नई दिल्ली: फ्लाईदुबई के पायलट स्मित मच्छर पर बुधवार को उनके को-पायलट ने चाकू से हमला किया. इसके बावजूद उन्होंने कॉकपिट का दरवाजा खोल दिया, ताकि यात्री अंदर आ सकें और दूसरे पायलट को पकड़ सकें. उनकी इस कार्रवाई से सऊदी अरब में विमान में सवार 174 यात्रियों को सुरक्षित उतारने में मदद मिली. गुरुवार सुबह भी उनकी घाटकोपर बिल्डिंग के पड़ोसी इस खबर का इंतजार कर रहे थे कि वह खतरे से बाहर हैं.
स्मित दुबई से तेल अवीव जाने वाली FZ1073 फ्लाइट के कप्तान थे. इज़रायली सूत्रों के मुताबिक, उनके को-पायलट ने विमान को क्रैश करने की कोशिश की. फ्लाइट में सफर कर रहे फ्लाईदुबई के दो रिजर्व पायलटों ने आखिरकार सऊदी अरब के तबूक में विमान को उतारा.
स्मित का अस्पताल में इलाज चल रहा है और बताया गया है कि उनकी हालत स्थिर है. उनके माता-पिता बुधवार शाम मुंबई से दुबई के लिए रवाना हुए और वहां से उन्हें सऊदी अरब जाना था. पायलट के पड़ोसियों ने दिप्रिंट को बताया कि फ्लाईदुबई उनके माता-पिता के सफर का इंतजाम कर रही थी.
चौथी मंजिल पर रहने वाले और स्मित के पिता के दोस्त लक्ष्मीकांत जोशी ने कहा, “उन्हें अस्पताल ले जाया गया है, ऑपरेशन हो चुका है और हमें बताया जा रहा है कि उनकी हालत स्थिर है. जब तक उनके माता-पिता उन्हें अपनी आंखों से नहीं देख लेते, तब तक हम सच में नहीं जान पाएंगे. वह स्थिर हैं, लेकिन इससे बेहतर खबर तब होगी जब हमें पता चलेगा कि वह खतरे से बाहर हैं और पूरी तरह ठीक हैं.”
बिल्डिंग में गर्व भी था, लेकिन जोशी ने कहा कि यह ऐसा गर्व नहीं है, जिसे कोई महसूस करना चाहेगा.
उन्होंने कहा, “मैं उम्मीद करता हूं कि किसी को भी कभी इस तरह का गर्व महसूस न करना पड़े.”
माता-पिता चिंतित और डरे हुए
बिल्डिंग के बाहर कुछ टीवी चैनलों की टीमें खड़ी थीं. घाटकोपर से तिलक नगर की ओर जाने वाली सड़क का चौराहा हमेशा की तरह व्यस्त था. एक सब्जी बेचने वाला कैमरा पकड़े व्यक्ति से यह पूछने के लिए रुका कि क्या हुआ है, फिर वहां से चला गया.
बिल्डिंग की लॉबी के अंदर रहने वाले लोग मीडिया से बात कर रहे थे और एक के बाद एक रिपोर्टर के सवालों का धैर्य से जवाब दे रहे थे. कुछ लोग अचानक मिली इस मीडिया की दिलचस्पी से हैरान और खुश नजर आए. वहीं, कुछ लोग इस बात से नाराज थे कि उनकी अनुमति के बिना उनके फोन नंबर अलग-अलग मीडिया संस्थानों में साझा कर दिए गए थे.
बिल्डिंग के चेयरमैन अशोक मकवाना इस परिवार को करीब 14 साल से जानते हैं.
मकवाना ने कहा, “वह बहुत अच्छे इंसान हैं. बहुत शांत स्वभाव के हैं. बेशक, पूरी बिल्डिंग को उन पर गर्व है, लेकिन यह देश के लिए भी गर्व का पल है.”
अक्षय दोशी इस परिवार के पड़ोस में रहते हैं. उन्होंने बताया कि बुधवार दोपहर करीब 12:30 बजे बिल्डिंग के लोगों को विमान में किसी तरह की गड़बड़ी की जानकारी मिली. करीब 2 बजे उन्हें पता चला कि यह फ्लाईदुबई की फ्लाइट से जुड़ा मामला है और उन्होंने मच्छर को फोन करने की कोशिश की. लेकिन उनसे संपर्क नहीं हो पाया.
दोशी ने बताया कि शाम करीब 6 बजे तक उन्हें पता चल गया था कि मच्छर विमान के कप्तान थे. उस शाम बाद में जब वह मच्छर के माता-पिता से मिले, तो “वे बहुत चिंतित, बहुत घबराए हुए और बहुत डरे हुए थे.”
दोशी ने कहा, “बेशक, उन्हें अपने बेटे पर बहुत गर्व था, लेकिन मुझे लगता है कि ऐसी मुश्किल स्थिति में डर हावी हो जाता है.”
दोशी ने इस दंपति को रास्ते में कुछ दूरी तक गाड़ी से एयरपोर्ट पहुंचाया. उन्होंने मच्छर को “खुशमिजाज और परिवार को महत्व देने वाला” व्यक्ति बताया.
दोशी ने कहा, “उन्हें विमानन से बहुत प्यार है. मैं उन्हें विमानन के अलावा किसी और काम में करते हुए सोच भी नहीं सकता.”
मच्छर ने वेलिंगकर इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट से मैनेजमेंट की पढ़ाई की थी. संस्थान ने दिप्रिंट को बताया कि उन्होंने 2007-08 में वहां दाखिला लिया था और डिस्टेंस लर्निंग के जरिए एक साल का पोस्टग्रेजुएट डिप्लोमा पूरा किया था.
उन्होंने न्यूजीलैंड में कमर्शियल पायलट की ट्रेनिंग पूरी की और मानेसर, गुरुग्राम के फ्लाइट सेफ्टी ट्रेनिंग सेंटर से बोइंग 737 का टाइप रेटिंग हासिल किया.
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