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Saturday, 5 September, 2026
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स्वतंत्र भारद्वाज: पटना का 21 साल का युवक कैसे बना हिंदुत्व इकोसिस्टम का डिजिटल पोस्टर बॉय

इस हफ्ते की शुरुआत में भारद्वाज ने एक पॉडकास्ट में माना कि CJP प्रदर्शन के दौरान उसने एक व्यक्ति का “सिर फोड़ दिया”, लेकिन उसके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं हुई.

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नई दिल्ली: दिल्ली में कॉलेज छात्र के तौर पर कदम रखने से पहले ही पटना के रहने वाले स्वतंत्र भारद्वाज के मन में एक साफ लक्ष्य था: हिंदुत्व इकोसिस्टम का चेहरा बनना. उसके फेसबुक और इंस्टाग्राम प्रोफाइल पर बीजेपी नेताओं के साथ उसकी तस्वीरें हैं. साथ ही भारद्वाज के वीडियो भी हैं, जिनमें वह जेंडर, आरक्षण और हिंदुत्व से जुड़ी हर तरह की बात पर अपनी राय देता नज़र आता है.

गुरुवार को उसे उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर में हिरासत में लिया गया. यह कार्रवाई दिल्ली पुलिस द्वारा एक मामले में उसके खिलाफ SC/ST (Prevention of Atrocities) Act की धाराएं लगाने के कुछ ही घंटे बाद हुई. इस मामले में उस पर 23 जुलाई को नई दिल्ली में कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के प्रदर्शन के दौरान 14 साल की दलित कंटेंट क्रिएटर के पिता पर हमला करने का आरोप है. दिल्ली पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने दिप्रिंट को बताया कि शुक्रवार देर रात भारद्वाज के खिलाफ Protection of Children from Sexual Offences (POCSO) Act के तहत एक नया मामला दर्ज किया गया.

इस हफ्ते की शुरुआत में भारद्वाज ने एक पॉडकास्ट में माना था कि उसने नाबालिग लड़की के पिता का “सिर फोड़ दिया” था, लेकिन उसके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं हुई. उसके बयान के बाद विरोध शुरू हो गया. सीजेपी और इंडियन यूथ कांग्रेस (IYC) ने शुक्रवार को दिल्ली के पार्लियामेंट स्ट्रीट पुलिस स्टेशन के बाहर प्रदर्शन किया और मांग की कि उसके खिलाफ SC/ST Act की धाराएं लगाई जाएं.

पिछले कुछ हफ्तों से भारद्वाज लगातार टीवी पैनल, इंटरव्यू और पॉडकास्ट में नज़र आ रहा है, लेकिन उसके सोशल मीडिया को करीब से देखने पर पता चलता है कि भारद्वाज ने यह खुद बनाया हुआ प्रभाव कई सालों में तैयार किया है.

उसका कंटेंट काफी हद तक हिंदुत्व और एआई से बनाए गए पोस्टरों पर आधारित है. इसमें बिहार के सीएम सम्राट चौधरी, दिल्ली के मंत्री कपिल मिश्रा और लोकसभा सांसद मनोज तिवारी समेत कई बीजेपी नेताओं के साथ उसकी तस्वीरें हैं. एक तस्वीर में वह केंद्रीय मंत्री और लोक जनशक्ति पार्टी (राम विलास) के अध्यक्ष चिराग पासवान के साथ भी दिख रहा है.

खुद दलित नेता चिराग पासवान ने शुक्रवार को भारद्वाज के काम की निंदा की और कहा कि उसके खिलाफ लगे आरोप बेहद गंभीर हैं. उन्होंने कहा, “जिस तरह एक व्यक्ति खुले तौर पर यह स्वीकार कर रहा है कि उसने किसी को इतनी बुरी तरह पीटा कि उसकी मौत भी हो सकती थी. पॉडकास्ट पर खुले तौर पर यह स्वीकार करने के बाद भी अगर उसके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं होती है, तो मेरा मानना है कि यह देश और लोगों के सामने बहुत गलत उदाहरण पेश करेगा.”

उन्होंने आगे कहा, “इस मामले की गंभीरता को समझते हुए और क्योंकि उस व्यक्ति ने कई नेताओं के नामों के साथ मेरे नाम का भी गलत इस्तेमाल किया है, मैंने भी उसके खिलाफ आधिकारिक शिकायत दर्ज की है. साथ ही, मैंने दिल्ली पुलिस से इस मामले की निष्पक्ष जांच करने की अपील की है.”

जब से भारद्वाज ने इंस्टाग्राम पर नियमित रूप से कंटेंट पोस्ट करना शुरू किया है, उसके व्यूज औसतन हर रील पर 20,000 से बढ़कर 2.5 लाख से ज्यादा हो गए हैं. वह नियमित रूप से खुद देखता है कि उसके कंटेंट की पहुंच कितनी बढ़ रही है. गुरुवार को जब उसका पॉडकास्ट तेजी से वायरल हुआ, तो उसने एक स्क्रीनशॉट शेयर किया, जिसमें भारत में एक्स पर उसका नाम 10वें नंबर पर ट्रेंड करता दिख रहा था. उसने लिखा, “Love you all virodhi.”

