नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को ठग सुकेश चंद्रशेखर की उस याचिका को खारिज कर दिया, जिसमें उसने खुद को सुप्रीम कोर्ट का जज बताकर एक न्यायिक अधिकारी को प्रभावित करने की कोशिश के मामले में अपनी सजा और दोषसिद्धि पर रोक लगाने की मांग की थी.
जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस मनमोहन की पीठ ने दिल्ली हाई कोर्ट के उस आदेश में दखल देने से इनकार कर दिया, जिसमें चंद्रशेखर की दोषसिद्धि और सजा पर रोक लगाने से इनकार किया गया था.
चंद्रशेखर की ओर से वरिष्ठ वकील शोएब आलम ने दलील दी कि ट्रायल कोर्ट ने उसके खिलाफ लंबित 31 आपराधिक मामलों के आधार पर उसके चरित्र को लेकर प्रतिकूल टिप्पणियां की थीं. हालांकि, अदालत ने यह भी माना था कि इन मामलों में उसे किसी में दोषी नहीं ठहराया गया है.
आलम ने कहा कि इन टिप्पणियों का असर चंद्रशेखर के खिलाफ चल रहे दूसरे मामलों की सुनवाई पर पड़ सकता है.
उन्होंने भारतीय साक्ष्य अधिनियम की धारा 41 का हवाला देते हुए कहा, “अगर मेरे खिलाफ किसी मामले में दोषसिद्धि नहीं हुई है, तो यह बाकी सभी लंबित मुकदमों को प्रभावित कर सकता है.”
जस्टिस पारदीवाला ने चंद्रशेखर से पूछा कि वह अपनी दोषसिद्धि पर रोक क्यों चाहता है. हालांकि, पीठ को हाई कोर्ट के आदेश में दखल देने का कोई आधार नहीं मिला.
पीठ ने कहा, “याचिकाकर्ता के वकील को सुनने और रिकॉर्ड पर मौजूद सामग्री देखने के बाद हमें हाई कोर्ट के आदेश में कोई गलती नहीं मिली, कानूनी गलती तो बिल्कुल नहीं.”
पीठ ने यह भी कहा कि चंद्रशेखर के खिलाफ चल रहे बाकी सभी आपराधिक मामलों की सुनवाई स्वतंत्र रूप से और उनके अपने तथ्यों के आधार पर कानून के अनुसार होनी चाहिए.
चंद्रशेखर को 20 अगस्त को मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट की अदालत ने भारतीय दंड संहिता की धारा 170, 189 और 507 के तहत दोषी ठहराया था. ये धाराएं सरकारी अधिकारी बनकर पेश होने, सरकारी अधिकारी को धमकाने और गुमनाम तरीके से आपराधिक धमकी देने से जुड़ी हैं. उसे 29 अगस्त को सजा सुनाई गई थी.
यह मामला उन आरोपों से जुड़ा है, जिनके मुताबिक 2017 के एक भ्रष्टाचार मामले में पुलिस हिरासत के दौरान चंद्रशेखर ने एक कांस्टेबल का मोबाइल फोन हासिल कर लिया था. इसके बाद उसने आधिकारिक लैंडलाइन और मोबाइल नंबरों के जरिए एक न्यायिक अधिकारी से संपर्क किया.