाएं.

तेलुगु देशम पार्टी के नेता चंद्रबाबू नायडू के नेतृत्व वाली आंध्र प्रदेश सरकार ने सितंबर 2024 में लड्डू प्रसादम बनाने में मिलावटी घी के इस्तेमाल के आरोप सामने आने के बाद मंदिर की व्यवस्था में बड़े बदलाव करने के लिए कई सुधार लागू किए.

TTD ने मंदिर परिसर के अंदर एक केंद्रीय कंट्रोल रूम बनाया, जहां पूरे मंदिर शहर में लगाए गए हजारों CCTV कैमरों से आने वाले डेटा का विश्लेषण किया जाता है.

भीड़ संभालने का मॉडल

काशी विश्वनाथ मंदिर और गुजरात के सोमनाथ मंदिर के वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी इसी मॉडल का अध्ययन कर रहे हैं.

गुजरात के पूर्व मुख्य सचिव और सोमनाथ मंदिर के सचिव और ट्रस्टी पी.के. लाहेरी ने दिप्रिंट से इसकी पुष्टि की कि वे TTD के मॉडल का अध्ययन कर रहे हैं.

उन्होंने कहा, “सोमनाथ मंदिर ट्रस्ट ने जनवरी में मंदिर के 1,000 साल तक बचे रहने और उसकी आध्यात्मिक विरासत को सम्मान देने के लिए सोमनाथ स्वाभिमान पर्व मनाया था. इसी दौरान हमने TTD की भीड़ संभालने की व्यवस्था का अच्छी तरह अध्ययन किया और इसे लागू करना भी शुरू कर दिया है. हम यह समझना चाहते थे कि बहुत बड़ी भीड़ को कैसे संभाला जाए — मंदिर में करोड़ों की संख्या में आने वाले लोगों को कैसे व्यवस्थित किया जाए, ताकि भगदड़ जैसी स्थिति से बचा जा सके और कतारों की रफ्तार को भी उसी हिसाब से बदला जा सके.”

TTD के अधिकारियों और तिरुमला मंदिर में इंटीग्रेटेड कमांड एंड कंट्रोल सेंटर बनाने वाली कंपनी कार्य फाउंडेशन ने बताया कि सेंसर लगे एंट्री सिस्टम से सुरक्षा सेवाओं के साथ बेहतर तालमेल बनाकर संकट आने से पहले भीड़ को संभालने में मदद मिलती है.

अमेरिका में रहने वाले कारोबारी और समाजसेवी जयप्रसाद वेजेंदला के सहयोग से कार्य फाउंडेशन ने तिरुमला तिरुपति देवस्थानम के साथ मिलकर ICCCT को दान देने, बनाने और लागू करने का काम किया.

कार्य फाउंडेशन के इंडिया लीड विशाल राव ने बताया कि उनके सहयोगियों और TTD के वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों को काशी बुलाया गया था, ताकि वे शहर की व्यवस्थाओं और उसकी भौगोलिक स्थिति को समझ सकें.

विशाल ने दिप्रिंट से कहा, “तिरुमला के उलट, जो पहाड़ी के ऊपर बसा और सुरक्षित शहर है, काशी एक व्यस्त शहर है, जहां मंदिर के आसपास कारोबारी और रिहायशी गतिविधियां होती हैं. इसके अलावा, विश्वनाथ मंदिर में तिरुमला के मुकाबले आने-जाने के कई रास्ते हैं. इसलिए यहां की चुनौतियां अलग हैं.”

उन्होंने आगे कहा, “इसके अलावा, शुरुआत में एक ही गेट से मस्जिद और मंदिर जाने वाले श्रद्धालु इकट्ठा होते हैं. इसलिए काशी के हिसाब से भीड़ की रफ्तार में रुकावट आने वाली जगहों का पहले से अनुमान लगाकर बेहतर भीड़ प्रबंधन की योजना बनानी होगी.”

TTD के सूत्रों ने बताया कि भीड़ संभालने के अलावा मंदिर के मैनेजमेंट के दूसरे पहलुओं, जैसे हुंडी यानी दान पेटी को संभालने की व्यवस्था, के बारे में भी उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री को जानकारी दी गई.

विशाल ने कहा, “विचार यह है कि प्रशासन में मनमाने तरीके से काम करने की गुंजाइश न रहे और अधिकारियों तथा मंदिर प्रशासकों के पास सभी व्यवस्थाओं को सही तरीके से चलाने की पूरी क्षमता हो. तिरुपति ने भारत के धार्मिक केंद्रों को आधुनिक बनाने के लिए एक मानक तय किया है. यह मॉडल श्रद्धालुओं की पूरी यात्रा के हर हिस्से को भी आसान और व्यवस्थित बना सकता है.”

(इस रिपोर्ट को अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें)


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