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Thursday, 1 October, 2026
होमरिपोर्टपरीक्षा सिर्फ एक कार्यक्रम नहीं, युवाओं का भविष्य है. UPSC से तय समय पर जारी करे नतीजे: मोदी

परीक्षा सिर्फ एक कार्यक्रम नहीं, युवाओं का भविष्य है. UPSC से तय समय पर जारी करे नतीजे: मोदी

AI और क्विक कॉमर्स की तेज़ रफ्तार का ज़िक्र करते हुए मोदी ने परीक्षा संस्थाओं से ऐसे सुधार करने को कहा, जिससे समय पर और जल्दी नतीजे जारी किए जा सकें.

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नई दिल्ली: तकनीक में तेज़ी से हो रहे बदलावों के साथ अब दुनिया हमारी पहुंच में है. आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी AI शासन व्यवस्था को बदल रहा है. वहीं, क्विक कॉमर्स प्लेटफॉर्म लोगों को तेज़ी से सामान पहुंचाने की आदत डाल रहे हैं. दुनिया जैसे-जैसे तेज हो रही है और तकनीक पर ज्यादा निर्भर होती जा रही है, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सिविल सेवा भर्ती व्यवस्था में बदलाव की जरूरत बताई है. उन्होंने UPSC के शताब्दी समारोह में परीक्षाओं में ज्यादा “समय की निश्चितता” यानी तय समय पर काम पूरा करने की बात कही.

प्रधानमंत्री मोदी ने एक अक्टूबर को कहा, “जब AI कुछ ही पलों में हजारों दस्तावेजों को देख सकता है और जब सरकारों के पास रियल टाइम डेटा उपलब्ध है, तो नागरिक तेज समाधान की उम्मीद करते हैं. बदलती सोच के कारण हमारी सिविल सेवाओं से भी नए बदलाव की जरूरत है.”

उन्होंने आगे कहा, “2047 का भारत आज के भारत से बहुत अलग होगा. आज के मुकाबले भारत ज्यादा शहरी होगा और गांवों और शहरों के बीच का अंतर कम होगा. हमारे नागरिकों, खासकर युवाओं की उम्मीदें और उनकी आकांक्षाएं बहुत ज्यादा होंगी.”

मोदी ने यह सवाल भी उठाया कि क्या सरकारी सेवाएं आज की इस तेज रफ्तार वाली, तुरंत सामान पहुंचाने वाली दुनिया के साथ कदम मिला सकती हैं और उसी के हिसाब से काम कर सकती हैं.

परीक्षा सिर्फ एक कार्यक्रम नहीं है

प्रधानमंत्री ने कहा, “देश तेज़ी से सुधारों के रास्ते पर आगे बढ़ रहा है. इसलिए परीक्षा कराने वाली संस्थाओं को भी देश की जरूरत के हिसाब से सुधारों पर काम करना चाहिए. किसी परीक्षा को सिर्फ एक कार्यक्रम नहीं माना जाना चाहिए. यह हमारे युवाओं के भविष्य से जुड़ी है. कुछ महीनों की देरी भी युवाओं के लिए मुश्किलें पैदा कर सकती है. इसलिए परीक्षा व्यवस्था में तय समय पर काम पूरा करने का सिद्धांत होना चाहिए.”

उन्होंने यह भी कहा कि भारत को युवाओं को सरकारी सेवाओं में लाने की जरूरत है.

मोदी ने कहा, “हमें ऐसे युवाओं को सरकारी सेवा में लाने की जरूरत है जो सिर्फ सरकारी पद से नहीं, बल्कि जनसेवा से आकर्षित हों. इसलिए यह जरूरी है कि भर्ती परीक्षा सिर्फ यह न देखे कि उम्मीदवार को कितना ज्ञान है, बल्कि यह भी देखे कि युवा सिविल सेवा में क्यों आना चाहता है.”

हाल के वर्षों में सिविल सेवा में आने वाले लोगों के रुझान में भी बदलाव आया है. मोदी ने कहा कि अब सिर्फ शहरों के युवा ही सिविल सेवा की परीक्षा नहीं दे रहे हैं, बल्कि ग्रामीण इलाकों से आने वाले युवा भी इसमें शामिल हो रहे हैं.

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, “जब UPSC की स्थापना हुई थी, तब अवसर ज्यादातर बड़े शहरों, संपन्न परिवारों और बड़े संस्थानों के युवाओं तक ही सीमित थे. लेकिन आज गांवों और छोटे शहरों के युवा भी सरकारी सेवाओं तक पहुंच रहे हैं. हमारी बेटियों की भागीदारी भी लगातार बढ़ रही है.”

उन्होंने कहा, “1952 में सिविल सेवा में महिला उम्मीदवारों की संख्या सिर्फ 3 प्रतिशत थी. आज यह बढ़कर 30 प्रतिशत से ज्यादा हो गई है.”

(इस रिपोर्ट को अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें)

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