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Saturday, 4 July, 2026
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मोदी ने राजस्थान रिफाइनरी का उद्घाटन किया: जानिए, भारत की पहली ग्रीनफील्ड रिफाइनरी क्यों है अहम

प्रधानमंत्री मोदी ने ₹79,459 करोड़ की HPCL-राजस्थान रिफाइनरी का उद्घाटन किया, जिससे रिफाइनिंग और पेट्रोकेमिकल क्षमता बढ़ेगी और भारत के ग्लोबल रिफाइनिंग हब बनने के लक्ष्य को बढ़ावा मिलेगा.

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नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शनिवार को राजस्थान के बालोतरा जिले के पचपदरा में HPCL राजस्थान रिफाइनरी लिमिटेड (HRRL) का उद्घाटन करेंगे. इसके साथ ही पिछले एक दशक में बनी भारत की पहली ग्रीनफील्ड रिफाइनरी शुरू हो जाएगी. इस रिफाइनरी की लागत 79,459 करोड़ रुपये है. इससे देश की रिफाइनिंग और पेट्रोकेमिकल उत्पादन क्षमता बढ़ने की उम्मीद है. साथ ही भारत की रिफाइनिंग क्षमता बढ़ाने की योजना को भी मजबूती मिलेगी.

यह परियोजना हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (HPCL) और राजस्थान सरकार का संयुक्त उपक्रम है. इसमें HPCL की 74 प्रतिशत हिस्सेदारी है, जबकि राजस्थान सरकार की 26 प्रतिशत हिस्सेदारी है.

प्रधानमंत्री पहले अप्रैल में इस रिफाइनरी का उद्घाटन करने वाले थे. लेकिन 20 अप्रैल को क्रूड डिस्टिलेशन यूनिट (CDU) में आग लगने के बाद आखिरी समय में कार्यक्रम टाल दिया गया. इसी यूनिट में कच्चे तेल को गर्म करके अलग-अलग पेट्रोलियम उत्पादों में बदला जाता है.

यह लगभग एक दशक में शुरू होने वाली भारत की पहली ग्रीनफील्ड रिफाइनरी है. इससे पहले 2016 में इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन लिमिटेड (IOCL) की ओडिशा के पारादीप में बनी रिफाइनरी शुरू हुई थी.

इस रिफाइनरी का उद्घाटन ऐसे समय हो रहा है, जब भारत अपनी रिफाइनिंग क्षमता बढ़ाने, पेट्रोकेमिकल उत्पादन में इजाफा करने और दुनिया के बड़े रिफाइनिंग हब के रूप में अपनी स्थिति मजबूत करने की कोशिश कर रहा है.

HRRL की रिफाइनिंग क्षमता 9 मिलियन मीट्रिक टन प्रति वर्ष (MMTPA) है. इसकी एकीकृत पेट्रोकेमिकल उत्पादन क्षमता 2.4 MMTPA है. यह राजस्थान के बाड़मेर तेल क्षेत्रों के पास स्थित है. इससे कच्चे तेल की ढुलाई की लागत कम होने की उम्मीद है. साथ ही देश में पेट्रोकेमिकल उत्पादन भी बढ़ेगा.

यह रिफाइनरी मोटर स्पिरिट (पेट्रोल), हाई स्पीड डीजल, पॉलीप्रोपाइलीन, हाई डेंसिटी पॉलीएथिलीन (HDPE), ब्यूटाडाइन, बेंजीन और टोल्यून भी बना सकती है. इससे भारत की कई पेट्रोकेमिकल उत्पादों के आयात पर निर्भरता कम होगी.

इस रिफाइनरी में आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल किया गया है. इसका नेल्सन कॉम्प्लेक्सिटी इंडेक्स (NCI) 17 है, जबकि दुनिया का औसत 8 से 10 के बीच है. यह इंडेक्स बताता है कि कोई रिफाइनरी कितनी आधुनिक है और भारी कच्चे तेल को ज्यादा मूल्य वाले पेट्रोलियम उत्पादों में बदलने की उसकी क्षमता कितनी है.

