नयी दिल्ली, 30 अक्टूबर (भाषा) निर्वाचन आयोग के अधिकारी एक वरिष्ठ उप निर्वाचन आयुक्त के नेतृत्व में दो नवंबर को मेरठ के दौरे के साथ उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव की तैयारियों की चरणबद्ध तरीके से समीक्षा शुरू करेंगे।
उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, पंजाब, मणिपुर और गोवा में विधानसभा चुनाव अगले साल की शुरुआत में होने हैं।
निर्वाचन आयोग के अधिकारी मेरठ दौरे के दौरान पश्चिमी उत्तर प्रदेश के कुछ मंडलों में जमीनी स्तर पर चुनावी तैयारियों की समीक्षा करेंगे।
निर्वाचन आयोग के अधिकारी उत्तराखंड, मणिपुर और पंजाब में समीक्षा के लिए दौरे कर चुके हैं, जबकि गोवा के दौरे की रूपरेखा तैयार की जा रही है।
आयोग ने हाल में 17 राज्यों में मतदाता सूचियों के विशेष संक्षिप्त पुनरीक्षण का आदेश देते हुए कहा था कि इन पांच राज्यों में विधानसभा चुनाव ‘‘अगले साल की शुरुआत में’’ कराए जा सकते हैं।
आमतौर पर चुनाव कार्यक्रम की घोषणा से पहले मुख्य निर्वाचन आयुक्त (सीईसी) और अन्य निर्वाचन आयुक्तों वाला ‘‘पूर्ण आयोग’’ चुनाव वाले राज्यों का दौरा करता है।
उत्तर प्रदेश की 403 सदस्यीय विधानसभा का कार्यकाल अगले साल 22 मई को समाप्त होगा, जबकि 60 सदस्यीय मणिपुर, 40 सदस्यीय गोवा, 117 सदस्यीय पंजाब और 70 सदस्यीय उत्तराखंड विधानसभा के कार्यकाल मार्च 2027 में अलग-अलग तारीखों पर समाप्त होंगे।
जन प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 के प्रावधान निर्वाचन आयोग को विधानसभा का कार्यकाल समाप्त होने से छह महीने पहले चुनाव कराने की अनुमति देते हैं।
चुनाव तैयारियों के तहत उत्तर प्रदेश और गोवा ने मतदान में इस्तेमाल की जाने वाली इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (ईवीएम) और ‘वोटर वेरिफाएबल पेपर ऑडिट ट्रेल’ (वीवीपैट) मशीनों की ‘प्रथम स्तरीय जांच’ (एफएलसी) शुरू कर दी है।
एफएलसी के दौरान ईवीएम और वीवीपैट मशीनों में तकनीकी खामियों की जांच भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड (बीईएल) और इलेक्ट्रॉनिक्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड (ईसीआईएल) के इंजीनियर करते हैं। ये दोनों सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियां इन मशीनों का निर्माण करती हैं।
खराब मशीनों को मरम्मत या बदलने के लिए निर्माताओं के पास वापस भेज दिया जाता है। राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों की मौजूदगी में मशीनों की जांच के लिए ‘मॉक पोल’ भी कराया जाता है।
एफएलसी चुनाव तैयारियों का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। आयोग इसके लिए एक समय-सारणी जारी करता है, जिसका राज्यों को पालन करना होता है।
एफएलसी के दौरान ‘कंट्रोल यूनिट’ और ‘बैलेट यूनिट’ में पिछले चुनाव से संबंधित बचा हुआ कोई भी डेटा पूरी तरह हटा दिया जाता है। सभी जांच में सफल इकाई को ‘‘एफएलसी ओके’’ के रूप में चिह्नित किया जाता है और चुनाव तैयारी के अगले चरण से पहले किसी अनधिकृत पहुंच को रोकने के लिए उस पर विशेष गुलाबी कागज की सील लगाई जाती है।
कम से कम एक ‘बैलेट यूनिट’, एक ‘कंट्रोल यूनिट’ और एक वीवीपैट मशीन को मिलाकर एक ईवीएम प्रणाली बनती है।
भाषा हक देवेंद्र
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