गुरुग्राम: पिछले एक दशक में, आईएएस, आईपीएस और आईएफओएस अधिकारियों की एक लंबी लाइन, जो तमिलनाडु और त्रिपुरा जैसे दूर-दूर के कैडर में तैनात थे—शादी के बाद हरियाणा पहुंच गई है.
हाल के मामलों में अदिति सिंह शामिल हैं, जो 2021 बैच की आईपीएस अधिकारी हैं और हिमाचल प्रदेश के विजिलेंस और एंटी-करप्शन ब्यूरो में पुलिस अधीक्षक के तौर पर काम कर रही थीं. अप्रैल में उनकी शादी 2021 बैच के हरियाणा कैडर आईएएस अधिकारी विवेक आर्य से होने के आधार पर उनका कैडर हरियाणा ट्रांसफर कर दिया गया.
इसी तरह, उत्सव आनंद, जो 2022 बैच के आईएएस अधिकारी हैं और मूल रूप से उत्तर प्रदेश कैडर में थे, जनवरी में अपनी बैचमेट अंजलि श्रोत्रिया से शादी के बाद हरियाणा ट्रांसफर हो गए, जो पहले से ही हरियाणा में तैनात थीं.
अगर किसी सीनियर आईएएस अधिकारी से पूछा जाए कि हरियाणा ही क्यों, तो जवाब काफी सीधा लगता है.
राज्य में सीनियर पदों पर काम कर चुके एक रिटायर्ड अधिकारी ने दिप्रिंट से नाम न बताने की शर्त पर कहा, “हरियाणा सिर्फ एक पोस्टिंग नहीं है. ऐसे अधिकारी जो अपने परिवार को अच्छी ज़िंदगी देना चाहते हैं और साथ ही गंभीर काम भी जारी रखना चाहते हैं, उनके लिए यह शायद देश का सबसे अच्छा कॉम्बिनेशन है. आप लुटियंस दिल्ली के करीब रहते हैं. आपके बच्चे राजधानी के बेहतरीन स्कूलों में पढ़ सकते हैं. आप गुरुग्राम या फरीदाबाद में पोस्टिंग ले सकते हैं, जो एक तरह से दिल्ली का ही एक्सटेंशन हैं. अगर आप काफी सीनियर हैं, तो एडिशनल चार्ज की व्यवस्था के तहत आपको दिल्ली में ही रहने की सुविधा भी मिल सकती है.”
नियम और ट्रांसफर
आईएएस और आईपीएस कैडर रूल्स के रूल 5(2) के तहत, इंटर-कैडर ट्रांसफर की अनुमति तब दी जाती है जब दोनों पति-पत्नी ऑल इंडिया सर्विसेज में हों और अलग-अलग कैडर में तैनात हों और इसके लिए केंद्र सरकार की मंजूरी जरूरी होती है. एक शर्त है: किसी भी अधिकारी को उसके होम स्टेट में ट्रांसफर नहीं किया जा सकता.
सितंबर 2023 में, राहुल मोदी, जो 2020 बैच के आईएएस अधिकारी हैं और त्रिपुरा कैडर से थे, अपनी शादी आईपीएस अधिकारी दीप्ति गर्ग से होने के बाद हरियाणा कैडर में आ गए, जो पहले से राज्य में तैनात थीं. इससे कुछ महीने पहले, अप्रैल 2023 में, अनुपमा अंजलि, जो 2018 बैच की आंध्र प्रदेश कैडर की अधिकारी हैं, ने भी यही रास्ता अपनाया, जब उनकी शादी 2020 बैच के हरियाणा आईएएस अधिकारी हर्षित कुमार से हुई. नवंबर 2022 में, रेनू सोगन, जो वेस्ट बंगाल कैडर की आईएएस अधिकारी थीं, अपनी शादी 2019 बैच के आईएएस अधिकारी हितेश मीणा से होने के बाद हरियाणा ट्रांसफर हो गईं.
आईपीएस और आईएफओएस में भी यही ट्रेंड देखने को मिला.
कांची सिंघल, जो 2022 बैच की तमिलनाडु कैडर की अधिकारी हैं, अपनी शादी आईपीएस अधिकारी हर्षित गोयल से होने के बाद हरियाणा ट्रांसफर हो गईं. उनसे पहले, 2017 बैच के आईएफओएस अधिकारी अर्श वर्मा, 2018 बैच की आईपीएस अधिकारी निकिता खट्टर से शादी के बाद वेस्ट बंगाल कैडर से हरियाणा आ गए. अमरिंदर सिंह, जो 2021 बैच के आईपीएस अधिकारी हैं, मार्च 2024 में अपनी शादी 2023 बैच की आईएएस अधिकारी रुहानी से होने के बाद यूपी से हरियाणा आ गए.
इस तरह के मामले पहले से भी होते आए हैं.
फरवरी 2022 में, डॉ. बलप्रीत सिंह, जो 2019 बैच के आईएएस अधिकारी हैं और केरल के पालक्काड़ में सब-कलेक्टर के रूप में काम कर रहे थे, अपनी शादी के बाद हरियाणा ट्रांसफर हो गए. उनकी शादी उपासना से हुई, जो 2017 बैच की आईपीएस अधिकारी हैं और पहले से ही हरियाणा में तैनात थीं.
