नयी दिल्ली, 30 अक्टूबर (भाषा) लोकसभा, विधानसभाओं और स्थानीय निकायों के चुनाव एक साथ कराने से संबंधित प्रस्तावित कानूनों की समीक्षा कर रही संसद की एक समिति के समक्ष शुक्रवार को कई प्रमुख अर्थशास्त्री पेश हुए और अपने ‘‘बहुमूल्य सुझाव’’ दिए।
संविधान (129वां संशोधन) विधेयक, 2024 और संघ राज्य क्षेत्र विधि (संशोधन) विधेयक, 2024 पर विचार कर रही संयुक्त संसदीय समिति के अध्यक्ष एवं भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के सांसद पी. पी. चौधरी ने बताया कि समिति के समक्ष पेश होने वाले अर्थशास्त्रियों में एस. गुरुमूर्ति और शमिका रवि सहित अन्य विशेषज्ञ शामिल थे।
चौधरी ने कहा, ‘‘प्रमुख अर्थशास्त्री हितधारकों के रूप में समिति के समक्ष पेश हुए और मेरा मानना है कि उनके सुझाव बहुमूल्य साबित होंगे।’’
दोनों विधेयक दिसंबर 2024 में लोकसभा में पेश किए गए थे, जिसके बाद इन्हें समीक्षा और सुझाव के लिए संयुक्त संसदीय समिति के पास भेज दिया गया।
पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद की अध्यक्षता वाली एक उच्चस्तरीय समिति द्वारा लोकसभा, विधानसभा और स्थानीय निकायों के चुनाव चरणबद्ध तरीके से एक साथ कराने की सिफारिश किए जाने के बाद ये विधेयक तैयार किए गए थे। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह भी कोविंद की अध्यक्षता वाली समिति के सदस्य थे।
संविधान लागू होने के बाद 1951 से 1967 तक लोकसभा और सभी राज्य विधानसभाओं के चुनाव एक साथ कराए गए थे।
लोकसभा और राज्य विधानसभाओं के पहले आम चुनाव 1951-52 में एक साथ हुए थे और यह व्यवस्था 1957, 1962 तथा 1967 के अगले तीन आम चुनावों तक जारी रही।
हालांकि, कुछ राज्य विधानसभाओं को 1968 और 1969 में समय से पहले भंग किए जाने के कारण एक साथ चुनाव कराने का क्रम टूट गया। चौथी लोकसभा भी 1970 में समय से पहले भंग कर दी गई और 1971 में नए चुनाव कराए गए।
इसके बाद लोकसभा और राज्य विधानसभाओं के समय से पहले भंग होने तथा कुछ मामलों में कार्यकाल बढ़ाए जाने के कारण चुनावों का यह चक्र फिर स्थापित नहीं हो सका। इसके परिणामस्वरूप देश में लोकसभा और विभिन्न विधानसभाओं के चुनाव अलग-अलग समय पर कराने की मौजूदा व्यवस्था बनी।
भाषा हक पवनेश
पवनेश
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