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Thursday, 14 May, 2026
होमदेशरेड फोर्ट ब्लास्ट के पीछे आतंकी मॉड्यूल 2022 में ‘ऑपरेशन हेवेनली हिंद’ के तहत बना था: NIA

रेड फोर्ट ब्लास्ट के पीछे आतंकी मॉड्यूल 2022 में ‘ऑपरेशन हेवेनली हिंद’ के तहत बना था: NIA

NIA के मुताबिक, मॉड्यूल के सदस्य अंसार गजवत-उल-हिंद से प्रभावित थे और बंद हो चुके इस संगठन को फिर से खड़ा करना चाहते थे. घातक धमाके में TATP का इस्तेमाल किया गया था.

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नई दिल्ली: पिछले साल नवंबर में रेड फोर्ट के बाहर हुए धमाके को अंजाम देने वाला आतंकी मॉड्यूल ‘ऑपरेशन हेवेनली हिंद’ नाम से बनाया गया था. यह जानकारी राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) की जांच में सामने आई है.

एनआईए के एक प्रवक्ता ने गुरुवार को कहा कि इस मॉड्यूल के सदस्य, जिनमें कट्टरपंथी सोच वाले मेडिकल प्रोफेशनल्स भी शामिल थे, एक गुप्त बैठक में मिले थे. वहां उन्होंने “लोकतांत्रिक तरीके से चुनी गई सरकार को गिराकर पूरे देश में शरिया कानून लागू करने” के मकसद से इस मॉड्यूल की शुरुआत की.

एनआईए प्रवक्ता ने बताया कि मॉड्यूल के सदस्य अंसार ग़ज़वत-उल-हिंद से प्रभावित थे और बंद हो चुके इस संगठन को फिर से शुरू करना चाहते थे.

AGuH को भारतीय उपमहाद्वीप में सक्रिय आतंकवादी संगठन अल-कायदा की भारतीय शाखा माना जाता है. यह खुद दक्षिण एशिया में अल-कायदा का हिस्सा है.

एनआईए प्रवक्ता ने कहा, “2022 में श्रीनगर में हुई एक गुप्त बैठक में आरोपियों ने तुर्की के रास्ते अफगानिस्तान जाने की असफल ‘हिजरत’ (प्रवास) के बाद AGuH आतंकी संगठन को ‘AGuH इंटरिम’ के रूप में फिर से बनाया था.”

ये जानकारी रेड फोर्ट ब्लास्ट मामले में एनआईए की 7,500 पन्नों की चार्जशीट का हिस्सा है. आतंकवाद-रोधी एजेंसी ने 10 आरोपियों के खिलाफ आरोप लगाए हैं. साथ ही आरोपी डॉ. उमर उन नबी के खिलाफ कार्यवाही बंद करने की मांग भी की है.

नबी उसी विस्फोटकों से भरी कार में मौजूद था, जो 10 नवंबर 2025 को रेड फोर्ट मेट्रो स्टेशन के पास फट गई थी. उसकी पहचान दिल्ली पुलिस स्पेशल सेल ने की थी, जिसने शुरुआत में मामले की जांच की थी. बाद में जांच एनआईए को सौंप दी गई.

एनआईए जांच में सामने आया कि मॉड्यूल के सदस्यों ने कई नए लोगों को भर्ती किया था और विस्फोटकों व रसायनों पर प्रयोग किए थे. विस्फोटक बनाने की कोशिश के तहत उन्होंने ट्रायएसीटोन ट्राइपरऑक्साइड (TATP) पर प्रयोग किए, ताकि विस्फोटक मिश्रण को बेहतर बनाया जा सके.

इसी TATP का इस्तेमाल उस धमाके में किया गया था, जिसमें 15 लोगों की मौत हुई और कई अन्य घायल हो गए. TATP एक बेहद संवेदनशील विस्फोटक है, जो दूसरे रसायनों के साथ मिलाने पर और ज्यादा खतरनाक हो जाता है.

मॉड्यूल के सदस्यों ने रॉकेट और ड्रोन से लगाए जाने वाले आईईडी पर भी प्रयोग किए थे और जम्मू-कश्मीर व भारत के दूसरे हिस्सों में सुरक्षा प्रतिष्ठानों को निशाना बनाने की योजना बनाई थी.

एनआईए प्रवक्ता ने कहा, “जांच में यह भी सामने आया कि आरोपियों ने MMO Anode, इलेक्ट्रिक सर्किट और स्विच जैसे विशेष लैब उपकरण अलग-अलग ऑफलाइन और ऑनलाइन स्रोतों से खरीदे थे.”

सभी 10 आरोपियों पर गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (यूएपीए), भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस), विस्फोटक पदार्थ अधिनियम, आर्म्स एक्ट और सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान से बचाव अधिनियम की संबंधित धाराओं के तहत आरोप लगाए गए हैं.

चार्जशीट में डॉ. उमर उन नबी के अलावा अल-फलाह मेडिकल कॉलेज के फैकल्टी सदस्य डॉ. मुजामिल शकील और उनकी पत्नी डॉ. शाहीन सईद, डॉ. आदिल अहमद राथर, शोपियां के मौलवी मुफ्ती इरफान अहमद वागे और नूंह निवासी सोयब के नाम भी शामिल हैं. सोयब को नबी को छिपाने के आरोप में गिरफ्तार किया गया था.

एनआईए प्रवक्ता ने कहा, “यह चार्जशीट जम्मू-कश्मीर, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र, गुजरात और दिल्ली-एनसीआर में फैली लंबी जांच पर आधारित है. इसमें 588 मौखिक गवाही, 395 से ज्यादा दस्तावेज और 200 से अधिक जब्त सामग्री के रूप में विस्तृत सबूत शामिल हैं.”

(इस रिपोर्ट को अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें)


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