नयी दिल्ली, 30 अक्टूबर (भाषा) रेलवे बोर्ड ने स्पष्ट किया कि रेल पास धारक अब राजधानी, दुरंतो व शताब्दी एक्सप्रेस जैसी प्रीमियम ट्रेनों में अपनी निर्धारित श्रेणी से ऊंची श्रेणी में भी यात्रा कर सकेंगे और इसके लिए बस उन्हें दोनों श्रेणियों के किराये का अंतर चुकाना होगा।
रेलवे बोर्ड के सामने विशेषाधिकार पास (पीपी), सेवानिवृत्ति के बाद मिलने वाले कॉम्प्लिमेंट्री पास (पीआरसीपी) और विधवा पास (डब्ल्यूपी) पर राजधानी, दुरंतो व शताब्दी एक्सप्रेस जैसी ट्रेनों में ऊंची श्रेणी में यात्रा की अनुमति देने का मामला विचाराधीन था।
इसकी वजह रेलवे कर्मचारी (पास) नियम, 1986 में मौजूद अस्पष्टता थी।
रेलवे कर्मचारी (पास) नियम, 1986 के तहत रेलवे कर्मचारियों, उनके परिवार के सदस्यों और आश्रितों को मुफ्त या रियायती दरों पर ट्रेन में यात्रा करने की सुविधा दी जाती है।
रेलवे बोर्ड ने बताया कि इस मामले पर वाणिज्य निदेशालय से सलाह ली गई थी।
बोर्ड ने स्पष्ट किया कि विशेषाधिकार पास (पीपी), सेवानिवृत्ति के बाद मिलने वाले कॉम्प्लिमेंट्री पास (पीआरसीपी) और विधवा पास (डब्ल्यूपी) धारक प्रीमियम ट्रेनों में अपनी पात्रता से ऊंची श्रेणी में भी यात्रा कर सकते हैं तथा इसके लिए बस उन्हें लागू किराये का अंतर चुकाना होगा।
बोर्ड ने कहा कि यह आदेश पास और पीटीओ (यात्रा प्राधिकरण आदेश) पर यात्रा की पात्रता से जुड़े सभी पुराने निर्देशों की जगह लेगा।
रेलवे बोर्ड ने सेंटर फॉर रेलवे इंफॉर्मेशन सिस्टम्स को तत्काल प्रभाव से यात्री आरक्षण प्रणाली और मानव संसाधन प्रबंधन प्रणाली के ई-पास मॉड्यूल में जरूरी बदलाव करने के निर्देश भी दिए।
अधिकारियों ने बताया कि पहले इस बात को लेकर असमंजस था कि रेलवे कर्मचारी या पेंशनभोगी कॉम्प्लिमेंट्री पास का इस्तेमाल कर राजधानी, दुरंतो या शताब्दी जैसी ट्रेनों में अतिरिक्त किराया देकर ऊंची श्रेणी में यात्रा कर सकते हैं या नहीं।
एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया, “अब रेलवे बोर्ड ने रेलवे कर्मचारी (पास) नियम, 1986 की अनुसूची-द्वितीय के नियम 3(एक्स) के तहत स्पष्ट कर दिया है कि इसकी अनुमति है।”
भाषा जितेंद्र पवनेश
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