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Friday, 6 November, 2026
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देश के 10 सबसे प्रदूषित शहरों में छह उत्तर प्रदेश के, भाजपा सरकार जिम्मेदार : कांग्रेस

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लखनऊ, छह नवंबर (भाषा) उत्तर प्रदेश कांग्रेस कमेटी की अध्यक्ष आराधना मिश्रा ‘मोना’ ने शुक्रवार को प्रदेश की भाजपा सरकार पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि उसके संरक्षण में राज्य की स्वास्थ्य सेवाएं देश में सबसे बदहाल हैं, शिक्षा व्यवस्था चरमराई हुई है और भ्रष्टाचार एवं अपराध चरम पर हैं। उन्होंने कहा कि अब प्रदेश की हवा भी लोगों की जान की दुश्मन बन गई है।

एक बयान के मुताबिक, मिश्रा ने कहा कि स्वतंत्र शोध संस्था ‘सेंटर फॉर रिसर्च ऑन एनर्जी एंड क्लीन एयर’ (सीआरईए) ने पांच नवंबर 2026 को ‘इंडिया मंथली एम्बिएंट एयर क्वालिटी स्नैपशॉट-अक्टूबर 2026’ रिपोर्ट जारी की है। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) के आंकड़ों पर आधारित यह रिपोर्ट बताती है कि उत्तर प्रदेश देश के सबसे प्रदूषित शहरों वाले राज्यों में शामिल है।

उन्होंने कहा कि देश के 10 सबसे प्रदूषित शहरों में छह उत्तर प्रदेश के हैं। इनमें बागपत का बड़ौत, गाजियाबाद का खोड़ा, अमरोहा का गजरौला, गाजियाबाद, गौतमबुद्ध नगर का नोएडा और मेरठ शामिल हैं। उन्होंने कहा कि देश के तीन सबसे प्रदूषित शहर भी उत्तर प्रदेश में ही हैं।

मिश्रा ने कहा कि पीएम 2.5 हवा में मौजूद बेहद महीन कण होते हैं, जो इंसान के बाल से लगभग 30 गुना पतले होते हैं। ये सांस के साथ सीधे फेफड़ों और रक्तप्रवाह में पहुंच जाते हैं तथा अस्थमा, हृदय और फेफड़ों की बीमारियों की प्रमुख वजह बनते हैं। उन्होंने कहा कि विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के अनुसार, हवा में पीएम 2.5 की मात्रा 15 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर से अधिक नहीं होनी चाहिए।

उन्होंने बताया कि बागपत जिले का बड़ौत अक्टूबर में देश का सबसे प्रदूषित शहर रहा। यहां पूरे महीने पीएम 2.5 की औसत मात्रा 87 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर दर्ज की गई, जो डब्ल्यूएचओ की निर्धारित सीमा से लगभग छह गुना अधिक है।

कांग्रेस नेता के मुताबिक, गाजियाबाद जिले का खोड़ा देश में दूसरे स्थान पर रहा। यहां अक्टूबर में पीएम 2.5 का औसत स्तर 85 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर रहा, जो डब्ल्यूएचओ की सीमा से लगभग छह गुना अधिक है।

उन्होंने कहा कि अमरोहा जिले का गजरौला देश का तीसरा सबसे प्रदूषित शहर रहा। यहां अक्टूबर में प्रदूषण का औसत स्तर डब्ल्यूएचओ की निर्धारित सीमा से चार से छह गुना के बीच रहा।

मिश्रा ने कहा कि गाजियाबाद, नोएडा और मेरठ की स्थिति भी ऐसी ही है।

प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष ने दावा किया कि यह समस्या केवल कुछ शहरों तक सीमित नहीं है। रिपोर्ट में शामिल उत्तर प्रदेश के 27 शहरों में से 13 में अक्टूबर के दौरान पीएम 2.5 का औसत स्तर डब्ल्यूएचओ की निर्धारित सीमा से चार से छह गुना के बीच रहा, जबकि 11 अन्य शहरों में यह दो से चार गुना अधिक दर्ज किया गया। उन्होंने कहा कि प्रदेश का एक भी शहर ऐसा नहीं है जहां हवा की गुणवत्ता डब्ल्यूएचओ की सुरक्षित सीमा के भीतर हो।

कांग्रेस नेता ने कहा कि प्रदूषण का सबसे अधिक असर बच्चों, बुजुर्गों, गर्भवती महिलाओं और पहले से बीमार लोगों पर पड़ रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि जिस प्रदेश की स्वास्थ्य व्यवस्था पहले से ही चरमराई हुई है, वहां जहरीली हवा लोगों की मुश्किलें और बढ़ा रही है। भाजपा सरकार प्रचार और आयोजनों में व्यस्त है, जबकि प्रदेश की जनता सांस लेने के लिए संघर्ष कर रही है।

उन्होंने राज्य सरकार से रिपोर्ट का तत्काल संज्ञान लेने और वायु प्रदूषण से निपटने के लिए ठोस एवं समयबद्ध कदम उठाने की मांग की।

भाषा

जफर रवि कांत

यह खबर ‘भाषा’ न्यूज़ एजेंसी से ‘ऑटो-फीड’ द्वारा ली गई है. इसके कंटेंट के लिए दिप्रिंट जिम्मेदार नहीं है.

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