नई दिल्ली: लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने शनिवार को छात्र प्रदर्शन के दौरान हुई पुलिस कार्रवाई को लेकर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह पर सीधा हमला बोला. उन्होंने आरोप लगाया कि छात्रों के खिलाफ हुई हिंसा और कथित तौर पर पेलेट गन के इस्तेमाल के लिए अमित शाह सीधे जिम्मेदार हैं. उन्होंने कहा कि यह मुद्दा संसद में प्रमुखता से उठाया जाएगा.
प्रेस कॉन्फ्रेंस में राहुल गांधी ने कहा, “हम छात्रों के खिलाफ हुई हिंसा के लिए अमित शाह को सीधे जिम्मेदार मानते हैं. उन्होंने हमारे छात्रों पर गोली चलाने की अनुमति दी. उन्होंने छात्रों के खिलाफ पेलेट गन जैसे घातक हथियारों के इस्तेमाल की अनुमति दी. हमारे लिए यह एक बुनियादी मुद्दा है. हम भारत के भविष्य पर अपनी ही सुरक्षा एजेंसियों की गोलीबारी स्वीकार नहीं करेंगे. यह संसद में बड़ा मुद्दा होगा.”
राहुल गांधी ने कहा कि छात्र प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से माफी की भी मांग कर रहे हैं. उन्होंने आरोप लगाया कि देश की शिक्षा व्यवस्था, रोजगार व्यवस्था, संस्थागत व्यवस्था और मीडिया व्यवस्था को कमजोर कर दिया गया है और यही छात्र आंदोलन की असली वजह है.
उन्होंने कहा, “देश गंभीर आर्थिक चुनौतियों का सामना कर रहा है. ऐसे समय में मजबूत संस्थाओं की जरूरत और बढ़ जाती है. सरकार को समझना चाहिए कि जो कुछ हुआ है, वह कहीं ज्यादा बड़ी समस्या की सिर्फ शुरुआत है.”
राहुल गांधी ने सरकार को चेतावनी देते हुए कहा कि छात्रों का यह आंदोलन एक बड़ा संदेश है. उन्होंने कहा कि सरकार देश को अपनी निजी जागीर की तरह नहीं चला सकती.
उन्होंने कहा, “सरकार को देश की जनता की बात सुननी होगी. यह छात्रों और विपक्ष की ओर से चेतावनी है कि भारत को इस तरह नहीं चलाया जा सकता. यह देश किसी एक व्यक्ति या सरकार की निजी संपत्ति नहीं है. यह देश भारत के लोगों और संविधान का है. अगर सरकार ने अपना रवैया नहीं बदला, तो भविष्य में इससे दस गुना बड़ा आंदोलन देखने को मिल सकता है.”
राहुल गांधी ने कहा कि केवल धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे से समस्या का समाधान नहीं होगा. उन्होंने कहा कि छात्रों की दो प्रमुख मांगें अब भी पूरी नहीं हुई हैं.
उन्होंने कहा, “हमारी शिक्षा व्यवस्था को अंदर से खोखला कर दिया गया है. इसमें गहरे सुधार की जरूरत है. छात्रों की पहली मांग है कि प्रदर्शन के दौरान हमला करने, मारपीट करने और हिंसा करने वालों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई हो और छात्रों को साफ दिखाई दे कि दोषियों को सजा मिली है. दूसरी मांग यह है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी देश के छात्रों से माफी मांगें.”
राहुल गांधी ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री पद से इस्तीफा देने वाले धर्मेंद्र प्रधान को “भ्रष्टाचार, शिक्षा व्यवस्था के पतन और अक्षमता का प्रतीक” बताते हुए कहा कि उनका जाना जरूरी था, लेकिन अब सरकार को शिक्षा व्यवस्था में ठोस सुधार करने होंगे.
उन्होंने कहा, “यह छात्रों की जीत है. भारत की शिक्षा व्यवस्था कभी हमारी ताकत थी और पूरी दुनिया इसकी सराहना करती थी. लेकिन पिछले कई वर्षों से इस पर लगातार हमला हुआ है. इसका निजीकरण किया जा रहा है और इसे कमजोर किया गया है. धर्मेंद्र प्रधान सिर्फ एक प्रतीक थे—भ्रष्टाचार, अक्षमता और शिक्षा व्यवस्था के विनाश के प्रतीक. उनका जाना जरूरी था और अच्छा हुआ कि वह गए. लेकिन अब सरकार को शिक्षा व्यवस्था बदलने के लिए ठोस कदम उठाने होंगे.”
राहुल गांधी ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) पर भी निशाना साधते हुए कहा कि “भारत की शिक्षा व्यवस्था पर RSS का बढ़ता प्रभाव भी एक बड़ा मुद्दा है. अगर इसकी जिम्मेदारी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की है, तो RSS भी उतना ही जिम्मेदार है.”
राहुल गांधी की यह टिप्पणी ऐसे समय आई है जब केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने शनिवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को अपना इस्तीफा सौंप दिया. अपने इस्तीफे में प्रधान ने कहा कि वह छात्रों के हित में पद छोड़ रहे हैं ताकि परीक्षा में कथित अनियमितताओं को लेकर चल रहे विरोध प्रदर्शनों का फायदा “राष्ट्रविरोधी ताकतें” न उठा सकें.