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Wednesday, 9 September, 2026
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बुजुर्गों की आबादी 2050 तक हो जाएगी दोगुनी, सरकार स्वास्थ्य देखभाल की तैयारी में जुटी

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नयी दिल्ली, आठ सितंबर (भाषा) बुजुर्गों की तेजी से बढ़ती आबादी भारत के लिए एक बड़ी चुनौती के साथ-साथ आर्थिक अवसर भी पेश कर रही है। सरकार बुजुर्गों के लिए स्वास्थ्य देखभाल, आवास, देखभाल सेवाओं और अन्य सहायता सुविधाओं का एक व्यापक तंत्र तैयार करने पर काम कर रही है।

सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय के सचिव सुधांशु पंत ने कहा कि आज देश की आबादी का एक बड़ा हिस्सा वरिष्ठ नागरिकों का है और उनकी संख्या बहुत तेजी से बढ़ रही है।

उन्होंने कहा, ‘‘वर्तमान में देश में वरिष्ठ नागरिकों की अनुमानित आबादी करीब 16-17 करोड़ है। अगले 20-22 वर्ष में यह संख्या दोगुनी होने की संभावना है।’’

पंत ने कहा कि चिकित्सा सुविधाओं और जीवन स्तर में सुधार के कारण जीवन प्रत्याशा में काफी वृद्धि हुई है और यह हर साल बढ़ रही है। ऐसे में बुजुर्गों की बढ़ती आबादी की अलग-अलग जरूरतों को पूरा करना जरूरी हो गया है।

सचिव ने बताया कि बेहतर स्वास्थ्य सुविधाओं तक पहुंच सुनिश्चित करने के लिए आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना (पीएम-जेएवाई) के तहत 70 वर्ष और उससे अधिक आयु के सभी वरिष्ठ नागरिकों को हर साल पांच लाख रुपये तक का मुफ्त इलाज उपलब्ध कराया जा रहा है।

उन्होंने कहा कि सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय देशभर में वरिष्ठ नागरिकों के लिए करीब 800 देखभाल गृह संचालित कर रहा है और ऐसे केंद्र संचालित करने के लिए राज्य सरकारों को भी सहायता दी जा रही है। उन्होंने बताया कि नीति में ‘डे केयर होम’ संचालित करने के प्रावधान को शामिल करने का प्रस्ताव भी विचाराधीन है।

उन्होंने कहा कि केंद्र और राज्य सरकारों के विभिन्न विभागों की ओर से वरिष्ठ नागरिकों के लिए कई योजनाएं चलाई जा रही हैं। इन सभी सुविधाओं को एक ही स्थान पर उपलब्ध कराने के लिए मंत्रालय ने ‘जीवन’ ऐप शुरू किया है।

उन्होंने कहा कि विशेष रूप से बड़े शहरों में बुजुर्गों की देखभाल के लिए प्रशिक्षित देखभालकर्ताओं की जरूरत बढ़ रही है। इसी उद्देश्य से मंत्रालय ने ‘शतायु डैशबोर्ड’ ऐप शुरू किया है, जो देखभाल की जरूरत रखने वाले बुजुर्गों और सेवा देने वाले देखभालकर्ताओं के बीच संपर्क स्थापित करने में मदद करेगा।

मंत्रालय के सचिव ने कहा कि जिन लोगों को देखभालकर्ता की जरूरत है, वे इस डैशबोर्ड के माध्यम से अपने क्षेत्र में उपलब्ध देखभालकर्ताओं की जानकारी प्राप्त कर सकते हैं और उनके साथ व्यवस्था कर सकते हैं।

बुजुर्गों की बढ़ती आबादी एक ओर जहां जनसांख्यिकीय चुनौती है, वहीं दूसरी ओर यह एक बड़ा आर्थिक अवसर भी पैदा कर रही है।

एएसएलआई-जेलएलएल की रिपोर्ट ‘भारत की सिल्वर इकोनॉमी: सीमित क्षेत्र से जरूरी क्षेत्र तक’ के अनुसार, नीतिगत समर्थन मिलने पर भारत के वरिष्ठ नागरिकों की आवास सुविधाओं से संबंधित बाजार वर्ष 2030 तक 10.1 अरब अमेरिकी डॉलर का हो सकता है। इसके लिए करीब 7.7 अरब अमेरिकी डॉलर के निवेश की जरूरत होगी।

एसोसिएशन ऑफ सीनियर लिविंग इंडिया (एएसएलआई) के अध्यक्ष राजगोपाल जी ने कहा, ‘‘भारत में बुजुर्गों की बढ़ती संख्या अब भविष्य की बात नहीं रह गई है, बल्कि यह बदलाव हमारे सामने हो रहा है। आज 60 वर्ष से अधिक आयु के भारतीयों की संख्या 16.6 करोड़ से अधिक है, जो 2050 तक दोगुनी होने का अनुमान है। ऐसे में हमें अभी से बुजुर्गों के लिए जरूरी तंत्र तैयार करना होगा।’’

जेलएलएल के वरिष्ठ प्रबंध निदेशक करण सिंह सोढ़ी ने कहा कि भारत में वरिष्ठ नागरिकों की संख्या वर्तमान में 16.69 करोड़ है, जो वर्ष 2050 तक बढ़कर 34.6 करोड़ हो सकती है।

भाषा सुभाष पवनेश

पवनेश

यह खबर ‘भाषा’ न्यूज़ एजेंसी से ‘ऑटो-फीड’ द्वारा ली गई है. इसके कंटेंट के लिए दिप्रिंट जिम्मेदार नहीं है.

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