अलग-अलग सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर इस ‘खुद को हिंदुत्व इन्फ्लुएंसर बताने वाले’ व्यक्ति ने इंस्टाग्राम पर करीब 1.87 लाख और फेसबुक पर 3.26 लाख से ज्यादा फॉलोअर्स बना लिए हैं. ‘कट्टर हिंदू’ की इस सोशल मीडिया पहचान के पीछे पटना का 21 साल का एक छात्र है.

‘दिल्ली पुलिस में भर्ती के लिए फॉर्म मत भरो’

भारद्वाज ने पटना की डॉन बॉस्को एकेडमी से पढ़ाई पूरी की और 2022 में दिल्ली यूनिवर्सिटी में दाखिला लिया. सीजेपी के प्रदर्शनों के दौरान उसने खुद के लकड़ी की लाठियां लेकर घूमते हुए वीडियो पोस्ट किए और खुले तौर पर खुद को “असली गुंडा” बताया.

उसने ‘आर्थिक आरक्षण मोर्चा’ नाम से एक इंस्टाग्राम हैंडल भी शुरू किया. इसका मकसद आर्थिक आरक्षण के लिए अभियान चलाना और University Grants Commission (UGC) Equity Regulations, 2026 को वापस लेने की मांग करना था. सुप्रीम कोर्ट ने इन नियमों पर रोक लगा रखी है.

इस आंदोलन को आज़ाद विनोद, मोहित और अंकित कुमार जैसे ‘सनातनी’ और हिंदुत्व इन्फ्लुएंसर्स का समर्थन मिला. उन्होंने समर्थन जताने के लिए सेल्फी पोस्ट कीं.

जैसे-जैसे सोशल मीडिया पर उसकी मौजूदगी बढ़ी, वैसे-वैसे लोगों को जुटाने की उसकी क्षमता भी बढ़ी. 21 अगस्त को भारद्वाज उन लोगों में शामिल था, जिन्होंने ‘आरक्षण हटाओ आंदोलन’ के तहत जंतर-मंतर पर 300 से ज्यादा लोगों को जुटाया था.

उसकी “पहचानी जाने वाली” ऑनलाइन मौजूदगी को समर्थन मिल रहा था, लेकिन एक पॉडकास्ट में दिए उसके बयान के बाद विरोध शुरू हो गया. इसमें भारद्वाज ने कंटेंट क्रिएटर के पिता पर शारीरिक हमला करने की बात स्वीकार की.

उसे यह कहते हुए सुना जा सकता है, “मैंने उसका सिर फोड़ दिया. आपको पता है कि ऐसे मामले में कौन-सी धारा लगती है. धारा 307, आधी हत्या, लगती है. उसके सिर पर सात टांके लगे थे. वह लगभग मरने वाला था और एंबुलेंस में जा रहा था. उसकी बेटी पुलिस स्टेशन के बाहर खड़ी होकर कह रही थी कि अगर उसके पिता को न्याय नहीं मिला तो वह जहर खाकर मर जाएगी.”

वायरल हुए पॉडकास्ट में भारद्वाज बार-बार BJP नेताओं के साथ अपनी नज़दीकी का ज़िक्र करता है, जैसे वह यह बताना चाहता हो कि उसके खिलाफ कोई कार्रवाई क्यों नहीं हुई. वह कहता है, “स्वतंत्र अगले दिन बाहर था. मैं जेल भी नहीं गया. पूरी रात घूमता रहा. पूरी दुनिया को यह पता होना चाहिए.”

वह आगे कहता है, “कपिल मिश्रा मेरे बड़े भाई जैसे हैं. ये लोग (CJP) कह रहे हैं कि कपिल मिश्रा का फोन आया और मुझे छोड़ दिया गया. कपिल मिश्रा मेरे बड़े भाई हैं; चिराग पासवान मेरे बड़े भाई हैं, ये सभी. मुझे बताओ कि तुम किस नेता को जानते हो? तुम (PM नरेंद्र) मोदी जी को जानते हो? मोदी जी भी मेरे बड़े भाई हैं. मुझे सभी का समर्थन है.”

जब उससे पूछा गया कि CJP प्रदर्शनकारियों के खिलाफ इस्तेमाल की गई लाठियां उसे कहां से मिलीं, तो भारद्वाज ने अपने जूते की ओर इशारा किया. उसने कहा, “यह जूता दिल्ली पुलिस का है. हम दिल्ली पुलिस में शामिल होने के लिए फॉर्म नहीं भरते. हम अपने आप उनमें शामिल हो जाते हैं.”

दिल्ली पुलिस के डिप्टी कमिश्नर (नई दिल्ली) सचिन शर्मा ने पुष्टि की कि 23 जुलाई को भारद्वाज के खिलाफ एक शिकायत मिली थी.

