नई दिल्ली: रात के समय हवाला के जरिए एक डिफेंस PSU के अधिकारी के पुणे स्थित घर पर नकदी पहुंचाई जा रही थी. यही CBI को मिली पहली जानकारी थी. इसके बाद CBI ने पैसों का पीछा किया. इससे जांच करने वाली एजेंसी को न सिर्फ रिश्वत से जुड़े एक कथित डिफेंस कॉन्ट्रैक्ट का पता चला, बल्कि एक ऐसे बड़े नाम का भी पता चला, जिसका शुरुआती जांच में कोई जिक्र नहीं था.
नकदी पहुंचाने के दौरान ही उसे पकड़ लिया गया और मौके से कुल 1.7 करोड़ रुपये बरामद किए गए. जब CBI ने हवाला नेटवर्क के जरिए पैसों का पता लगाना शुरू किया, तो जांच में सामने आया कि ये पैसे कहां से आए थे. दिप्रिंट को मिली जानकारी के मुताबिक, पैसों का संबंध SMPP लिमिटेड के CEO और डायरेक्टर आशीष कंसल से जुड़ा पाया गया. यह कंपनी डिफेंस से जुड़े सामान बनाती है.
कंसल निजी डिफेंस सेक्टर का एक जाना-पहचाना चेहरा हैं. उन्हें इस सेक्टर के बड़े चेहरों में गिना जाता है. वह अक्सर टीवी कार्यक्रमों और सार्वजनिक आयोजनों में नज़र आते हैं. वह फेडरेशन ऑफ इंडियन चैंबर्स ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री (FICCI) की डिफेंस और होमलैंड सिक्योरिटी कमेटी के सह-अध्यक्ष भी रह चुके हैं. कंसल दूसरे देशों में जाने वाले प्रतिनिधिमंडलों का नेतृत्व भी कर चुके हैं.
सरकारी कंपनी म्यूनिशंस इंडिया लिमिटेड (MIL) के वरिष्ठ एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर अनिल कुमार के घर नकदी पहुंचने की घटना के बाद उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया. इस मामले से कथित रिश्वतखोरी के एक ऐसे मामले का भी पता चला, जो 500 करोड़ रुपये के डिफेंस कॉन्ट्रैक्ट और संवेदनशील जानकारी लीक करने से जुड़ा था.
जांच एजेंसी के एक सूत्र के मुताबिक, CBI को पहले ही सूचना मिली थी कि हवाला के जरिए बड़ी रकम कुमार के घर पहुंचने वाली है. लेकिन उस समय जांचकर्ताओं को यह नहीं पता था कि इस लेन-देन के दूसरी तरफ कौन है. पैसों को कई बिचौलियों के जरिए भेजा गया था. जांचकर्ताओं ने एक-एक कड़ी जोड़ते हुए पैसों के असली स्रोत का पता लगाया और आखिरकार कंसल तक पहुंचे.
सूत्र ने कहा, “जब हमने तलाशी के दौरान हवाला के पैसे पकड़े, तब हमें नहीं पता था कि ये कथित तौर पर कंसल ने भेजे थे. पैसे पहुंचाने वाले व्यक्ति से हमें एक सुराग मिला. उस सुराग से दूसरा सुराग मिला. हमने पीछे की तरफ पैसों का पूरा रास्ता खोजा, जब तक कि पैसे भेजने वाले का पता नहीं चल गया.”
सूत्र ने आगे कहा, “इसके बाद हमें पता चला कि कंसल ने कथित तौर पर 500 करोड़ रुपये के एक प्रोजेक्ट और संवेदनशील जानकारी से जुड़े मामले में रिश्वत दी थी.”
CBI की FIR में आरोप लगाया गया है कि कंसल 500 करोड़ रुपये के एक कॉन्ट्रैक्ट को लेकर कुमार के लगातार संपर्क में थे. इस कॉन्ट्रैक्ट के तहत कंपनी को एक साल से ज्यादा समय तक MIL को गोला-बारूद की सप्लाई करनी थी. FIR के मुताबिक, SMPP के कर्मचारी रवित कुमार तेवतिया भी इस कथित साजिश के तहत कुमार के संपर्क में थे.
सूत्र ने बताया कि जब CBI को इन बातों का पता चला, तो उसने कुमार के साथ कंपनी के CEO को भी गिरफ्तार कर लिया.
दिप्रिंट के पास मौजूद FIR के मुताबिक, CBI को जानकारी मिली थी कि कुमार कुछ निजी ठेकेदारों और सप्लायर्स के साथ मिलकर रिश्वत मांग रहे थे और ले रहे थे. इसके बदले वह उन्हें सरकारी कामों में फायदा पहुंचाने और MIL के डिफेंस प्रोडक्शन, खरीद और दूसरी रणनीतिक रूप से अहम गतिविधियों से जुड़ी संवेदनशील जानकारी देने का काम कर रहे थे.
CBI ने यह भी आरोप लगाया है कि कुमार अवैध तरीके से मिले पैसों का एक बड़ा हिस्सा अपनी पत्नी चेतनाश्री, अपने भाई हर्षवर्धन और दूसरे रिश्तेदारों के जरिए अलग-अलग जगहों पर रख रहे थे और उनका इस्तेमाल कर रहे थे. हर्षवर्धन को भी गिरफ्तार कर लिया गया है.
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