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Wednesday, 17 July, 2024
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RSS से जुड़े NGO ने दिल्ली में सेक्स वर्कर्स के लिए खोला क्लीनिक, कई बीमारियों का होगा फ्री इलाज

दिप्रिंट ने जब सीमा से मुलाकात की तो पता चला कि वो दो महीने की गर्भवती थीं. इस बार वो खुश थी कि अपने कोठे से बमुश्किल 50 मीटर की दूरी पर स्थित क्लिनिक में ठीक से इलाज करवा सकती थीं.

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नई दिल्ली: ब्लैक लेगिंग-पिंक कुर्ता और बोल्ड पर्पल लिपस्टिक लगाई हुई डरी सहमी युवती एक दिन में 10 ग्राहकों को अटैंड करती है और कभी-कभी इससे ज्यादा के लिए वो ड्रग्स भी लेती है. इससे उसे पीरियड्स को ट्रैक करना मुश्किल हो जाता है.

अजमेरी गेट की तरफ चलते हुए घरों की छतों और खिड़कियों से अपने ग्राहकों को आवाज़ देती सेक्स वर्कर्स नज़र आएंगी. दिल्ली के गारस्टिन बास्टिन यानी जीबी रोड पर स्थित महिला पुलिस चौकी के पास एक प्राथमिक स्कूल की बिल्डिंग में शुरू हुए इस क्लीनिक में रविवार को तकरीबन 15-20 सेक्स वर्कर्स चेक-अप कराने आई थीं.

सेक्स वर्कर सीमा (बदला हुआ नाम) ने क्लीनिक में बैठे डॉक्टर से कहा, ”दो महीने हो गए खून नहीं निकला है. परेशान हो गई हूं डॉक्टर साहब.”

रविवार को दिप्रिंट ने जब 28-वर्षीय सीमा से मुलाकात की तो पता चला कि वो उस समय दो महीने की गर्भवती थीं. लेकिन इस बार वह खुश थी कि अपने कोठे से बमुश्किल 50 मीटर की दूरी पर स्थित क्लिनिक में ठीक से इलाज और अबॉर्शन करवा सकती थीं.

एक गैर-सरकारी संगठन (एनजीओ) सेवा भारती और नेशनल मेडिकोज ऑर्गनाइजेशन (एनएमओ) की एक संयुक्त प्रोजेक्ट, उत्कर्ष नामक पहल के तहत इस साल 1 जनवरी को शुरू की गई यह सुविधा सेक्स वर्कर्स को मुफ्त स्वास्थ्य सेवाएं मुहैया कराती है. दोनों संगठन राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) से जुड़े हुए हैं.

हर रविवार को लोक नायक जय प्रकाश नारायण अस्पताल, सफदरजंग अस्पताल, लेडी हार्डिंग मेडिकल कॉलेज और अन्य अस्पतालों के सीनियर रेजिडेंट डॉक्टर्स के अलावा हर हफ्ते दो स्पेशलिस्ट डॉक्टर्स यहां फ्री सेवाएं देने आते हैं.

सेवा भारती के महासचिव सुशील गुप्ता ने दिप्रिंट को बताया कि इस पहल की शुरुआत उस समय हुई जब एनजीओ के कार्यकर्ता कोविड-19 के दौरान जीबी रोड पर गैस सिलेंडर बांटने आए थे. तब उन्हें महसूस हुआ कि इस इलाके की सबसे बड़ी जरूरत स्वास्थ्य सेवा है.

उत्कर्ष क्लिनिक में डॉक्टर्स | फोटोः फाल्गुनी शर्मा | दिप्रिंट

गुप्ता ने कहा कि उनके एनजीओ ने पहली बार 2020 में तत्कालीन संयुक्त पुलिस आयुक्त आलोक कुमार (क्राइम) के साथ मिलकर महिला थाने की पहली मंजिल पर सेक्स वर्कर्स के लिए एक साप्ताहिक क्लिनिक शुरू किया था. इसके बाद हमने स्कूल की खाली पड़ी जमीन पर क्लीनिक खोलने के लिए नगर निगम से संपर्क किया और वे राज़ी हो गए.

