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Saturday, 25 July, 2026
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मोदी सरकार का एंटी-पेपर लीक बिल—दोषियों को 10 साल तक की जेल, 50 लाख रुपये तक जुर्माने का प्रस्ताव

शुक्रवार को केंद्रीय कैबिनेट से मंजूरी मिलने के बाद पब्लिक एग्जामिनेशंस (अनफेयर मीन्स की रोकथाम) संशोधन विधेयक, 2026 के सोमवार को लोकसभा में पेश होने की संभावना है.

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नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी नीत सरकार अगले हफ्ते लोकसभा में पब्लिक एग्जामिनेशंस (अनफेयर मीन्स की रोकथाम) अधिनियम, 2024 में संशोधन के लिए नया विधेयक लाने जा रही है. इसमें प्रश्नपत्र या उत्तर कुंजी (आंसर-की) लीक करने और सार्वजनिक परीक्षाओं में अन्य गड़बड़ियों में शामिल लोगों के लिए 10 साल तक की जेल और 50 लाख रुपये तक जुर्माने का प्रस्ताव है.

2024 के कानून में अधिकतम 5 साल की जेल और 10 लाख रुपये तक जुर्माने का प्रावधान था.

पब्लिक एग्जामिनेशंस (अनफेयर मीन्स की रोकथाम) संशोधन विधेयक, 2026 में यह भी प्रस्ताव है कि परीक्षा आयोजित करने वाले सर्विस प्रोवाइडर पर 5 करोड़ रुपये तक का जुर्माना लगाया जा सकेगा.

इसके अलावा, परीक्षा कराने में हुए खर्च की वसूली भी उनसे की जाएगी और उन्हें 8 साल तक किसी भी सार्वजनिक परीक्षा के आयोजन की जिम्मेदारी देने से रोका जाएगा. 2024 के कानून में यह जुर्माना 1 करोड़ रुपये और प्रतिबंध की अवधि 4 साल थी.

सर्विस प्रोवाइडर से मतलब ऐसी किसी एजेंसी, संगठन, संस्था, कंपनी, साझेदारी फर्म या एकल स्वामित्व वाली फर्म से है, जिसमें उसके सहयोगी, सब-कॉन्ट्रैक्टर और कंप्यूटर संसाधन या अन्य सामग्री उपलब्ध कराने वाले भी शामिल हैं. इन्हें सार्वजनिक परीक्षा कराने के लिए परीक्षा प्राधिकरण नियुक्त करता है.

इस कानून के दायरे में संघ लोक सेवा आयोग (UPSC), कर्मचारी चयन आयोग (SSC), रेलवे भर्ती बोर्ड (RRB), इंस्टीट्यूट ऑफ बैंकिंग पर्सनेल सिलेक्शन (IBPS), केंद्र सरकार के मंत्रालय और विभागों की भर्ती परीक्षाएं, राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) और ऐसी अन्य संस्थाओं द्वारा आयोजित सार्वजनिक परीक्षाएं आएंगी.

इस विधेयक को शुक्रवार को केंद्रीय कैबिनेट ने मंजूरी दे दी और इसे सोमवार को लोकसभा में पेश किए जाने की संभावना है.

यह संशोधित विधेयक ऐसे समय लाया जा रहा है जब नीट-यूजी पेपर लीक को लेकर हुए विरोध प्रदर्शनों के बाद शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने इस्तीफा दे दिया. इन प्रदर्शनों की वजह से 20 जुलाई से शुरू हुआ संसद का मानसून सत्र पूरी तरह ठप हो गया.

शनिवार को लोकसभा सांसदों को भेजे गए और दिप्रिंट द्वारा देखे गए संशोधित विधेयक के अनुसार, अगर जांच में यह साबित होता है कि सर्विस प्रोवाइडर कंपनी के वरिष्ठ प्रबंधन या जिम्मेदार अधिकारियों की सहमति या मिलीभगत थी, तो उन्हें 5 से 10 साल तक की जेल और 5 करोड़ रुपये जुर्माने की सजा हो सकती है. 2024 के कानून में यह सजा 3 से 10 साल की जेल और 1 करोड़ रुपये जुर्माना थी.

अगर जुर्माना नहीं भरा जाता है, तो भारतीय न्याय संहिता (BNS) के तहत अतिरिक्त जेल की सजा भी दी जाएगी.

तेज़ जांच के लिए फास्ट-ट्रैक कोर्ट

संशोधित विधेयक में धारा 12 के तहत तेज़ जांच और विशेष फास्ट-ट्रैक कोर्ट का नया प्रावधान जोड़ा गया है.

धारा 12 की दो उपधाराओं के अनुसार, पुलिस थाने में मामला दर्ज होने की तारीख से दो महीने के भीतर जांच पूरी करनी होगी. अगर मामला किसी केंद्रीय जांच एजेंसी को सौंपा जाता है, तो उसे भी रेफर किए जाने की तारीख से दो महीने के भीतर जांच पूरी करनी होगी.

ऐसे मामलों की जांच केंद्र सरकार की ओर से गठित स्पेशल टास्क फोर्स (STF) भी कर सकती है और उसे भी अधिसूचना जारी होने की तारीख से दो महीने के भीतर जांच पूरी करनी होगी.

मुकदमों का जल्दी निपटारा सुनिश्चित करने के लिए संशोधन में प्रस्ताव है कि राज्य और केंद्र शासित प्रदेश अपने-अपने मुख्य न्यायाधीशों से परामर्श कर सेशन कोर्ट को विशेष फास्ट-ट्रैक कोर्ट घोषित करेंगे, जो इस कानून के तहत आने वाले मामलों की सुनवाई करेंगे.

संगठित अपराध पर सख्त सज़ा

संशोधित विधेयक में संगठित अपराध करने वाले व्यक्ति या समूह, परीक्षा प्राधिकरण, सर्विस प्रोवाइडर या किसी अन्य संस्था के लिए 7 से 10 साल तक की जेल और 5 करोड़ रुपये तक जुर्माने का प्रस्ताव है. 2024 के कानून में यह सज़ा 5 से 10 साल की जेल और 1 करोड़ रुपये जुर्माना थी.

अगर जुर्माना नहीं भरा जाता है, तो बीएनएस के तहत अतिरिक्त जेल की सज़ा दी जाएगी.

संगठित अपराध की परिभाषा ऐसे गैरकानूनी काम के रूप में की गई है, जिसमें कोई व्यक्ति या समूह आपसी मिलीभगत और साजिश के तहत सार्वजनिक परीक्षा में गलत तरीके अपनाकर अनुचित लाभ हासिल करने की कोशिश करे.

विधेयक के उद्देश्य और कारण में कहा गया है कि पब्लिक एग्जामिनेशंस (अनफेयर मीन्स की रोकथाम) अधिनियम, 2024 सार्वजनिक परीक्षाओं में गलत तरीकों को रोकने के लिए बनाया गया था.

हालांकि, हाल के वर्षों में प्रश्नपत्र लीक और परीक्षा में गड़बड़ियों की कई घटनाएं सामने आई हैं, जिससे सार्वजनिक परीक्षा प्रणाली की पारदर्शिता और निष्पक्षता प्रभावित हुई है.

इसीलिए सार्वजनिक परीक्षा प्रणाली की निष्पक्षता को मजबूत करने, उसकी विश्वसनीयता बढ़ाने, मामलों की तेज सुनवाई और तय समय में जांच सुनिश्चित करने के लिए ये संशोधन प्रस्तावित किए गए हैं.

(इस रिपोर्ट को अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें)


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