उनका होम स्टेट पंजाब है, इसलिए होम-स्टेट वाली शर्त उन पर लागू नहीं हुई; केरल और हरियाणा दोनों सरकारों की सहमति के बाद केंद्र के कार्मिक और प्रशिक्षण विभाग (DoPT) ने इस ट्रांसफर को मंजूरी दी.
इससे पहले, मई 2015 में, DoPT ने एक गजट नोटिफिकेशन जारी कर पार्थ गुप्ता, जो 2013 बैच के आईएएस अधिकारी हैं और AGMUT कैडर (जिसमें अरुणाचल प्रदेश, गोवा, मिजोरम और केंद्र शासित प्रदेश शामिल हैं) से थे, उन्हें हरियाणा ट्रांसफर किया था. यह ट्रांसफर उनकी शादी आस्था मोदी से होने के बाद हुआ, जो 2013 बैच की आईपीएस अधिकारी हैं और पहले से वहां तैनात थीं.
डबल ट्रांसफर
हरियाणा के शादी से जुड़े मामलों में एक अनोखा केस 2015 बैच के आईएएस अधिकारी राहुल हुड्डा का है, जिनका मूल कैडर हिमाचल प्रदेश था. 2015 में, हुड्डा अपनी पहली शादी के बाद हरियाणा ट्रांसफर हो गए थे. उनकी शादी मनीषा चौधरी से हुई थी, जो 2011 बैच की हरियाणा कैडर की आईपीएस अधिकारी हैं.
बाद में दोनों का तलाक हो गया और उन्होंने फिर नेहा सिंह से शादी की, जो 2015 बैच की गुजरात कैडर की आईएएस अधिकारी हैं. नेहा सिंह भी हरियाणा आ गईं, उनका ट्रांसफर दिसंबर 2021 में मंजूर हुआ. यानी, एक अधिकारी की दो शादियों की वजह से तीन करियर एक ही राज्य के प्रशासन में आ गए. इससे यह भी दिखता है कि हरियाणा दूसरी बार मौके देने में भी पीछे नहीं है.
ज्यादा जटिल मामले
हर मामला इतना आसान नहीं होता.
अजीत बालाजी जोशी, जो 2003 बैच के आईएएस अधिकारी हैं, हरियाणा कैडर में थे. उनकी पत्नी गौरी प्रशर, जो 2009 बैच की अधिकारी हैं, ओडिशा कैडर में थीं. आम तौर पर पति-पत्नी के आधार पर ट्रांसफर हो सकता था—लेकिन समस्या यह थी कि प्रशर ने अपने यूपीएससी फॉर्म में हरियाणा को अपना होम स्टेट बताया था, जिससे उनका वहां ट्रांसफर नहीं हो सकता था. जबकि उन्होंने वास्तव में कभी हरियाणा में रहना, पढ़ना या काम नहीं किया था.
इसके बाद दोनों ने सेंट्रल एडमिनिस्ट्रेटिव ट्रिब्यूनल का रुख किया, जिसने केंद्र सरकार को उनके केस पर विचार करने को कहा. आखिर में, प्रधानमंत्री की अध्यक्षता वाली कैबिनेट की अपॉइंटमेंट्स कमेटी ने फैसला लिया और दोनों अधिकारियों को पंजाब ट्रांसफर कर दिया.
एक और मामला है परी बिश्नोई का, जो सिक्किम कैडर की आईएएस अधिकारी हैं और पूर्व विधायक भव्या बिश्नोई से शादीशुदा हैं. चूंकि उनके केस में सीधे इंटर-कैडर ट्रांसफर लागू नहीं होता क्योंकि उनके पति ऑल इंडिया सर्विस के अधिकारी नहीं हैं—इसलिए उन्होंने हरियाणा में डेपुटेशन के लिए आवेदन किया.
सिक्किम सरकार ने उनकी शादी के बाद इस मामले को अलग तरीके से सुलझाया: उन्हें दिल्ली में डिप्टी रेजिडेंट कमिश्नर के पद पर पोस्टिंग दे दी गई. तरीका अलग था और जगह भी अलग, लेकिन दिशा वही रही. बिश्नोई परिवार, जिसकी जड़ें हिसार के आदमपुर में हैं, दिल्ली में रहता है.
सिर्फ हरियाणा ही नहीं
हरियाणा एक पसंदीदा जगह है, लेकिन यह अकेली नहीं है.
एक आईएएस अधिकारी ने दिप्रिंट से नाम न बताने की शर्त पर कहा, “जैसे महाराष्ट्र, कर्नाटक और गुजरात को बेहतर इंफ्रास्ट्रक्चर की वजह से सिविल सर्वेंट्स ज्यादा पसंद करते हैं. AGMUT कैडर भी काफी पॉपुलर है, खासकर आईपीएस अधिकारियों के बीच, क्योंकि इसमें दिल्ली शामिल है और यहां काम और जिंदगी के बीच अच्छा बैलेंस माना जाता है. इसी तरह तमिलनाडु और तेलंगाना को भी अच्छे विकल्प माना जाता है.”
लेकिन अधिकारी ने यह भी कहा कि उत्तर भारत के कई सिविल सर्वेंट्स हरियाणा को इसलिए पसंद करते हैं क्योंकि यह राष्ट्रीय राजधानी के करीब है, यहां शांति है और आर्थिक संसाधन भी अच्छे हैं.
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