लखनऊ, 30 अक्टूबर (भाषा) उत्तर प्रदेश विधान परिषद के खंड शिक्षक एवं स्नातक निर्वाचन क्षेत्रों की 11 सीटों के नतीजों ने सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और समाजवादी पार्टी (सपा) दोनों को 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले अपनी-अपनी राजनीतिक ताकत का दावा करने का मौका दिया है।
भाजपा ने छह सीटें जीतकर प्रदेश में अपना दबदबा बरकरार रहने की बात कही, जबकि सपा ने अपनी सीटों की संख्या तीन से बढ़ाकर पांच करने को विपक्ष के लिए उत्साहजनक संकेत बताया है।
सपा ने इस चुनाव में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के संसदीय क्षेत्र वाराणसी की दोनों सीटें जीतकर भाजपा को बड़ा झटका दिया है।
सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने शुक्रवार को सभी विजयी उम्मीदवारों को पार्टी कार्यालय बुलाकर उनकी जीत का उल्लेख किया।
उन्होंने भाजपा छोड़कर सपा में आए गोरखपुर के नेता डॉक्टर संजयन त्रिपाठी को भी आमंत्रित किया, जो चुनाव में तीसरे स्थान पर रहे थे।
प्रदेश भाजपा अध्यक्ष पंकज चौधरी ने कहा, ”भाजपा ने अपनी सीटें बरकरार रखी हैं। उसका मत प्रतिशत भी बढ़ा है। मतपत्र की मांग करने वाले दल चुनाव लड़ने का साहस नहीं जुटा सके।”
हालांकि, उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने स्वीकार किया कि पार्टी को इससे अधिक सीटें जीतने की उम्मीद थी। उन्होंने कहा कि पार्टी इस पर मंथन करेगी।
मौर्य ने कहा, ”भाजपा को चुनाव में अधिक सीटें जीतने की उम्मीद थी। हम इस पर विचार करेंगे। अगर धांधली हुई होती तो सपा अपना खाता भी नहीं खोल पाती।”
भाजपा नेताओं ने यह भी कहा कि स्नातक और शिक्षक निर्वाचन क्षेत्रों के सीमित मतदाता आधार वाले चुनावों की तुलना विधानसभा चुनाव से नहीं की जा सकती।
पार्टी विधायक एवं पूर्व मंत्री सिद्धार्थ नाथ सिंह ने कहा, ”इस चुनाव में मतदाताओं का दायरा सीमित था। 2027 का विधानसभा चुनाव पूरी तरह अलग होगा।”
सपा ने नतीजों को पार्टी के उभार के रूप में पेश करने की कोशिश की।
गोरखपुर-फैजाबाद शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र में भाजपा के ध्रुव कुमार त्रिपाठी ने लगातार चौथी बार जीत दर्ज की। उन्होंने निर्दलीय उम्मीदवार राजीव यादव को 307 मतों से हराया। ध्रुव को 14,887 और राजीव को 14,580 मत मिले, जबकि संजयन त्रिपाठी को 9,503 मत प्राप्त हुए।
अखिलेश ने आरोप लगाया कि संजयन त्रिपाठी को चुनाव जीतने नहीं दिया गया।
संजयन ने सपा कार्यालय में स्वागत के लिए पार्टी नेतृत्व का आभार जताते हुए भाजपा पर निशाना साधा। सपा ने उन्हें अपने पाले में लाने के लिए अंतिम समय में उम्मीदवार भी बदल दिया था।
कांग्रेस ने भी नतीजों को विपक्षी गठबंधन के पक्ष में माहौल बनने का संकेत बताया। हालांकि, उसने 11 सीटों में से किसी पर भी उम्मीदवार नहीं उतारा था।
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष आराधना मिश्रा ‘मोना’ ने इसे 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले ‘इंडिया’ गठबंधन के प्रति बढ़ते जन उत्साह का प्रतिबिंब बताया।
वर्ष 2024 के लोकसभा चुनाव में सपा-कांग्रेस गठबंधन ने उत्तर प्रदेश की 80 में से 43 सीटें जीती थीं, जबकि भाजपा को 33 सीटें मिली थीं। इससे दोनों दलों के आगामी विधानसभा चुनाव में फिर साथ आने की अटकलों को बल मिला है।
भाजपा ने हालांकि विपक्ष के दावों को खारिज करते हुए अपनी चुनावी ताकत पर भरोसा जताया।
संजयन त्रिपाठी और धर्मेंद्र कश्यप जैसे नेताओं के दल बदलने के बारे में पूछे जाने पर भाजपा के एक वरिष्ठ नेता ने कहा, ”इंतजार कीजिए और देखिए। कई लोग हमारी तरफ आते दिखेंगे। एक चौंकाने वाली बात भी होगी।”
चुनाव नतीजों पर भाजपा की हालिया प्रदेश कार्यसमिति की बैठक में भी चर्चा होने की संभावना है। भाजपा के सामने संगठन का विस्तार करने, जनाधार मजबूत करने और उत्तर प्रदेश में लगातार तीसरी बार सत्ता हासिल करने की तैयारी जैसे प्रमुख मुद्दे हैं।
भाषा
चंदन मनीष सलीम रवि कांत
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