नई दिल्ली: कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के प्रवक्ता सौरव दास और आशुतोष रांका जहां प्रदर्शन की आगे की रणनीति पर चर्चा के लिए केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा से मिलने जा रहे थे, वहीं मानसून सत्र के पहले दिन हज़ारों प्रदर्शनकारी नीट पेपर लीक मामले में जवाबदेही की मांग करते हुए संसद की ओर मार्च करने लगे.
जब प्रदर्शनकारियों ने पुलिस के बैरिकेड्स तोड़कर संसद की ओर बढ़ने की कोशिश की, तो सुरक्षा बलों ने आंसू गैस के गोले छोड़े. कई प्रदर्शनकारी रायसीना रोड के गोलचक्कर को पार कर संसद परिसर की ओर बढ़ गए, लेकिन सुरक्षा कर्मियों ने उन्हें आगे जाने से रोक दिया.
पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, “हालात तनावपूर्ण हैं. बड़ी संख्या में प्रदर्शनकारी संसद की ओर बढ़े. भीड़ को पेशेवर तरीके से हटाया गया. हालांकि, प्रदर्शन में लगातार और लोग शामिल हो रहे हैं.”
सीजेपी के स्वयंसेवकों ने यह भी दावा किया कि कॉन्स्टिट्यूशन क्लब के पास भी आंसू गैस के गोले छोड़े गए.
सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक को प्रदर्शन स्थल से हटाकर सफदरजंग अस्पताल में भर्ती कराने के बाद सप्ताहांत में इस आंदोलन को और गति मिली. प्रदर्शनकारियों ने इस कार्रवाई को सरकार की “ज्यादती” और आंदोलन का “टर्निंग पॉइंट” बताया और संसद मार्च को अब तक का सबसे बड़ा शक्ति प्रदर्शन बनाने का संकल्प लिया.


पुलिस सूत्रों के मुताबिक, संसद के आसपास भारी सुरक्षा बल तैनात किए गए हैं और अतिरिक्त जवान भी बुलाए गए हैं.
सूत्रों के अनुसार, प्रदर्शनकारियों ने संसद परिसर की ओर बढ़ने की कोशिश की, लेकिन दिल्ली पुलिस और रैपिड एक्शन फोर्स (RAF) की भारी तैनाती ने उन्हें रोक दिया. हाई सिक्योरिटी इलाके में 300 से ज्यादा पुलिसकर्मी तैनात हैं. कई जगह बैरिकेडिंग, सुरक्षा जांच और दंगा-रोधी वाहन लगाए गए हैं. पुलिस पड़ोसी राज्यों से दिल्ली आने वाले प्रदर्शनकारियों की गतिविधियों पर भी नजर रख रही है.
इस बीच, हज़ारों समर्थक अलग-अलग रास्तों से पार्लियामेंट स्ट्रीट थाना जाने वाली सड़क तक पहुंचने की कोशिश करते रहे. कई जगह बैरिकेड्स लगाकर उन्हें रोका गया, लेकिन वे दूसरे रास्तों से आगे बढ़ते रहे.
हालांकि, बढ़ती भीड़ के बीच प्रदर्शनकारियों में अनिश्चितता भी थी. वे आंदोलन के भविष्य को लेकर असमंजस में थे और सरकार व सीजेपी नेतृत्व के बीच चल रही बातचीत के नतीजे का इंतज़ार कर रहे थे.
दिल्ली के 22-वर्षीय एसी रिपेयर तकनीशियन ऋषभ भी पार्लियामेंट स्ट्रीट के पास प्रदर्शन में शामिल हुए. उन्होंने कहा कि वह सरकार से जवाबदेही मांगने और शिक्षा की गुणवत्ता पर सवाल उठाने आए हैं. उन्होंने कहा, “मेरी बहन कॉलेज में बीए कर रही है और मेरा छोटा भाई छठी कक्षा में पढ़ता है. यह लड़ाई उनके भविष्य के लिए है.”
ऋषभ ने दावा किया कि आंदोलन अब और बड़ा होगा. उन्होंने आरोप लगाया कि “सादे कपड़ों में मौजूद कुछ लोग” प्रदर्शनकारियों के साथ मारपीट कर रहे थे.
उन्होंने कहा, “पुलिस ने कुछ प्रदर्शनकारियों को बांस की लाठियों से पीटा, लेकिन इससे हमारा हौसला नहीं टूटेगा. यह आंदोलन अब और बड़ा होगा.”
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