नई दिल्ली: केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) ने 37 दिनों से जंतर-मंतर पर चल रहा अपना आंदोलन “सद्भावना के आधार पर” वापस लेने का ऐलान किया है. पार्टी का कहना है कि सरकार ने उनकी सभी प्रमुख मांगों पर सहमति जताई है.
संविधान क्लब में प्रेस कॉन्फ्रेंस करते हुए CJP के मुख्य प्रवक्ता सौरव दास ने कहा कि सरकार से हुई बातचीत के बाद तय शर्तों को समय सीमा के भीतर लागू किए जाने की समझ के साथ आंदोलन वापस लिया जा रहा है.
केंद्रीय मंत्रियों जे.पी. नड्डा और जितेंद्र सिंह के साथ तीसरे दौर की बातचीत के बाद CJP ने बताया कि सरकार ने नीट एस्पिरेंट्स की आत्महत्या करने वाले छात्रों के परिवारों को उचित मुआवजा देने और देशभर में प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज FIR वापस लेने का आश्वासन दिया है.
CJP ने सरकार के सामने शिक्षा और परीक्षा सुधार से जुड़ा पांच सूत्रीय मांग पत्र भी रखा है. इस पर चार सप्ताह बाद फिर से बैठक होगी.
पार्टी के प्रवक्ता आशुतोष रांका ने कहा कि उन्होंने नीट पीड़ित छात्रों के परिवारों के लिए 1 करोड़ रुपये मुआवजे की मांग की थी, जिसे सरकार ने स्वीकार कर लिया है. उन्होंने कहा कि सभी मांगें मान ली गई हैं, इसलिए प्रदर्शनकारियों से शांतिपूर्वक अपने घर लौटने की अपील की गई है.
सौरव दास ने कहा कि उनकी दूसरी बड़ी मांग देशभर, खासकर भाजपा और उसके सहयोगी दलों की सरकार वाले राज्यों में प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज सभी FIR वापस लेने की थी. सरकार ने इसे भी स्वीकार कर लिया है और जल्द कार्रवाई का भरोसा दिया है. सरकार ने यह भी आश्वासन दिया है कि FIR की प्रतियां तीन से चार दिनों के भीतर उपलब्ध करा दी जाएंगी और मंगलवार तक लिखित गारंटी भी दी जाएगी.
इससे पहले शनिवार को केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को अपना इस्तीफा सौंपते हुए कहा कि वह छात्रों के हित में पद छोड़ रहे हैं, ताकि देश का युवा “भ्रम के जाल” में न फंसे.
NEET-UG पेपर लीक विवाद के बाद CJP ने सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक के साथ मिलकर जंतर-मंतर पर आंदोलन शुरू किया था. यह विवाद मई में पेपर लीक के आरोपों के बाद शुरू हुआ था, जबकि दोबारा परीक्षा 21 जून को आयोजित की गई थी.
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