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Tuesday, 3 November, 2026
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न्यायालय ने मरीज को ‘ब्रेन डेड’ घोषित करने की प्रक्रिया से जुड़ी याचिका पर फैसला सुरक्षित रखा

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नयी दिल्ली, तीन नवंबर (भाषा) उच्चतम न्यायालय ने मंगलवार को उस याचिका पर अपना फैसला सुरक्षित रख लिया, जिसमें किसी मरीज को ब्रेन डेड (मस्तिष्क मृत) घोषित करने की प्रक्रिया से जुड़ा मुद्दा उठाया गया है।

न्यायमूर्ति विक्रम नाथ, न्यायमूर्ति संदीप मेहता और न्यायमूर्ति अपरेश कुमार सिंह की पीठ उस याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें केरल उच्च न्यायालय के जून 2017 के एक आदेश को चुनौती दी गई है।

पीठ ने कहा, “बहस पूरी हुई। फैसला/आदेश सुरक्षित रखा गया है।”

डॉ. एस. गणपति द्वारा दायर एक याचिका में एक मरीज को ‘ब्रेन डेड’ घोषित करने में गड़बड़ी का आरोप लगाया गया है। याचिका पर सुनवाई करते हुए उच्च न्यायालय ने कहा कि वह इस मामले में आगे कोई कार्रवाई नहीं करना चाहता।

इस मामले में केंद्र और केरलम सरकार द्वारा दाखिल किए गए हलफनामों पर ध्यान दिया गया था।

उच्च न्यायालय ने कहा था, “हमें उम्मीद और भरोसा है कि केंद्र सरकार और राज्य सरकार इस मामले में अपनी जिम्मेदारी को समझेंगी और उसी के अनुसार कदम उठाएंगी।”

गणपति ने उच्च न्यायालय के आदेश को उच्चतम न्यायालय में चुनौती दी है।

मंगलवार को सुनवाई के दौरान, खुद पेश हुए गणपति ने पीठ को उस प्रक्रिया के बारे में बताया जिसके जरिए किसी मरीज को ‘ब्रेन डेड’ घोषित किया जाता है।

केंद्र की ओर से पेश हुईं अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी ने ‘ब्रेन स्टेम डेथ सर्टिफिकेशन’ पर 2026 के राष्ट्रीय दिशानिर्देशों का हवाला दिया।

भाटी ने इस मामले में अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स), नई दिल्ली की एक विशेषज्ञ समिति द्वारा सौंपी गई रिपोर्ट की ओर भी ध्यान दिलाया।

उच्चतम न्यायालय ने 28 अप्रैल को मामले की सुनवाई करते हुए एम्स में एक विशेषज्ञ समिति गठित करने का निर्देश दिया था, ताकि वह मामले की जांच कर सके और चिकित्सा विज्ञान में हुई प्रगति को ध्यान में रखते हुए उचित प्रोटोकॉल सुझा सके।

न्यायालय ने कहा था, “इस तरह की कवायद से एक मजबूत और भरोसेमंद व्यवस्था तैयार हो सकेगी, जिससे याचिकाकर्ता द्वारा जताई गई चिंताएं दूर हो सकेंगी, ये चिंताएं, कम से कम प्रथम दृष्टया, सच भी लग रही हैं।”

इसमें यह भी उल्लेख किया गया था कि याचिकाकर्ता के अनुसार, विभिन्न अस्पतालों में गंभीर हालत में भर्ती मरीजों को ‘ब्रेन डेड’ घोषित किया जा रहा था, जबकि कानून के तहत निर्धारित नैदानिक मापदंडों के आधार पर ऐसा करना उचित नहीं था।

न्यायालय ने कहा था, “याचिकाकर्ता के अनुसार, इस तरह की घोषणाएं कभी-कभी इस छिपे हुए इरादे से की जाती हैं कि प्रतिरोपण के लिए अंगों को निकालने में आसानी हो।”

याचिकाकर्ता ने यह तर्क देते हुए कि ‘ब्रेन डेड’ एक ऐसी स्थिति है जिसमें मस्तिष्क तक रक्त की आपूर्ति नहीं होती, पहले सुझाव दिया था कि मस्तिष्क की एंजियोग्राफी और ईईजी कराई जानी चाहिए।

इलेक्ट्रोएन्सेफालोग्राम (ईईजी) टेस्ट मस्तिष्क में होने वाली विद्युतीय गतिविधि को मापता है।

भाषा

प्रशांत पवनेश

पवनेश

यह खबर ‘भाषा’ न्यूज़ एजेंसी से ‘ऑटो-फीड’ द्वारा ली गई है. इसके कंटेंट के लिए दिप्रिंट जिम्मेदार नहीं है.

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