पेट्रोलियम मंत्रालय के मुताबिक, रिफाइनरी ने 22 जून से व्यावसायिक संचालन शुरू कर दिया था. पेट्रोल, डीजल और पेट्रोलियम कोक की बिक्री के बिल भी जारी किए जा चुके हैं.

भारत की रिफाइनिंग व्यवस्था

पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने गुरुवार को कहा कि HRRL पिछले एक दशक में भारत में शुरू हुई पहली ग्रीनफील्ड रिफाइनरी है. इससे दुनिया के प्रमुख रिफाइनिंग केंद्रों में भारत की स्थिति और मजबूत होगी.

भारत इस समय एशिया का दूसरा सबसे बड़ा और दुनिया का चौथा सबसे बड़ा रिफाइनर है. वित्त वर्ष 2025 में देश की 23 रिफाइनरियों की कुल क्षमता लगभग 258.1 MMTPA है. सरकार का अनुमान है कि 2030 तक यह बढ़कर करीब 309.5 MMTPA हो जाएगी. लंबे समय में सरकार कुल रिफाइनिंग क्षमता को 400 से 450 MMTPA तक ले जाना चाहती है.

पुरी ने कहा कि कई रिफाइनरी और ऊर्जा ढांचा परियोजनाएं पूरी होने के करीब हैं. इनके शुरू होने से आने वाले वर्षों में भारत की रिफाइनिंग क्षमता और बढ़ेगी.

मंत्री के मुताबिक, 2030 तक भारत के दुनिया का बड़ा रिफाइनिंग हब बनने की अच्छी संभावना है. खासकर इसलिए क्योंकि यूरोप में रिफाइनिंग क्षमता लगातार घट रही है और अमेरिका में पिछले 50 वर्षों में कोई नई ग्रीनफील्ड रिफाइनरी शुरू नहीं हुई है.

शुरू होने तक का लंबा सफर

20 अप्रैल को रिफाइनरी में लगी आग की वजह से परियोजना शुरू होने में देरी हुई.

HPCL ने कहा था कि शुरुआती जांच में पता चला कि आग हीट एक्सचेंजर सर्किट में लगे वाल्व या फ्लैंज से हाइड्रोकार्बन लीक होने की वजह से लगी थी. मरम्मत का काम तुरंत शुरू किया गया और मई तक पूरा हो गया. इसके बाद जून में रिफाइनरी का व्यावसायिक संचालन शुरू हो सका.

हालांकि, इस रिफाइनरी का सफर एक दशक से भी ज्यादा लंबा रहा है. इसकी घोषणा पहली बार 2013 में UPA-2 सरकार के दौरान हुई थी, जब सोनिया गांधी ने इसकी आधारशिला रखी थी. बाद में लागत बढ़ने और परियोजना लागू करने में आई दिक्कतों की वजह से इसमें देरी हुई.

दिप्रिंट पहले भी इस रिफाइनरी से जुड़ी समस्याओं पर एक ग्राउंड रिपोर्ट प्रकाशित कर चुका है.

2017 में BJP सरकार ने इस परियोजना को फिर से शुरू किया. इसके बाद 2018 में प्रधानमंत्री मोदी ने दोबारा इसकी आधारशिला रखी.

हालांकि HRRL एक बड़ी रिफाइनरी है, लेकिन यह भारत की सबसे बड़ी रिफाइनरी नहीं है. HPCL की विशाखापट्टनम रिफाइनरी की क्षमता 15 MMTPA है. इसके बाद मुंबई रिफाइनरी की क्षमता 9.5 MMTPA है. वहीं HPCL-मित्तल एनर्जी लिमिटेड की रिफाइनरी की क्षमता 11.3 MMTPA है.

IOCL की पारादीप और पानीपत रिफाइनरियों की क्षमता 15 MMTPA प्रत्येक है.

(इस रिपोर्ट को अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें)


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