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Thursday, 4 June, 2026
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मालवीय नगर आग के बीच मालिक का दूसरा होटल भी खाली कराया गया, सिर्फ 200 मीटर दूर थी दूसरी प्रॉपर्टी

बुधवार को आग की चपेट में आए फ्लोरिश स्टेज़ की तरह, फ्लोरिश इन में ठहरे मेहमान भी पास के मैक्स अस्पताल में इलाज करा रहे थे या मरीजों के साथ आए थे. इस इलाके में यह आम बात है.

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नई दिल्ली: बुधवार को मालवीय नगर के फ्लोरिश स्टेज़ B&B में लगी आग पर काबू पाया जा रहा था, उसी दौरान उसके मालिक का दूसरा होटल—फ्लोरिश इन, जो वहां से सिर्फ 200 मीटर दूर है—चुपचाप खाली कराया जा रहा था. खुद को “मेडिकल टूरिज्म के लिए परफेक्ट ठहराव” बताने वाले इस होटल से कई विदेशी नागरिकों को निकालकर आसपास के इलाकों के होटलों में भेजा गया.

बुधवार सुबह लवकेश बजाज की पहली प्रॉपर्टी में आग लगने के बाद होटल के मेहमानों से कमरे खाली करने को कहा गया. इस हादसे में 21 लोगों की मौत हो गई और 37 लोग घायल हुए. मरने और घायल होने वालों में कई विदेशी नागरिक भी शामिल हैं. 12 घंटे की तलाश के बाद बुधवार शाम लवकेश को गिरफ्तार कर लिया गया.

पुलिस अधिकारियों के मुताबिक, होटल में ठहरे सभी लोग ऐसे थे जो मैक्स अस्पताल, साकेत में इलाज करा रहे थे. यह अस्पताल होटल से करीब 300 मीटर की दूरी पर है.

प्रेस एन्क्लेव के समानांतर चलने वाली घुमावदार सड़क पर होटल, B&B और इन स्टेज़ की भरमार है. इन जगहों ने धीरे-धीरे उन मकानों की जगह ले ली है, जहां पहले परिवार और नौकरीपेशा लोग किराए पर रहते थे. इस सड़क पर कुछ होटल कई दशक पुराने हैं, लेकिन हाल के वर्षों में यहां ऐसी व्यावसायिक प्रॉपर्टियों की संख्या बढ़ी है जो मुख्य रूप से पास के निजी सुपरस्पेशियलिटी मैक्स अस्पताल के मरीजों को ध्यान में रखकर बनाई गई हैं. लीवर ट्रांसप्लांट के लिए अस्पताल भेजे गए कई विदेशी नागरिक भी इसी इलाके हौज रानी में ठहरते हैं.

यहां मैक्स अस्पताल सबसे बड़ा आकर्षण है. कई होटलों की वेबसाइटों पर अस्पताल की तस्वीरें इतनी प्रमुखता से दिखाई जाती हैं कि कभी-कभी वे उनके अपने कमरों और सुविधाओं की तस्वीरों से भी ज्यादा दिखाई देती हैं.

संकरी गलियां ऐसे भवनों तक जाती हैं जिनकी दीवारें एक-दूसरे से जुड़ी हुई हैं. ज्यादातर इमारतों के भूतल पर मेडिकल स्टोर हैं. कुछ जगह छोटे-छोटे रेस्तरां भी हैं, जो मुख्य रूप से अफगानिस्तान, नाइजीरिया, यमन, इथियोपिया और म्यांमार से आने वाले लोगों की ज़रूरतें पूरी करते हैं.

हौज रानी में काम करने वाले ब्रोकर नदीम अहमद ने दिप्रिंट को बताया कि यह इलाका पहले युवा पेशेवरों के लिए किफायती था, लेकिन अब मकान मालिक अपने घर अस्पतालों में इलाज कराने आने वाले लोगों को देना ज्यादा पसंद करते हैं.

उन्होंने कहा, “अगर आप दो या तीन बेडरूम का मकान किराए पर देते हैं तो 13,000 से 15,000 रुपये मिलते हैं, लेकिन विदेशी नागरिकों को किराए पर देने से इससे लगभग दोगुनी कमाई हो जाती है.”