गौरक्षक, इज़रायल और मुस्लिम महिलाएं

जब वह नेताओं के साथ तस्वीरें पोस्ट नहीं कर रहा होता, तब यह हिंदुत्व इन्फ्लुएंसर गौरक्षकों के साथ अपनी तस्वीरें और वीडियो पोस्ट करता है और AI से बनाई गई ऐसी तस्वीरें शेयर करता है, जिनमें इज़रायल के समर्थन का ऐलान किया जाता है.

उसके सोशल मीडिया पोस्ट देखने पर AI से बनाई गई बुर्का और अबाया पहने मुस्लिम महिलाओं की तस्वीरें भी दिखती हैं. इनके साथ ‘शकीना को पाकिस्तान नहीं जाने देंगे’ और ‘पाकिस्तान का जीजा’ जैसे विवादित कैप्शन लिखे होते हैं.

बिहार का यह इन्फ्लुएंसर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा ‘दिमागी नक्सल’ बताए गए लोगों पर नजर रखने को लेकर भी सोशल मीडिया पर खुलकर अपनी प्रतिबद्धता जताता है.

एक वीडियो में वह कहता है, “हम स्टेटमेंट वाले नहीं हैं, इलाज करने वाले हैं. दिमागी नक्सल का इलाज करना है.”

‘असली हिंदुत्व का मतलब सुर्खियों के पीछे भागना नहीं है’

हिंदुत्व इकोसिस्टम के अंदर भी स्वतंत्र भारद्वाज को लेकर अलग-अलग राय हैं.

एक दक्षिणपंथी एक्टिविस्ट, जिसने भारद्वाज के साथ आरक्षण विरोधी प्रदर्शन में हिस्सा लिया था, ने पॉडकास्ट में उसके बयान का विरोध किया.

इस एक्टिविस्ट ने नाम न बताने की शर्त पर दिप्रिंट से कहा, “स्वतंत्र उतना मशहूर नहीं है, जितना लोग उसे बता रहे हैं. मैंने उसे प्रदर्शनों में हिस्सा लेते देखा है और वह आमतौर पर यूजीसी, आरक्षण और दूसरे राष्ट्रीय मुद्दों पर बोलता है.”

उसने आगे कहा, “ईमानदार दक्षिणपंथी कार्यकर्ता उसके जैसे ‘कट्टर’ नहीं होते. पॉडकास्ट का वह वीडियो असंवेदनशील था. जो हुआ, वह नहीं होना चाहिए था. आप हमले का जश्न नहीं मना सकते और न ही इसकी शेखी बघार सकते हैं. अपराध, अपराध होता है.”

एक अन्य दक्षिणपंथी इन्फ्लुएंसर ने भारद्वाज और उसके काम को खारिज कर दिया. उसने दिप्रिंट से कहा, “ऐसे लोग सोशल मीडिया पर लाइक, कमेंट और फॉलोअर्स पाने के लिए इस तरह का कंटेंट बनाते हैं और कुछ नहीं.”

उसने आगे कहा, “असली हिंदुत्व का मतलब सुर्खियों में आने के पीछे भागना नहीं है, बल्कि ईमानदारी से काम करना है. यह काम शोर मचाकर नहीं, बल्कि चुपचाप किया जाता है.”

लेकिन IYC के एक सदस्य का कहना था कि भारद्वाज राजनीतिक नेताओं के एक वर्ग के संरक्षण की वजह से आगे बढ़ रहा है. उसने कहा, “सोशल मीडिया पर उसका जितना भी प्रभाव है, उसे दक्षिणपंथी इकोसिस्टम और सत्ताधारी पार्टी का समर्थन मिला हुआ है. वह खुले तौर पर उन नेताओं के नाम ले रहा है, जिनके साथ उसके करीबी संबंध हैं. इसका क्या मतलब है?”

IYC सदस्य ने पूछा, “जब दिल्ली पुलिस के पास गंभीर अपराध करने वालों की पहचान करने के लिए प्रदर्शन वाली जगहों पर सीसीटीवी की पूरी निगरानी है, तो यह व्यक्ति, जो महिलाओं समेत लोगों को धमकी देने वाला कंटेंट नियमित रूप से पोस्ट करता है, बिना सख्त कानूनी कार्रवाई का सामना किए कैसे घूम रहा है?”

अगर एक और हिंदुत्व इन्फ्लुएंसर की बात मानें, तो इस पूरे मामले में एक अलग कहानी भी है, जिसकी वजह से भारद्वाज मुश्किल में पड़ा. उसका दावा था कि भारद्वाज नाबालिग कंटेंट क्रिएटर और उसके पिता का विरोध इसलिए करता है क्योंकि “वह हिंदू देवी-देवताओं और साधुओं के खिलाफ आपत्तिजनक बातें करती है.”

इन्फ्लुएंसर ने दावा किया, “उसके पिता ने पहले भारद्वाज पर हमला किया था. उसने आत्मरक्षा में जवाबी हमला किया.” उसने यह भी कहा कि भारद्वाज भी घायल हुआ था. “(CJP) प्रदर्शन की शुरुआत छात्रों की असली समस्याओं के समर्थन के लिए हुई थी, लेकिन बाद में गाली-गलौज और हिंसा की वजह से इसका रास्ता बदल गया.”

(इस रिपोर्ट को अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें)


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