हालांकि, इस क्लिनिक को शुरू करने के कई कारण थे, जिनमें सेक्स वर्कर्स के खिलाफ लगे उस कलंक को दूर करना था, जो उन्हें आम लोगों की तरह मेडिकल सुविधाओं तक पहुंचने से रोकता है.

रविवार को आए सीनियर रेजिडेंट डॉक्टर सुनील कुमार और गायनेकोलॉजिस्ट ललिता कुमारी ने बताया कि सेक्स वर्कर्स को होने वाली मेजर परेशानियों में हाइपरटैंशन, ब्लड प्रेशर, मधुमेह, गौनोरिया, सिफिलिस, इचिंग, रैशिस, फंगल इंफेक्शन शामिल है.

लेडी हार्डिंग अस्पताल में फोरेंसिक मेडिसिन स्पेशलिस्ट डॉक्टर सुनील कुमार ने कहा, “आमतौर पर सेक्स वर्कर्स को डॉक्टर्स से बात करने में हिचक महसूस होती है और कुछ डॉक्टर्स भी सेक्स वर्कर्स का इलाज करने से कतराते हैं. इसी हिचकिचाहट को दूर करने के लिए क्लिनिक की शुरुआत की गई है, जहां सेक्स वर्कर्स आराम से अपनी बात को रख सकें.”

गुप्ता ने कहा, “सरकारी अस्पतालों में सुबह आठ बजे से ही लंबी-लंबी लाइनें लग जाती हैं. इस कारण से, कई महिलाएं बिना किसी प्रिसक्रिप्शन के दवाई लेती हैं और नई-नई बीमारियां उन्हें घेर लेती हैं.”

हाल-फिलहाल क्लिनिक में महिलाओं के स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के अलावा शुगर, ब्लड प्रेशर टेस्ट और अल्ट्रासाउंड की व्यवस्था की गई है. हर हफ्ते आंखों या दांतों से संबंधित स्पेशल कैंप भी लगाए जाते हैं.


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एमटीपी किट, कोंडम और ड्रग्स

जीबी रोड पर सेक्स वर्कर्स को खुलेआम ग्राहकों से पैसों के लिए बहस करते देखा जा सकता है, लेकिन जब स्वास्थ्य सुविधाओं की बात आती है, तो लोग हिचकिचाते हैं.

दिप्रिंट ने जिन सेक्स वर्करों से बात की, उनका कहना था कि, “सामान्य लोग” उनसे दूर भागते हैं और डॉक्टरों ने उन्हें उनके काम के दौरान होने वाली हेल्थ से जुड़ी दिक्कतें, जैसे सैक्शुएली ट्रास्मिटिड डिसिज (एसटीडी), अनप्लान्ड प्रेग्नेंसी और असुरक्षित अबॉर्शन से होने वाली दिक्कतों के लिए सुनाते हैं…जैसे यह उन्ही की गलती हो.

दिल्ली पुलिस के 2020 के आंकड़ों के मुताबिक, शाहजहांनाबाद के अज़मेरी गेट से लाल किले के लाहौरी गेट तक फैले रेड-लाइट एरिया में 2,830 सेक्स वर्कर्स काम करती हैं.

डॉ. सुनील कुमार ने कहा कि इनमें से कई सेक्स वर्कर कई तरह की स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं का सामना करती हैं. अक्सर मेडिकल टर्मिनेशन ऑफ प्रेग्नेंसी (एमटीपी) किट जैसी अबॉर्शन पिल्स से खुद का इलाज करने की कोशिश करती हैं, जिससे परेशानी और भी बड़ी बन जाती है.

उत्कर्ष क्लिनिक में दवाईयों का स्टॉक | फोटोः फाल्गुनी शर्मा | दिप्रिंट

कुमार ने बताया कि एमटीपी किट से केवल 95 प्रतिशत तक अबॉर्शन हो पाता है.

उन्होंने कहा “सरकार ने एमटीपी किट की बिक्री को मिठाइयों के जितना आसान बना दिया है. आज कल कोई भी बिना किसी प्रिसक्रिप्शन के इसे बाज़ार से खरीद सकता है. इसके लगातार इस्तेमाल से हॉर्मोनल डिसबैलेंस और पीरियड्स की दिक्कत हो सकती है.”