फ्लोरिश इन के बाहर लकड़ी की गाड़ी पर अपना सामान रखते हुए कियरलाइमबर्ट कुछ दस्तावेज़ हाथ में लिए खड़े थे. वह तीन महीने पहले फिलीपींस से लीवर ट्रांसप्लांट के लिए मालवीय नगर आए थे.

उन्होंने कहा, “मेरे देश के डॉक्टर ने मुझे दिल्ली जाकर लीवर ट्रांसप्लांट कराने की सलाह दी थी. उन्होंने यहां मैक्स अस्पताल के डॉक्टरों से मेरा संपर्क कराया, जिन्होंने आगे की व्यवस्था कराई.”

डॉक्टर की सलाह मानकर कियरलाइमबर्ट मालवीय नगर पहुंचे, लेकिन स्थानीय लोगों से बातचीत करने में उन्हें काफी परेशानी हुई.

उन्होंने कहा, “अस्पताल के एक व्यक्ति मुझे इस होटल में लेकर आए थे. उन्होंने मैनेजर से बात की और बताया कि मुझे कुछ महीनों के लिए कमरा चाहिए.”

कियरलाइमबर्ट ने दिप्रिंट को बताया कि उनका कमरा छोटा था और उसमें वेंटिलेशन भी नहीं था, लेकिन बुधवार सुबह तक उन्हें कोई खास चिंता नहीं थी, जब तक उन्होंने उसी गली में एक होटल को आग की चपेट में जाते नहीं देखा.

उन्होंने कहा, “जब हादसा हुआ तब मैं अस्पताल में था. करीब दोपहर 1 बजे होटल से फोन आया और बताया गया कि मेरे लिए दूसरी जगह व्यवस्था कर दी गई है और मुझे वहां शिफ्ट होना होगा.”

कुछ ही दूरी पर चुमेको बिजली के तारों के जाल के नीचे खड़ी थीं. उनके चार बुजुर्ग चाचा-चाची उनके साथ थे और उसी मालिक की दूसरी प्रॉपर्टी में आग लगने की घटना से घबराए हुए दिखाई दे रहे थे.

वे पास के एक होटल जाने के लिए ऑटो रोकने की कोशिश कर रहे थे और लोगों को अपनी बात समझाने में कठिनाई हो रही थी.

चुमेको और उनके रिश्तेदार म्यांमार से हैं. वहां के डॉक्टर ने उनकी मौसी के लीवर ट्रांसप्लांट के लिए साकेत के मैक्स अस्पताल की सलाह दी थी.

चुमेको ने कहा, “म्यांमार में यह इलाज बहुत महंगा है और डोनर मिलना भी बहुत मुश्किल होता है.”

32 साल की चुमेको सिर्फ 20 दिन पहले दिल्ली आई थीं और अगले तीन महीनों के लिए फ्लोरिश इन में दो कमरे बुक किए थे.

उन्होंने कहा, “मैक्स अस्पताल के डॉक्टर ने हमारा संपर्क एक व्यक्ति से कराया, जिसने मेरी मौसी का इलाज शुरू होने के बाद यहां कमरा दिलाने में मदद की.”

इस बीच, नाइजीरिया की रहने वाली नाजा अपने व्हीलचेयर पर बैठे पति को हौज रानी की टूटी सड़कों से ले जाने को लेकर नाराज़ दिखीं.

नाजा ने कहा, “स्थानीय ब्रोकर ने हमें बताया था कि यह इलाका रहने के लिए सुरक्षित है, लेकिन अब यहां आग लग गई और होटल मालिक ने हमें होटल खाली करने के लिए कह दिया.”

उन्होंने कहा, “दोनों होटलों के नाम और बनावट लगभग एक जैसी हैं. अगर आग यहां लगती तो हम सब मर जाते.”

यह कहते हुए वह अपने पति की व्हीलचेयर आगे बढ़ा रही थीं.

नाइजीरियाई परिवार पिछले कई महीनों से फ्लोरिश इन में रह रहा है. इसी दौरान नाजा के पति का लीवर ट्रांसप्लांट हुआ और उनका ऑपरेशन के बाद का इलाज भी चलता रहा.

(इस रिपोर्ट को अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें)


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