साणंद (गुजरात), चार जुलाई (भाषा) प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने शनिवार को यहां अपने संबोधन में लोकप्रिय संवाद ‘‘सुन रहे हो न, विनोद’’ का इस्तेमाल किया, जिससे वहां मौजूद लोगों ने तुरंत तालियां बजाईं और ठहाके लगाए।
मोदी ने साणंद में ‘सीजी सेमी आउटसोर्स्ड सेमीकंडक्टर असेंबली एंड टेस्ट’ सुविधा का उद्घाटन किया।
इस मौके पर ‘सीजी पावर एंड इंडस्ट्रियल सॉल्यूशंस’ के चेयरमैन वेल्लायन सुबैया ने अपने संबोधन में गुजराती की दो कहावतों का भी इस्तेमाल किया।
सुबैया ने कहा, ‘‘सरकार का विकास का नजरिया बिल्कुल स्पष्ट है। अब उद्योग जगत की जिम्मेदारी है कि वह उसी दिशा में आगे बढ़े। ‘निशान चूक माफ, पण नहीं माफ नीचू निशान’ (ऊंचे लक्ष्य को हासिल न कर पाना माफ किया जा सकता है, लेकिन छोटा लक्ष्य तय करना माफ नहीं किया जा सकता)। महोदय, हम निश्चित रूप से अपने लक्ष्य छोटे नहीं रखना चाहते।’’
उन्होंने कहा, ‘‘सेमीकंडक्टर चिप की हमारी पहली खेप जापान स्थित हमारे साझेदारों के पास भेजी जा रही है। इसके साथ ही भारत वैश्विक सेमीकंडक्टर आपूर्ति श्रृंखला का हिस्सा बन गया है। गुजरात में एक कहावत है, ‘काम बोले छे’ (काम स्वयं बोलता है)। आज हमारी पहली खेप शब्दों से कहीं अधिक प्रभावी ढंग से अपनी कहानी बयां कर रही है।’’
अपने संबोधन में प्रधानमंत्री मोदी ने गुजराती की इन दोनों कहावतों का उल्लेख किया।
प्रधानमंत्री ने कहा, ‘‘सुबैया जी ने गुजराती की एक कहावत कही—‘निशान चूक माफ, पण नहीं माफ नीचू निशान’। मैं कभी छोटे लक्ष्य नहीं रखता, न ही छोटी सोच रखता हूं। यदि मुझे कोई प्रतिमा बनानी हो, तो मैं उसे दुनिया की सबसे ऊंची प्रतिमा बनाऊंगा।’’
प्रधानमंत्री का यह बयान स्पष्ट रूप से सरदार वल्लभभाई पटेल की ‘स्टैच्यू ऑफ यूनिटी’ के संदर्भ में था।
मोदी ने कहा, ‘‘और सुबैया जी ने ‘काम बोले छे’ भी कहा… ‘सुन रहे हो न, विनोद’… काम बोलता है।’’
यह सुनते ही सभा में मौजूद लोग और मंच पर उपस्थित अन्य लोग ठहाके लगाने लगे।
मोदी ने स्वदेशी सेमीकंडक्टर उद्योग की स्थापना के लिए उनकी सरकार द्वारा किए गए कार्यों को रेखांकित किया।
वेब शो का लोकप्रिय संवाद ‘देख रहे हो न, विनोद’ या ‘सुन रहे हो न, विनोद’ ऑनलाइन सामग्री निर्माता द्वारा बार-बार इस्तेमाल किया जाता रहा है, जिसके चलते यह एक लोकप्रिय मीम बन गया है।
भाषा देवेंद्र शफीक
शफीक
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