क्लिनिक के डॉक्टरों ने प्रैग्नेंसी के दौरान अल्ट्रासाउंड को जरूरी बताते हुए कहा, “हर बार बच्चा बच्चेदानी में नहीं ठहरता कभी-कभी वह ट्यूब में फंस जाता है और एमटीपी खुद लेने से इस नली के फटने के चांस होते हैं.”

शर्मिला ने दिप्रिंट को बताया कि वह अपने कोठे और पड़ोस में रहने वाली वर्कर्स को को बर्थ कंट्रोल पिल्स लेने और कोंडम का इस्तेमाल करने के लिए ट्रेनिंग देती हैं.

उन्होंने बताया, “कुछ ग्राहक एक के फटने के डर से दो कोंडम पहनते हैं. इसके कारण महिला के लिए दबाव और दर्द बढ़ जाता है और जलन पैदा होती है.”

क्लिनिक के डॉक्टरों ने कहा कि कई महिलाएं सरकारी की ओर से आने वाले घटिया किस्म के कोंडम के इस्तेमाल करती हैं, जिससे इचिंग, वैजाइनल डिसचार्ज हो सकता है और यहां तक कि यूटीआई जैसी समस्याएं भी हो सकती हैं.

28-वर्षीय सेक्स वर्कर ने कहा कि दिन रात बदन तुड़वाने के बाद हम ड्रग्स लेकर सो जाते हैं, लेकिन सही दवाईयां मिलने से हमें दूर नहीं जाना पड़ेगा. क्लिनिक के डॉक्टरों के मुताबिक, जीबी रोड पर यह कोई असामान्य मामला नहीं है।

डॉक्टर सुनील ने हाइपरटैंशन का कारण ड्रग्स की हैवी डोस को बताया है. उनका कहना है कि “शरीर एक सीमा तक ड्रग्स और सेक्स झेल सकता है, लेकिन इस पेशे में रहने के लिए महिलाएं ओवरडोज लेती हैं, जिससे उनके ब्रैन में बदलाव होने लगते हैं.”

सुनील ने बताया कि मां के खून में ड्रग्स की मात्रा अधिक होने से बच्चे पर भी इसका असर पड़ता है. इस कारण बच्चे की हाइट कम रह सकती है और ब्रैन पर भी इसका नकारात्मक प्रभाव पड़ता है और याद्दाश्त कमज़ोर होती है.

उन्होंने बताया कि अधिकतर महिलाएं गर्भवती नहीं होना चाहती हैं, लेकिन जो महिलाएं परिवार बढ़ाना चाहती हैं वे डॉक्टर्स से सलाह मशविरा करने के लिए आती हैं.

क्लिनिक में एक स्वास्थ्य कार्यकर्ता | फोटोः फाल्गुनी शर्मा | दिप्रिंट

लोधी रोड पर स्थित पालिका मैटरनिटी अस्पताल (एनएमएचआरसी) की गायनेकोलॉजिस्ट ललिता कुमारी का कहना है कि यह क्लीनिक सेक्स वर्कर्स के लिए बड़े अस्पताल तक पहुंचने का एक रास्ता है.

उन्होंने बताया कि सेक्स वर्कर्स को समय-समय पर प्रेग्नेंसी टेस्ट करने और कोंडम लगाने के लिए अस्पतालों की तरफ से लगातार ट्रेनिंग दी जाती है.

उन्होंने कहा कि सेक्स वर्कर्स के लिए इतने महंगे इलाज करवाना संभव नहीं है, इसलिए क्लीनिक के जरिए उन्हें सही सलाह दी जाएगी, जिससे वे अपनी हेल्थ के साथ खिलवाड़ न करें.


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‘अब नए ग्राहक नहीं आते’

दिप्रिंट ने जिन सेक्स वर्करों से बात की, उन्होंने कहा कि क्लिनिक खुलने से उन्हें राहत मिली है क्योंकि यह मुफ्त सेवाएं प्रदान करता है. यहां कई लोगों खासकर वृद्ध सेक्स वर्कर्स के लिए पैसे की तंगी है.

शर्मिला ने जोर देते हुए कहा, “लोगों के लिए ये कोठा है, लेकिन यहां घर गृहस्थी के काम होते हैं. यहां भी आम लड़कियां रहती हैं.”

