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Thursday, 15 October, 2026
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राहुल याद रखें, आजादी के लिए नेहरू ही नहीं, मसुरियादीन पासी भी गए थे जेल : योगी आदित्यनाथ

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(फोटो के साथ)

प्रयागराज (उप्र), 15 अक्टूबर (भाषा) उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बृहस्पतिवार को कांग्रेस नेता राहुल गांधी पर निशाना साधते हुए कहा कि वह एक बात याद रखें कि देश की आजादी के लिए केवल और केवल नेहरू जेल नहीं गए थे बल्कि महाशय मसुरियादीन पासी जी भी जेल गए थे।

मुख्यमंत्री ने कहा कि मसुरियादीन ने एक-दो महीने या चार-छह महीने नहीं, बल्कि 1932 से 1944 के बीच नौ वर्ष जेल में रहकर आजादी की लड़ाई लड़ी।

उन्होंने कहा कि इतिहास के कालचक्र में उन जैसे महान स्वतंत्रता सेनानी को विस्मृत कर दिया गया लेकिन विरासत और विकास में विश्वास करने वाली भाजपा की ‘डबल इंजन’ सरकार अपने महापुरुषों को भुला नहीं सकती।

मुख्यमंत्री तेलियरगंज स्थित महाशय मसुरियादीन स्मारक इंटर कॉलेज और टीवी कॉलोनी चौराहे के पास में स्वतंत्रता सेनानी पासी की प्रतिमा के अनावरण समारोह को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने प्रतिमा पर पुष्प अर्पित कर श्रद्धांजलि दी। उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने भी पुष्पांजलि अर्पित की।

योगी ने कहा कि दो अक्टूबर 1911 को जन्मे मसुरियादीन की जयंती महात्मा गांधी और पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री की जयंती के दिन ही पड़ती है, इसके बावजूद उनके योगदान को इतिहास में भुला दिया गया लेकिन आज उनकी भव्य प्रतिमा स्थापित कर उत्तर प्रदेश सरकार ने उनकी स्मृतियों को जीवंत बनाने का कार्य किया है।

उन्होंने कहा कि देश की स्वतंत्रता और समाज के उत्थान के लिए अपना जीवन समर्पित करने वाले महाशय मसुदियादीन ने लगभग 66-67 साल की उम्र नौ वर्ष जेल में बिताए।

उन्होंने कहा कि जनता के बीच उनके प्रति सम्मान का परिणाम था कि 1946 में वह उत्तर प्रदेश विधानसभा के सदस्य बने तथा स्वतंत्र भारत में 1952 से 1972 तक चार बार लोकसभा के लिए चुने गए।

मुख्यमंत्री ने कहा कि 1952 में एक ही सीट से दो सांसद चुने जाते थे, उस समय पंडित जवाहरलाल नेहरू और महाशय मसुरियादीन पासी एक साथ चुनाव जीतकर संसद पहुंचे थे।

उन्होंने कहा कि देश की आजादी में ऐसे अनेक महापुरुषों ने योगदान दिया, जिनकी स्मृतियों को सम्मान मिलना चाहिए।

मुख्यमंत्री ने कहा कि 1857 के प्रथम स्वाधीनता संग्राम में अंग्रेजों को चुनौती देने वाली कई जातियों को अपमानित करने के लिए अंग्रेजी हुकूमत ने 1871 में जरायम पेशा कानून बनाया था तथा पासी समाज सहित कई जातियों को इसकी श्रेणी में रखा गया लेकिन 1952 में संसद पहुंचने के बाद महाशय मसुरियादीन ने इस कानून के खिलाफ आवाज उठाई।

उन्होंने कहा कि बाबा साहब डॉ. भीमराव आंबेडकर और महाशय मसुरियादीन पासी ने इस काले कानून को समाप्त कराने की लड़ाई लड़ी।

मुख्यमंत्री ने कहा कि ऐसे महापुरुषों का योगदान आने वाली पीढ़ियों को बताया जाना चाहिए।

योगी ने कहा कि देश और समाज के लिए जीवन समर्पित करने वाले हर महापुरुष को सम्मान मिलना चाहिए तथा यह सम्मान किसी एक परिवार तक सीमित नहीं हो सकता।

मुख्यमंत्री ने महाशय मसुरियादीन की पुत्री कमला कुमारी और पौत्र सचिन कुमार को आश्वस्त किया कि उनके सम्मान पर किसी प्रकार की आंच नहीं आने दी जाएगी। उन्होंने कहा कि महाशय मसुरियादीन का सम्मान भारत के स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों का सम्मान है।

महाशय मसुरियादीन स्मारक समिति के मंत्री एवं उनके पौत्र सचिन कुमार ने कहा कि अंग्रेजी शासन में दलित जातियों को जरायम पेशा घोषित कर उनका उत्पीड़न किया गया था, इस कानून को समाप्त कराने में महाशय मसुरियादीन का महत्वपूर्ण योगदान रहा।

भाषा जफर

राजकुमार

राजकुमार

यह खबर ‘भाषा’ न्यूज़ एजेंसी से ‘ऑटो-फीड’ द्वारा ली गई है. इसके कंटेंट के लिए दिप्रिंट जिम्मेदार नहीं है.

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