नई दिल्ली: दिल्ली हाईकोर्ट ने सोमवार को उस जनहित याचिका (PIL) पर तत्काल सुनवाई से इनकार कर दिया, जिसमें सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक को जंतर-मंतर के प्रदर्शन स्थल से हटाकर सफदरजंग अस्पताल ले जाने की कार्रवाई को चुनौती दी गई है.
मुख्य न्यायाधीश देवेंद्र कुमार उपाध्याय और न्यायमूर्ति तेजस कारिया की खंडपीठ ने कहा कि याचिकाकर्ता केवल इस कार्रवाई को गैरकानूनी घोषित कराने की मांग कर रहा है, इसलिए मामले में तत्काल सुनवाई की जरूरत नहीं है. कोर्ट ने कहा कि इस पर बुधवार को सुनवाई की जाएगी.
याचिकाकर्ता ने अदालत में कहा कि पुलिस द्वारा वांगचुक को प्रदर्शन स्थल से अस्पताल ले जाना संविधान के अनुच्छेद 14 और 19 के तहत मिले उनके मौलिक अधिकारों का उल्लंघन है. उन्होंने यह भी दावा किया कि पुलिस प्रदर्शनकारियों को परेशान कर रही है और प्रदर्शन में शामिल लोगों की सुरक्षा खतरे में है. इसलिए प्रदर्शनकारियों को संवैधानिक सुरक्षा देने की भी मांग की गई है.
हालांकि, हाईकोर्ट ने इन दलीलों के बावजूद मामले को तत्काल सूचीबद्ध करने से इनकार कर दिया.
सोनम वांगचुक लद्दाख से जुड़े संवैधानिक संरक्षण और अन्य मांगों को लेकर जंतर-मंतर पर अनिश्चितकालीन अनशन पर बैठे थे. स्वास्थ्य बिगड़ने के बाद उन्हें प्रशासन ने सफदरजंग अस्पताल में भर्ती कराया, जहां उनका इलाज और मेडिकल निगरानी जारी है.
इससे पहले 19 जुलाई को दिल्ली हाईकोर्ट की एकल पीठ ने वांगचुक को निजी अस्पताल भेजने की मांग भी खारिज कर दी थी. वहीं, इस आदेश के खिलाफ उनकी पत्नी डॉ. गीतांजलि आंगमो ने खंडपीठ में अपील दायर की है, जिस पर आज बाद में सुनवाई होनी है.