कोठा नंबर 55 पर पिछले 40 साल से काम करने वालीं शर्मिला ने अपने कार्ड की तरफ इशारा करते हुए बताया कि मैं सरकार के बहुत सारे कैंप में भी जाती रहती हूं. उन्होंने दावा किया कि कोठा नंबर 64 में काम करने वाली महिलाएं कम उम्र की होने के कारण बेहतर स्थिति में होती हैं.

जब दिप्रिंट ने जीबी रोड का दौरा किया, बहुत सारे लोगों को कोठा नंबर 64 में जाते देखा गया. पास में खड़े एक रिक्शा चालक ने कहा, “यहां माल अच्छा मिलता है”.

उन्होंने बताया कि जैसे-जैसे महंगाई बढ़ती जा रही है यहां के रेट भी बढ़ते जा रहे हैं. उन्होंने कहा कि अब “नए कस्टमर नहीं आते…जो पुराने थे…उनसे ही काम चलता है.”

शर्मिला ने बताया कि 15 मिनट का रेट 132 रुपये होता है. उन्होंने ठहाका लगाते हुए कहा, “जिससे होता नहीं वो 5-6 मिनट में भी भाग जाता है”.

28 वर्षीय सेक्स वर्कर युवा होने के कारण उनके रेट ज्यादा है- आधे घंटे के लिए 500 रुपये से भी ज्यादा, लेकिन जैसे-जैसे उनकी उम्र बढ़ेगी उन्हें भी कम पैसों में काम करना पड़ेगा.

जीबी रोड पर कोठा संख्या 60-64 | फोटोः फाल्गुनी शर्मा | दिप्रिंट

एक मां और नानी बन चुकीं शर्मिला, जल्द ही सेक्स वर्क छोड़ने की उम्मीद कर रही हैं. उनकी बेटी बैंगलोर में रहती है और मास्टर्स (एम.ए) की पढ़ाई कर रही है. उन्होंने कहा, “मैं नानी बन गई हूं…मेरा बेटे की नौकरी लग जाए…फिर मैं यहां से चली जाऊंगी.

उम्र के अलावा दोनों सेक्स वर्कर्स में बहुत कुछ कॉमन है. दोनों ने कहा कि वे 17-18 साल की उम्र में बेंगलुरू से दिल्ली कपड़ों के शोरूम में काम करने आई थीं, लेकिन उन्हें इस धंधे में धकेल दिया गया क्योंकि उनके पास दूसरे विकल्प नहीं थे.

एक अन्य सेक्स वर्कर ने दिप्रिंट को बताया कि उन्हें डर था कि उनकी बेटी भी उनकी तरह यही खप जाएगी.

उन्होंने कहा, “मैं खुद यहां डर में रहती हूं… क्या पता, शायद मेरी बेटी को भी कोठे में बिठा दिया जाए…इसलिए मैं उसे यहां नहीं बुलाती हूं.

सेवा भारती के सुशील गुप्ता ने कहा कि सेक्स वर्कर्स को जज करने का अधिकार किसी को नहीं है.

गुप्ता ने कहा, “सेक्स वर्कर्स की हेल्थ के लिए यह क्लीनिक उनके दरवाज़ों के पास खोला गया है ताकि उन्हें दूर न जाना पड़े. हमारा उद्देश्य है कि सेक्स वर्कर्स खुद को दूसरों से कमतर न आंके.

उन्होंने कहा, “एक भी सेक्स वर्कर्स अपनी मर्जी से नहीं बनीं है यह हमारी या आपकी वजह से मारपीट के डर से यहां फंसी हैं.

कनाडा हाई कमीशन में काम करने वालीं सविता नारंग ने कहा कि सेक्स वर्कर्स अपने बच्चों को इस चाह में खुद से दूर रखती हैं कि हम तो लौट नहीं पाए लेकिन हमें कोई यहां से निकाल कर ले जाए. दरअसल, सविता इस क्लीनिक का दारोमदार भी संभाल रही हैं.

उन्होंने कहा, “इस क्लीनिक से बहुत सारी सेक्स वर्कर्स खुश हैं और उनका कहना है कि इसे और बड़ा बनाया जाना चाहिए.

(इस खबर को अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें)


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