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Friday, 30 October, 2026
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देश के सामने लोकतंत्र को बचाने की चुनौती : अशोक गहलोत

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जयपुर, 30 अक्टूबर (भाषा) राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने देश के मौजूदा हालात पर चिंता जताते हुए शुक्रवार को कहा कि आज देश के सामने लोकतंत्र को बचाने की चुनौती है।

उन्होंने लोगों से कांग्रेस एवं ‘इंडिया’ गठबंधन की ओर से एक नवंबर को दिल्ली के रामलीला मैदान में प्रस्तावित ‘वोट बचाओ, देश बचाओ’ रैली में अधिक से अधिक संख्या में शामिल होने की अपील की।

यहां संवाददाताओं से बातचीत में गहलोत ने कहा कि आज एक बार फिर देश के सामने लोकतंत्र को बचाने की चुनौती है। देश के हालात को लेकर आम लोगों में गहरा आक्रोश और चिंता है। ऐसे में ‘वोट बचाओ, देश बचाओ’ रैली का विशेष महत्व है।

उन्होंने कांग्रेस के सभी पदाधिकारियों एवं कार्यकर्ताओं के साथ ही आम नागरिकों से अधिक से अधिक संख्या में दिल्ली पहुंचकर रैली में भाग लेने की अपील की। उन्होंने कहा कि लोगों को भले ही अपने साधनों से जाना पड़े, लेकिन सभी को इसमें शामिल होना चाहिए। इससे देशभर में एक संदेश जाएगा और लोकतंत्र बचाने की लड़ाई में उनकी भागीदारी सुनिश्चित होगी।

गहलोत ने केंद्र में सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) पर निशाना साधते हुए कहा कि विपक्ष की रैलियों को लेकर जानबूझकर यह भ्रम फैलाने का प्रयास किया गया कि कांग्रेस और ‘इंडिया’ गठबंधन अराजकता फैला रहे हैं।

उन्होंने कहा, ”जब भाजपा विपक्ष में थी और रैलियां करती थी, तब वह जनता के हितों की बात करती थी। आज विपक्ष रैली कर रहा है तो उसे अराजकता फैलाने वाला बताया जा रहा है। यह दोहरे मापदंड हैं।”

उन्होंने कहा कि कांग्रेस नेता राहुल गांधी और अन्य विपक्षी नेताओं ने बार-बार स्पष्ट किया है कि लोकतंत्र में सरकार केवल चुनाव के माध्यम से ही बदली जाती है। जब विपक्ष की लोकतंत्र में गहरी आस्था है तो वह अराजकता फैलाकर सरकार बदलने की कल्पना भी कैसे कर सकता है?

पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा, ”भाजपा ने जनता के बीच जानबूझकर भ्रम पैदा करने का प्रयास किया, लेकिन उसका यह प्रयास सफल नहीं हो पाया।”

गहलोत ने कहा कि ‘इंडिया’ गठबंधन की रैली हो रही है तो भाजपा को इससे क्या परेशानी है? कभी व्यापारियों को भड़काने का प्रयास किया जा रहा है तो कभी भाजपा खुद रैली कर रही है और उसके राष्ट्रीय अध्यक्ष भी रैली में जा रहे हैं।

उन्होंने कहा, ”विपक्ष की रैली का मुकाबला करने के लिए सत्ताधारी दल के नेताओं का सड़कों पर उतरना देश के लिए एक नई स्थिति है। इतिहास में पहली बार ऐसा देखने को मिल रहा है कि सत्ता में बैठे लोग विपक्ष की रैलियों का मुकाबला करने के लिए इस तरह सक्रिय हो रहे हैं।”

भाषा

पृथ्वी रवि कांत

यह खबर ‘भाषा’ न्यूज़ एजेंसी से ‘ऑटो-फीड’ द्वारा ली गई है. इसके कंटेंट के लिए दिप्रिंट जिम्मेदार नहीं है.

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