पटना: जनशक्ति जनता दल (JJD) के राष्ट्रीय अध्यक्ष तेज प्रताप यादव को NEET-UG पेपर लीक विवाद के बीच पटना के गांधी मैदान में हुए प्रदर्शन से जुड़े मामले में 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है.
तेज प्रताप यादव के वकील जगन्नाथ सिंह ने कहा कि जमानत की अर्जी सोमवार को लगाई जा सकती है. उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि गिरफ्तारी की पूरी प्रक्रिया में कई गड़बड़ियां हुई हैं.
उन्होंने कहा, “FIR 26 जुलाई को दर्ज हुई, जबकि गिरफ्तारी 25 जुलाई की शाम 7:30 बजे सिटी सेंटर मॉल से हुई थी. मैंने अभी जज के सामने उनकी रिहाई के लिए आवेदन दिया है. उन्होंने कहा है कि सोमवार को जमानत की अर्जी लगाइए. मैं सुबह 10:30 बजे नौबतपुर थाने पहुंचा. वहां दो SP मौजूद थे. मैंने उनसे गिरफ्तारी की वजह पूछी. उनके परिवार वालों को भी नहीं पता था कि उन्हें शाम 7:30 बजे से गिरफ्तार किया गया है. हमें अभी तक FIR की कॉपी भी नहीं मिली है.”
शनिवार को बिहार पुलिस ने तेज प्रताप यादव को उस समय हिरासत में लिया था, जब वे बिहार बंद के दौरान पटना में NEET पेपर लीक के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे छात्रों के साथ शामिल हुए थे.
गिरफ्तारी पर प्रतिक्रिया देते हुए बैंकीपुर उपचुनाव में JJD की उम्मीदवार वीणा मानवी ने पुलिस कार्रवाई के समय और मंशा पर सवाल उठाए. उन्होंने आरोप लगाया कि चुनाव प्रचार शुरू होने के बाद से पार्टी नेताओं को लगातार “प्रताड़ित” किया जा रहा है. उन्होंने कहा कि बैंकीपुर विधानसभा सीट के लिए नामांकन दाखिल करने के कुछ ही देर बाद उन्हें भी गिरफ्तार कर लिया गया था.
उन्होंने कहा, “मैं कुछ नहीं कहना चाहती. 13 तारीख से हमें प्रताड़ित किया जा रहा है. पहले नामांकन वाले दिन मुझे उठा लिया गया और आज उन्हें उठा लिया गया. ऐसा लगता है कि पूरा बैंकीपुर जिला अब जनशक्ति जनता दल पर ही निर्भर हो गया है. अगर हम थोड़ा विरोध प्रदर्शन कर दें तो इसमें क्या गलत है? उन्होंने कौन सा अपराध किया? अगर बच्चों के बीच एक बार राष्ट्रीय झंडा दिखा दिया गया तो क्या वह अपराध था? और अगर आपकी नजर में अपराध था भी, तो उसी समय उन्हें पकड़ लेना चाहिए था. लेकिन जब वह शाम को परिवार के साथ समय बिता रहे थे और खरीदारी करने गए थे, तब उन्हें उठाने का क्या मतलब था? मुझे भी उनकी गिरफ्तारी की वजह नहीं पता.”
हिरासत में लिए जाते समय तेज प्रताप यादव ने प्रदर्शन कर रहे छात्रों का समर्थन किया और सरकार से उनकी मांगें पूरी करने की अपील की.
उन्होंने कहा, “बच्चों की मांगें पूरी तरह जायज हैं. सरकार को उनकी मांगें माननी चाहिए और हम पूरी मजबूती से उनके साथ खड़े हैं. मैं छात्रों और युवाओं के लिए अपनी जान देने को भी तैयार हूं.”
यह कार्रवाई ऐसे समय हुई है जब शनिवार को पटना में NEET पेपर लीक विवाद और छात्र आंदोलनकारियों के खिलाफ हाल की पुलिस कार्रवाई को लेकर कई विपक्षी दलों और सामाजिक संगठनों द्वारा बुलाए गए बिहार बंद के दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच हिंसा हुई.
पटना में प्रदर्शन के दौरान ट्रैफिक पुलिस की एक चौकी में कथित तौर पर तोड़फोड़ की गई. प्रदर्शन के दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच झड़प हो गई. पत्थरबाजी भी हुई और भीड़ को तितर-बितर करने के लिए पुलिस ने आंसू गैस के गोले छोड़े.
NEET परीक्षा से जुड़े विवाद को लेकर बिहार बंद के आह्वान के बाद पूरे बिहार में प्रदर्शन हुए. छात्र शिक्षा व्यवस्था में सुधार और परीक्षा प्रक्रिया में कथित गड़बड़ियों पर कार्रवाई की मांग कर रहे थे.
प्रदर्शनकारियों ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग की. पटना में प्रदर्शन के दौरान उन्होंने पुलिस की गाड़ियों में तोड़फोड़ की और उन्हें पलट दिया. इसके बाद प्रभावित इलाकों में पुलिस की तैनाती बढ़ा दी गई.
देशभर में NEET पेपर लीक को लेकर छात्रों के विरोध प्रदर्शन के बाद धर्मेंद्र प्रधान ने इस्तीफा दे दिया.
अपने इस्तीफे का ऐलान करते हुए धर्मेंद्र प्रधान ने कहा कि उन्होंने छात्रों के हित में और यह सुनिश्चित करने के लिए कि परीक्षा में गड़बड़ियों को लेकर चल रहे विरोध प्रदर्शन का “राष्ट्र विरोधी ताकतें” फायदा न उठा सकें, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को अपना इस्तीफा सौंप दिया है.
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने केंद्रीय मंत्रिपरिषद से धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा स्वीकार करने के बाद केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद जोशी को शिक्षा मंत्रालय की जिम्मेदारी सौंपी है.
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